बिहार में मिड-डे मील की बड़ी लापरवाही, नमक की जगह डिटर्जेंट मिला खाना; 34 बच्चे बीमार
बिहार के नालंदा जिले में सरकारी स्कूल के मिड-डे मील को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। अतिरिक्त नमक मांगने पर कथित तौर पर नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर बच्चों के खाने में मिला दिया गया। इसके बाद 34 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रशासन के मुताबिक सभी बच्चे अब स्वस्थ हैं और खतरे से बाहर हैं।
पटना/नालंदा: बिहार के नालंदा जिले में मिड-डे मील को लेकर सामने आई एक घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नूरसराय ब्लॉक के परासी स्थित एक सरकारी मिडिल स्कूल में मंगलवार को मिड-डे मील खाने के बाद 34 बच्चों की तबीयत खराब हो गई।
स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, बच्चों ने भोजन के साथ अतिरिक्त नमक मांगा था। इसी दौरान कथित तौर पर नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर बच्चों के खाने में मिला दिया गया। कुछ समय बाद बच्चों ने गले और पेट में दर्द की शिकायत शुरू कर दी। इसके बाद स्कूल में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और प्रभावित बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
जिला प्रशासन के अनुसार, बीमार पड़ने वाले बच्चों में 17 छात्र और 17 छात्राएं शामिल हैं। सभी को बिहारशरीफ सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी जांच की। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल सभी बच्चे स्वस्थ हैं और खतरे से बाहर हैं।
अतिरिक्त नमक मांगने पर हुई कथित गलती
घटना को लेकर स्कूल के प्रधानाध्यापक शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार के मेन्यू के अनुसार बच्चों को चावल और सोयाबीन-आलू की सब्जी परोसी गई थी। स्कूल में मिड-डे मील एक एनजीओ के जरिए पहुंचाया जाता है।
प्रधानाध्यापक के मुताबिक, भोजन अलग-अलग चरणों में बच्चों को दिया जा रहा था। दूसरे चरण में एक छात्रा ने खाने के साथ अतिरिक्त नमक मांगा। बताया गया कि यह छात्रा स्कूल में काम करने वाली एक रसोइया की पोती थी।
आरोप है कि रसोइये ने नमक समझकर गलती से डिटर्जेंट पाउडर उठा लिया और उसे छात्रा के भोजन में मिला दिया। जब दूसरे बच्चों ने रसोइया को अतिरिक्त नमक देते देखा तो उन्होंने भी नमक की मांग की। इसी दौरान कथित तौर पर कई अन्य बच्चों के खाने में भी वही पदार्थ चला गया।
कुछ देर बाद बच्चों ने तबीयत खराब होने की शिकायत करनी शुरू कर दी। बच्चों को गले और पेट में दर्द महसूस होने लगा, जिसके बाद स्कूल प्रबंधन को गलती का पता चला।
34 बच्चों को अस्पताल ले जाया गया
घटना के बाद प्रभावित बच्चों को पहले भागन बिगहा स्थित डेंटल कॉलेज ले जाया गया। वहां से उन्हें आगे के इलाज के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल भेजा गया।
अधिकारियों के मुताबिक, करीब 132 बच्चों को दोपहर लगभग 12:30 बजे भोजन परोसा गया था। इनमें से 34 बच्चों ने बाद में तबीयत खराब होने की शिकायत की। इसके बाद उन्हें लगभग 2:15 बजे सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जिला प्रशासन के अधिकारियों और शिक्षा विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों की स्थिति की जानकारी ली। बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने भी अस्पताल पहुंचकर बच्चों से मुलाकात की और डॉक्टरों को उचित इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
डॉक्टरों की जांच के बाद प्रशासन ने बताया कि सभी बच्चों की स्थिति स्थिर है और फिलहाल किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की पुष्टि नहीं हुई है।
खाना सप्लाई करने वाली व्यवस्था पर भी नजर
इस मामले में मिड-डे मील की सप्लाई व्यवस्था भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों के अनुसार, स्कूल में भोजन एकता शक्ति फाउंडेशन की नगरनौसा स्थित रामघाट केंद्रीय रसोई से पहुंचाया गया था।
बताया गया कि इस केंद्रीय रसोई से चंडी, नगरनौसा और नूरसराय प्रखंडों के करीब 206 स्कूलों में रोजाना लगभग 23 हजार बच्चों के लिए मिड-डे मील भेजा जाता है।
अधिकारियों के मुताबिक, भोजन स्कूल पहुंचने के बाद परोसे जाने से पहले दो रसोइयों और दो शिक्षकों ने खुद भी खाना खाया था। इसके बावजूद बच्चों के भोजन में डिटर्जेंट पहुंचने की घटना ने स्कूल स्तर पर भोजन परोसने और सामग्री संभालने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
खाने के सैंपल की होगी जांच
जिला प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, खाने के सैंपल लिए जाएंगे और उनकी जांच कराई जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्चों के भोजन में वास्तव में कौन-सा पदार्थ मिला था और घटना किस स्तर पर हुई।
फिलहाल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बच्चों की मेडिकल जांच में उनकी हालत सामान्य पाई गई है। सभी प्रभावित बच्चों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया और उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई गई।
इस घटना के बाद अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है। जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि डिटर्जेंट बच्चों के भोजन तक कैसे पहुंचा और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मामले में कोई FIR या औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है।
यह घटना एक बार फिर सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की निगरानी, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण और भोजन परोसने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े करती है। हालांकि, अंतिम जिम्मेदारी और घटना की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।