नींद के मामले में कौन है दुनिया का चैंपियन? भारत और चीन भी टॉप-5 में, जानिए पूरी रिपोर्ट
ग्लोबल स्लीप डेटा में बड़ा खुलासा, अच्छी नींद और बेहतर स्वास्थ्य के बीच दिखा मजबूत संबंध
नई दिल्ली: तेज रफ्तार जिंदगी, बढ़ते स्क्रीन टाइम और काम के दबाव के बीच दुनिया भर में नींद की समस्या एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। हालांकि हाल ही में सामने आए वैश्विक आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं। कई ऐसे देश हैं जहां लोग हर रात लंबी और बेहतर नींद ले रहे हैं। खास बात यह है कि इस सूची में भारत और चीन जैसे व्यस्त जीवनशैली वाले देश भी शीर्ष पांच में शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त नींद केवल आराम का माध्यम नहीं है, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है। अच्छी नींद शरीर की ऊर्जा बहाल करने, तनाव कम करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
दक्षिण अफ्रीका बना दुनिया का ‘स्लीप चैंपियन’
वैश्विक नींद पैटर्न पर आधारित एक अध्ययन के अनुसार दक्षिण अफ्रीका के लोग सबसे अधिक नींद लेने वालों में शामिल हैं। यहां लोग औसतन 9 घंटे से अधिक समय तक सोते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित दिनचर्या और जीवनशैली के कुछ पहलू इस परिणाम के पीछे अहम कारण हो सकते हैं
लंबी नींद लेने वाले देशों की सूची में दक्षिण अफ्रीका के बाद चीन का स्थान आता है, जहां लोग औसतन 9 घंटे के आसपास नींद लेते हैं।
भारत भी टॉप-5 देशों में शामिल
भारत ने भी इस सूची में उल्लेखनीय स्थान हासिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय नागरिक औसतन करीब 8 घंटे 48 मिनट की नींद लेते हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि स्वास्थ्य और रिकवरी को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त नींद लेने वाले लोगों में कार्यक्षमता बेहतर होती है और मानसिक तनाव अपेक्षाकृत कम रहता है।
सबसे ज्यादा नींद लेने वाले देश
- दक्षिण अफ्रीका – 9 घंटे 13 मिनट
- चीन – 9 घंटे 2 मिनट
- अमेरिका – 8 घंटे 59 मिनट
- एस्टोनिया – 8 घंटे 50 मिनट
- भारत – 8 घंटे 48 मिनट
किन देशों में सबसे कम सोते हैं लोग?
जहां कुछ देश लंबी नींद के लिए चर्चा में हैं, वहीं कई देशों में लोगों की नींद का औसत काफी कम है। रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत सबसे कम नींद लेने वाले देशों में शामिल है। इसके अलावा जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी लोग अपेक्षाकृत कम समय सोते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक कार्यभार, देर रात तक डिजिटल डिवाइस का उपयोग और शहरी जीवनशैली नींद की अवधि को प्रभावित करते हैं।
केवल घंटे नहीं, नींद की गुणवत्ता भी जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि सिर्फ अधिक घंटे सोना ही पर्याप्त नहीं है। यदि नींद बार-बार टूटती है या व्यक्ति पर्याप्त आराम महसूस नहीं करता, तो लंबी अवधि की नींद भी अपेक्षित लाभ नहीं दे पाती।
गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद शरीर की मरम्मत, मस्तिष्क की कार्यक्षमता और भावनात्मक संतुलन के लिए आवश्यक मानी जाती है।
कम नींद से बढ़ सकता है बीमारी का खतरा
विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लगातार कम नींद लेने से कई स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इनमें हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, मानसिक तनाव, अवसाद और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जैसी समस्याएं शामिल हैं।
शोध यह भी बताते हैं कि पर्याप्त नींद न मिलने पर स्मरण शक्ति और एकाग्रता प्रभावित हो सकती है। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली के लिए नियमित और संतुलित नींद को प्राथमिकता देना जरूरी है।
स्वास्थ्य की असली पूंजी है अच्छी नींद
विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी नींद किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संपत्ति है। व्यस्त जीवन के बीच यदि शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम मिलता है, तो कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता दोनों बेहतर होती हैं। यही कारण है कि आज दुनिया भर में लोग बेहतर नींद को स्वस्थ जीवन की पहली शर्त मानने लगे हैं।