पश्चिम एशिया तनाव का असर: कमोडिटी मार्केट में निवेशकों का बड़ा दांव...

By  Preeti Kamal April 16th 2026 09:59 AM

नई दिल्ली: Yes Securities की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, सट्टा निवेश (speculative money) कमोडिटी मार्केट का नक्शा बदल रहा है और आगे की दिशा अब भू-राजनीति, ब्याज दरों और सप्लाई शॉक्स पर निर्भर करेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि मेटल, एनर्जी और एग्री सेक्टर में निवेशकों की पोजिशनिंग अब काफी बंटी हुई है—कुछ ट्रेड बहुत ज्यादा भरे हुए (crowded) हैं, जबकि कुछ में बदलाव शुरू हो रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एल्युमिनियम में सट्टा पोजिशनिंग तेजी (bullish) की ओर झुकी है, जिसकी वजह वेस्ट एशिया का भू-राजनीतिक तनाव है। सप्लाई में बाधा के डर से फंड्स ने इसमें बड़ी मात्रा में निवेश किया है, जिससे यह “crowded long” बन गया है। ऐसे में अगर तनाव कम होता है, तो इसमें तेज गिरावट आ सकती है। वहीं, कॉपर में ऊंचे स्तर की पोजिशनिंग धीरे-धीरे कम हो रही है क्योंकि एक्सचेंज इन्वेंटरी बढ़ रही है। जिंक और लेड में निवेश अपेक्षाकृत कम है, जो कमजोर भरोसे को दर्शाता है।

कीमती धातुएं (Precious Metals)

सोना और चांदी में लंबी पोजिशन (long positions) अब घटने लगी हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड्स के कारण इन गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों की मांग कमजोर हो रही है। सोने में अभी भी ऐतिहासिक रूप से ऊंची पोजिशनिंग है, लेकिन इसमें गिरावट आई है, जो मुनाफावसूली (profit booking) को दिखाती है।

चांदी में गिरावट और तेज रही है। प्लैटिनम स्थिर हो रहा है, जबकि पैलेडियम में अभी भी शॉर्ट पोजिशन ज्यादा है, जो एक संभावित उलटफेर (contrarian opportunity) का संकेत देता है।

एनर्जी सेक्टर

रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल (crude) और गैसोलीन में निवेशकों ने बड़ी मात्रा में लंबी पोजिशन बनाई है, जो ईरान से जुड़े सप्लाई शॉक के डर से प्रेरित है। कच्चे तेल की कीमत ~$100 प्रति बैरल के आसपास पहुंचना बताता है कि यह तेजी ज्यादा “momentum-driven” है।

हीटिंग ऑयल में भी तेजी आई है, जबकि नैचुरल गैस अभी भी कमजोर है और उसमें शॉर्ट पोजिशन बनी हुई है, क्योंकि अमेरिकी बाजार में सप्लाई ज्यादा है।अगर सप्लाई का डर कम होता है या डिमांड घटती है, तो तेल में तेज बिकवाली आ सकती है।

एग्री (कृषि) सेक्टर

सोयाबीन और कपास में फंड्स नई खरीदारी कर रहे हैं, जिसका कारण उर्वरक (fertilizer) की लागत और खाद्य महंगाई का जोखिम है। शुगर, कोको और गेहूं में अभी भी शॉर्ट पोजिशन है, लेकिन इसमें कमी आ रही है—खासकर गेहूं में—जो शॉर्ट कवरिंग का संकेत है। रिपोर्ट के अनुसार, एग्री मार्केट अब बेयरिश से न्यूट्रल/बुलिश की ओर बढ़ रहा है।

आगे का नजरिया

Yes Securities का कहना है कि कमोडिटी मार्केट अब “एकतरफा तेजी” से निकलकर दोतरफा (two-way) ट्रेडिंग की ओर बढ़ रहा है। सोने में फिर से तेजी के लिए या तो रियल यील्ड्स में गिरावट या भू-राजनीतिक तनाव में बढ़ोतरी जरूरी होगी। एग्री सेक्टर में ऊपर की तरफ ज्यादा जोखिम (asymmetric upside) है—अगर मौसम खराब होता है या लागत बढ़ती है, तो तेजी तेज हो सकती है।

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