HYDRAA विवाद पर सियासत तेज, पिनराई विजयन ने कांग्रेस पर भी साधा निशाना
तिरुवनंतपुरम, केरल: केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने सोमवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर तीखा हमला बोला। यह प्रतिक्रिया बेंगलुरु में आयोजित एक मीडिया सम्मेलन के दौरान रेवंत रेड्डी द्वारा HYDRAA को जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर से जोड़ने वाली टिप्पणी के बाद आई है। फेसबुक पोस्ट में पिनराई विजयन ने रेवंत रेड्डी के बयान को "बेहद चौंकाने वाला और लोकतांत्रिक समाज का अपमान" बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बुलडोजर राज लागू करने के लिए बनाई गई HYDRAA व्यवस्था का नाम दुनिया के सबसे क्रूर नस्लवादी और तानाशाह एडोल्फ हिटलर से प्रेरित बताया गया है। विजयन ने कहा कि रेवंत रेड्डी ने सार्वजनिक मंच से कहा कि "हाइड्रा" हिटलर का पसंदीदा शब्द था और यह ऐसी व्यवस्था है जो किसी को भी खत्म करने में सक्षम है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
'इस बयान को महज़ ज़ुबान फिसलने की घटना नहीं माना जा सकता'
नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह शर्म की बात है कि एक ऐसी पार्टी का मुख्यमंत्री दुनिया के सबसे बड़े फासीवादी शासक की खुलकर प्रशंसा करता दिखाई देता है। पिनराई विजयन ने कहा कि इस बयान को महज जुबान फिसलने की घटना नहीं माना जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस सरकार किस तरह के लोकतांत्रिक मॉडल पर शासन कर रही है, यदि उसकी प्रेरणा हिटलर जैसे तानाशाह से जुड़ी विचारधारा से आती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रेवंत रेड्डी की सोच उनके पुराने संघ परिवार संबंधों को दर्शाती है और कांग्रेस ऐसी विचारधाराओं को अपने भीतर स्थान देती है। विजयन ने कहा कि यही कारण है कि वामपंथी दल लगातार कहते रहे हैं कि कांग्रेस कभी भी भाजपा और आरएसएस की कथित फासीवादी नीतियों का प्रभावी विरोध नहीं कर सकती।
मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर लगाया 'तानाशाही और फासीवादी' मानसिकता का आरोप
इससे पहले रविवार को के. टी. रामाराव (केटीआर) ने भी रेवंत रेड्डी पर हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की टिप्पणी ने पूरे देश के सामने उनकी 'तानाशाही और फासीवादी मानसिकता' को उजागर कर दिया है।
केटी रामाराव ने कहा कि HYDRAA की कार्यप्रणाली को हिटलर से जोड़ने वाला बयान कांग्रेस सरकार के विध्वंस आधारित शासन मॉडल की वैचारिक सोच को सामने लाता है। उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना की जनता पहले से ही इन कथित तानाशाही प्रवृत्तियों का अनुभव कर चुकी है और अब मुख्यमंत्री ने स्वयं इसकी प्रेरणा को स्वीकार कर लिया है।