टीवी चैनलों के लिए केंद्र की नई एडवाइजरी, भ्रामक खबरों और AI के इस्तेमाल पर दी हिदायत
केंद्र सरकार ने टीवी समाचार चैनलों को कार्यक्रम संहिता का पालन करने, अपराध और हिंसा की संवेदनशील रिपोर्टिंग, प्राकृतिक आपदाओं में सत्यापित तथ्यों, भारत के प्रामाणिक नक्शों, पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार इस्तेमाल की सलाह दी है।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने टेलीविजन समाचार चैनलों को खबरों के प्रसारण में जिम्मेदारी बरतने और निर्धारित कार्यक्रम संहिता (Programme Code) का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी एडवाइजरी में अपराध, हिंसा, प्राकृतिक आपदाओं, सांप्रदायिक सद्भाव, पीड़ितों की पहचान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं।
21 अक्टूबर 2026 को उप सचिव अर्पिता एस के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी दस्तावेज के अनुसार, मंत्रालय ने प्रसारकों को अपने संपादकीय और सामग्री समीक्षा तंत्र को मजबूत करने तथा समाचार जुटाने, संपादन, निर्माण और प्रसारण से जुड़े कर्मचारियों को कार्यक्रम संहिता के प्रावधानों के प्रति जागरूक करने की सलाह दी है।
अपराध और हिंसा की खबरों में सनसनीखेज प्रस्तुति से बचने की सलाह
मंत्रालय ने टीवी चैनलों को अपराध, दुर्घटनाओं और हिंसा से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग में सावधानी बरतने को कहा है। एडवाइजरी में ऐसे दृश्यों के बार-बार प्रसारण से बचने पर जोर दिया गया है, जो दर्शकों को परेशान कर सकते हैं या अनुचित व्यवहार को सामान्य अथवा महिमामंडित करते हुए दिखा सकते हैं। जहां आवश्यक हो, वहां दृश्यों को धुंधला करने या अन्य उपयुक्त तकनीकों से संवेदनशील सामग्री को छिपाने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने इस संदर्भ में 9 जनवरी 2023 को जारी अपनी पूर्व एडवाइजरी का भी उल्लेख किया है।
प्राकृतिक आपदाओं और बड़ी दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग में तथ्य जरूरी
प्राकृतिक आपदाओं, बड़ी दुर्घटनाओं और गंभीर घटनाओं के प्रसारण के दौरान चैनलों को सत्यापित तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग करने की सलाह दी गई है। मंत्रालय के अनुसार, ऐसी घटनाओं के दृश्यों को समय और संदर्भ के साथ दिखाया जाना चाहिए, ताकि दर्शकों के बीच अनावश्यक घबराहट न फैले। दस्तावेज में 9 अगस्त 2024 और 18 नवंबर 2025 को जारी पूर्व एडवाइजरी का भी उल्लेख है।
भारत के प्रामाणिक नक्शों के इस्तेमाल पर जोर
मंत्रालय ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को अपने समाचार प्रसारण, ग्राफिक्स और डिजिटल प्रस्तुतियों में भारत के केवल प्रामाणिक नक्शों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इसके लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा प्रकाशित नक्शों को आधार बनाने को कहा गया है।
सांप्रदायिक सौहार्द और बहस के कार्यक्रमों पर नजर
टीवी चैनलों को लाइव बहस और पैनल चर्चाओं सहित सभी कार्यक्रमों में सांप्रदायिक या राष्ट्रविरोधी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने से बचने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने संपादकीय नियंत्रण मजबूत करने, बहस में शामिल होने वाले प्रतिभागियों के चयन में सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर उन्हें पहले से नियमों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया है।
यदि किसी कार्यक्रम में अपमानजनक, गाली-गलौज या भड़काऊ सामग्री प्रसारित होने लगे, तो चैनलों को आवश्यकतानुसार आवाज बंद करने, चेतावनी देने, प्रसारण रोकने या कार्यक्रम समाप्त करने जैसे कदम उठाने की सलाह दी गई है।
यौन अपराध पीड़ितों की पहचान उजागर नहीं करने का निर्देश
एडवाइजरी में यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है। चैनलों को संबंधित कानूनी प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। पीड़ित की पहचान उजागर करने वाली तस्वीरें, परिवार का विवरण, स्थान, व्यक्तिगत जानकारी या अन्य ऐसे तथ्य प्रसारित नहीं किए जाने चाहिए, जिनसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पीड़ित की पहचान सामने आ सकती है।
AI के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की सलाह
मंत्रालय ने समाचार कार्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जनरेटिव एआई उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा है। इसमें समाचार ग्राफिक्स और आभासी समाचार प्रस्तुतियों जैसे उपयोग शामिल हैं। एडवाइजरी के मुताबिक, एआई उपकरणों का इस्तेमाल सहायक भूमिका तक सीमित रखा जाना चाहिए और इससे समाचार सामग्री की सटीकता, प्रामाणिकता या संवेदनशीलता से समझौता नहीं होना चाहिए। चैनलों को कार्यक्रम संहिता का पालन भी सुनिश्चित करना होगा।
नियमों का उल्लंघन करने पर हो सकती है कार्रवाई
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम संहिता का पालन करना प्रसारकों की वैधानिक जिम्मेदारी है। इसका उल्लंघन होने पर केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। एडवाइजरी में चैनलों को नियमित प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और जागरूकता सत्रों के जरिए अपने संपादकीय एवं प्रोडक्शन कर्मचारियों को नियमों के प्रति संवेदनशील बनाने की सलाह भी दी गई है।