Railway Bonus 2026: रेल कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस, जानें कितनी मिलेगी रकम

केंद्र सरकार ने रेलवे के नॉन-गजेटेड कर्मचारियों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के तहत 78 दिनों के वेतन के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस को मंजूरी देने का ऐलान किया है। मौजूदा गणना के आधार पर बोनस की अधिकतम राशि 17,951 रुपये बनती है। कर्मचारी संगठन बोनस की गणना के लिए न्यूनतम वेतन सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

By  Laxman October 14th 2026 04:21 PM

भारतीय रेलवे के लाखों कर्मचारियों के लिए त्योहारों से पहले राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नॉन-गजेटेड रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) देने की मंजूरी का ऐलान किया है। 14 अक्टूबर को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद यह जानकारी साझा की गई। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह बोनस कर्मचारियों के लिए त्योहारों के अवसर पर आर्थिक सहायता के रूप में दिया जाएगा।

हालांकि, बोनस की वास्तविक राशि का निर्धारण तय गणना सीमा और पात्रता संबंधी नियमों के आधार पर होगा। कर्मचारियों के संगठन लंबे समय से इस गणना में इस्तेमाल होने वाली न्यूनतम वेतन सीमा को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

कितने रुपये का बोनस मिल सकता है?

रेलवे कर्मचारियों के बोनस की गणना फिलहाल 7,000 रुपये की मासिक वेतन सीमा के आधार पर की जाती रही है। 78 दिनों के हिसाब से इसकी राशि 17,951 रुपये बनती है। यही वजह है कि बोनस की गणना में इस्तेमाल होने वाली सीमा को लेकर कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चर्चा जारी है।

रेलवे कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वेतन सीमा में बदलाव नहीं होने से बोनस की राशि में भी अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पाई है। यदि गणना की सीमा 18,000 रुपये कर दी जाए, तो 78 दिनों के हिसाब से बोनस करीब 46,184 रुपये बन सकता है। हालांकि, यह बढ़ी हुई राशि तभी लागू होगी, जब सरकार गणना सीमा में बदलाव को औपचारिक मंजूरी दे।

कर्मचारी संगठन क्यों कर रहे हैं वेतन सीमा बढ़ाने की मांग?

इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) सहित कई कर्मचारी संगठन बोनस की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाली सीमा बढ़ाने की मांग उठा चुके हैं। उनका तर्क है कि पिछले कई वर्षों में वेतन और महंगाई से जुड़े खर्च बढ़े हैं, लेकिन बोनस की गणना का आधार लंबे समय से नहीं बदला गया।

रेलवे कर्मचारियों की मांग है कि बोनस की राशि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप तय की जाए, ताकि त्योहारों के दौरान कर्मचारियों और उनके परिवारों को अधिक आर्थिक सहायता मिल सके।

रेल मंत्री को लिखा गया था पत्र

इस मुद्दे पर राज्यसभा सांसद और CPI(M) नेता जॉन ब्रिटास ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर बोनस की गणना में संशोधन और भुगतान के दिनों की संख्या पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था। पत्र में श्रमिक संगठन सीटू की मांग का हवाला देते हुए गणना सीमा को बढ़ाकर कम से कम 28,440 रुपये प्रति माह करने की अपील की गई थी।

यह मांग महंगाई और न्यूनतम वेतन से जुड़े आकलन पर आधारित बताई गई। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि बोनस की गणना के पुराने आधार में बदलाव से कर्मचारियों को अधिक लाभ मिल सकता है।

कोल इंडिया और SAIL से तुलना

रेलवे कर्मचारियों के कुछ संगठनों ने कोल इंडिया और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में मिलने वाले बोनस का उदाहरण देते हुए रेलवे की बोनस व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में बोनस राशि में समय के साथ बढ़ोतरी हुई है, जबकि रेलवे में गणना की सीमा लंबे समय से स्थिर रही है।

कर्मचारियों के बीच इस अंतर को लेकर असंतोष भी जताया गया है। अब उनकी नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार बोनस की गणना की सीमा में बदलाव करती है या नहीं।

फिलहाल, 78 दिनों के बोनस की घोषणा से रेलवे कर्मचारियों को त्योहारों से पहले राहत मिलने की उम्मीद है। लेकिन 17,951 रुपये से अधिक बोनस पाने की संभावना गणना सीमा में किसी औपचारिक बदलाव और लागू नियमों पर निर्भर करेगी।

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