भरत तिवारी एनकाउंटर केस में 11 आरोपियों पर वारंट, SDM-एसडीपीओ भी शामिल
भरत तिवारी एनकाउंटर केस में आरा CJM कोर्ट ने बड़ा आदेश देते हुए SDM, SDPO और थानाध्यक्ष समेत 11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट ने 12 अगस्त तक सभी को गिरफ्तार कर पेश करने का निर्देश दिया है।
पटना: बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा की सीजेएम अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मामले से जुड़े तत्कालीन एसडीएम, एसडीपीओ और थानाध्यक्ष समेत कुल 11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। अदालत ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर 12 अगस्त 2026 तक कोर्ट के सामने पेश करने का निर्देश दिया है।
भरत तिवारी की मौत 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में कथित पुलिस एनकाउंटर के दौरान हुई थी। 28 वर्षीय भरत की मौत के बाद उनके परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए थे। परिजनों का आरोप है कि भरत को साजिश के तहत फर्जी एनकाउंटर में मारा गया। परिवार लगातार इस मामले में न्याय की मांग करता रहा है।
11 आरोपियों की पेशी का आदेश
सीजेएम कोर्ट के आदेश के बाद अब इस मामले में नामजद सभी 11 आरोपियों की गिरफ्तारी और पेशी की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। गैर-जमानती वारंट जारी होने वालों में उस समय प्रशासन और पुलिस से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं।
अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि आरोपियों को गिरफ्तार कर निर्धारित समय सीमा के भीतर कोर्ट में पेश किया जाए। आरा सीजेएम कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
परिवार ने बताया था फर्जी एनकाउंटर
भरत तिवारी के परिजनों ने शुरुआत से ही पुलिस के दावे पर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि भरत की मौत सामान्य मुठभेड़ में नहीं हुई, बल्कि पुलिस अधिकारियों ने साजिश के तहत उन्हें मार दिया। घटना के बाद से परिवार न्याय की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहा है।
मामले को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी परिवार से मुलाकात की है। एनडीए में शामिल चिराग पासवान समेत कई नेताओं ने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर मामले की जानकारी ली थी। हाल ही में पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से जीते प्रशांत किशोर ने भी परिवार से मुलाकात की थी।
दिल्ली में प्रदर्शन से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला अब केवल बिहार तक सीमित नहीं रहा। इस मामले को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन भी किए गए हैं। वहीं, मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इस बीच बिहार पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 31 जुलाई को एसटीएफ के सिपाही अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोप है कि एनकाउंटर के दौरान पहली गोली अक्षय कुमार ने चलाई थी। इसके बाद अन्य लोगों की ओर से भी फायरिंग किए जाने की बात सामने आई है।
करीब दो महीने बाद फिर तेज हुई कानूनी कार्रवाई
भरत तिवारी की मौत को करीब दो महीने का समय बीत चुका है, लेकिन मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। परिवार के आरोपों, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और पुलिस कार्रवाई के बीच अब अदालत की ओर से 11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है।
अब सबसे अहम सवाल यह है कि पुलिस सभी आरोपियों को 12 अगस्त तक गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर पाती है या नहीं। कोर्ट के इस आदेश के बाद मामले की अगली कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
फिलहाल भरत तिवारी परिवार को इस न्यायिक कार्रवाई से आगे की प्रक्रिया में उम्मीद नजर आ रही है। वहीं, एनकाउंटर से जुड़े आरोपों की जांच और अदालत में चल रही कार्यवाही के जरिए आने वाले दिनों में मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।