स्याही विवाद: 'धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची, इसलिए स्याही फेंकी', बरखा त्रेहन ने बताई पूरी वजह...
जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकने वाली बरखा त्रेहन ने दावा किया है कि घटना के बाद उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने के विरोध में उन्होंने यह कदम उठाया और प्रदर्शन में सोनम वांगचुक के कथित इस्तेमाल का भी आरोप लगाया।
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके पर नीली स्याही फेंकने वाली महिला बरखा त्रेहन ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद प्रदर्शन स्थल पर उनके साथ मारपीट की गई और उनके बाल खींचे गए। खुद को पुरुष अधिकार कार्यकर्ता बताने वाली त्रेहन ने दावा किया कि उन्होंने धार्मिक भावनाओं की कथित रूप से अनदेखी किए जाने के विरोध में यह कदम उठाया।
उन्होंने कहा कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ नहीं हैं और उनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन का वास्तविक NEET मुद्दे से कोई संबंध नहीं है और इसके पीछे “राजनीतिक एजेंडा” है।
"मैं शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बिल्कुल खिलाफ नहीं हूं"
बरखा त्रेहन ने कहा, “मैं शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बिल्कुल खिलाफ नहीं हूं। मेरा किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध या जुड़ाव नहीं है। जंतर-मंतर पर चल रहा यह कार्यक्रम वास्तविक NEET मुद्दे से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक एजेंडा है।”
स्याही फेंकने की वजह बताते हुए त्रेहन ने आरोप लगाया कि मंच से हिंदू देवी-देवताओं को लेकर कथित तौर पर मजाक किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि इसी कारण उन्होंने अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकी।
बरखा त्रेहन ने आरोप लगाया, “आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि अभिजीत के लोगों ने मेरे साथ कैसा व्यवहार किया। अभिजीत और उनके सहयोगी मंच पर भगवान श्रीराम और माता सीता का मजाक उड़ा रहे थे। मैंने विरोध जताने के लिए अभिजीत पर स्याही फेंकी। मैं ऐसी बातों को बर्दाश्त नहीं करती, चाहे वह देवी दुर्गा, देवी काली या भगवान श्रीराम को लेकर कही जाए।”
उन्होंने आगे दावा किया कि घटना के बाद उन्हें बुरी तरह पीटा गया और उनके बाल खींचे गए। त्रेहन ने दिल्ली पुलिस का आभार जताते हुए कहा कि पुलिस ने उन्हें भीड़ से बाहर निकालकर सुरक्षित बचाया।
सोनम वांगचुक के आंदोलन पर लगाए गंभीर आरोप
बरखा त्रेहन ने सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वांगचुक का इस्तेमाल प्रदर्शन के लिए एक “उपकरण” की तरह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह सोनम वांगचुक से यही कहने के लिए जंतर-मंतर गई थीं कि उनका इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने इसकी तुलना अन्ना हजारे के नेतृत्व वाले 2014 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से भी की।
जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है। यह घटना उसी दिन हुई जब दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट के आदेश के बाद सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल पहुंचाया था। वांगचुक 18 जुलाई को अपनी भूख हड़ताल के 21वें दिन थे।
वांगचुक की पत्नी आंगमो ने लगाए चिकित्सा व्यवस्था पर आरोप
इस बीच, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने सफदरजंग अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि अस्पताल ने वांगचुक के पोटैशियम स्तर के 2.9 तक गिरने की जानकारी परिवार को दी, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य बुलेटिन में इस आंकड़े का उल्लेख नहीं किया।
आंगमो ने दावा किया कि एक स्वतंत्र प्रयोगशाला जांच में वांगचुक का पोटैशियम स्तर 3.5 पाया गया। उन्होंने अस्पताल में भारी पुलिस तैनाती पर भी सवाल उठाते हुए इसे “अवैध हिरासत” बताया है।
वांगचुक की पत्नी आंगमों ने दिल्ली हाईकोर्ट से की मांग
सोनम वांगचुक की पत्नी ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करते हुए उन्हें सफदरजंग अस्पताल से तत्काल डिस्चार्ज करने और परिवार की पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की है। याचिका में उनके अस्पताल में रहने को “अवैध और असंवैधानिक बंदी” बताया गया है। वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। वह NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में आंदोलन कर रहे थे।