CJI सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं को क्यों नहीं दिया मिलने का समय? बोले- सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात नहीं करने के पीछे कानूनी और संवैधानिक कारण बताए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी शिकायतें पहले से अदालत में लंबित हैं, जबकि कानून के तहत याचिका दाखिल करने का रास्ता सभी के लिए खुला है।

By  Laxman October 12th 2026 11:54 AM

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात नहीं करने के पीछे कानूनी और संवैधानिक कारणों का हवाला दिया है। दिल्ली में प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की शिकायतों के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं, लेकिन किसी मामले पर कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही की जा सकती है।

विपक्षी नेताओं ने मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात के लिए समय मांगा था। इस संबंध में पूछे जाने पर CJI सूर्यकांत ने बताया कि उन्हें विपक्ष की चिट्ठी एक दिन पहले मिली थी और उन्होंने उसी रात जवाब दे दिया था। उनके मुताबिक, पत्र पहले लिखा गया था, लेकिन बाहर होने के कारण उन्हें वह बाद में प्राप्त हुआ। जवाब में उन्होंने मुलाकात नहीं कर पाने के कारण स्पष्ट कर दिए थे।

यह मामला ऐसे समय चर्चा में आया, जब कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के आरोपों को लेकर अपनी शिकायतें उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं की ओर से मुख्य न्यायाधीश से मिलने का अनुरोध इसी संदर्भ में किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले: CJI

मुलाकात नहीं करने के फैसले पर अपनी बात रखते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उनके अनुसार, आम नागरिक हों या किसी सरकारी संस्था के सदस्य, सभी कानून के मुताबिक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अदालत आ सकते हैं।

CJI के इस बयान का मुख्य संदेश यह था कि न्याय पाने के लिए अदालत में आने का अधिकार बना हुआ है। हालांकि, किसी शिकायत पर विचार करने और उसके समाधान के लिए निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

इस तरह, विपक्षी नेताओं से व्यक्तिगत मुलाकात नहीं करने के फैसले को अदालत के दरवाजे बंद होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अदालत में याचिका दाखिल करना और उस पर सुनवाई कराना एक औपचारिक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके जरिए संबंधित पक्ष अपनी दलीलें रख सकते हैं।

विपक्ष को नहीं मिलने के पीछे बताए चार कारण

1. चुनाव आयोग और SIR के मामले पहले से लंबित

CJI सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं की शिकायतों के संदर्भ में बताया कि चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में संबंधित मुद्दों पर अदालत की प्रक्रिया के तहत सुनवाई की जा सकती है।

जब किसी विषय पर मामला पहले से अदालत के सामने हो, तो उससे जुड़ी दलीलों और शिकायतों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही उठाना महत्वपूर्ण होता है।

2. प्रशासनिक स्तर पर शिकायतों पर विचार की सीमा

मुख्य न्यायाधीश ने संवैधानिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक पक्ष के पास ऐसी शिकायतों पर उसी तरह संज्ञान लेने की शक्ति नहीं है, जैसे अदालत न्यायिक कार्यवाही के दौरान किसी मामले पर विचार करती है।

इसका अर्थ है कि शिकायतों को सुनने और उन पर आदेश देने के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी। न्यायिक और प्रशासनिक भूमिकाओं के बीच अंतर बनाए रखना इस व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

3. संविधान के तहत याचिका दाखिल करने का विकल्प

CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित पक्षों के लिए कानूनी रास्ता खुला है। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जा सकता है, बशर्ते याचिका संबंधित कानूनी शर्तों के अनुरूप हो।

उन्होंने संकेत दिया कि यदि सोमवार को याचिका दाखिल की जाती है, तो उस पर अगले दिन सुनवाई की जा सकती है। उनके अनुसार, संबंधित मुद्दों से जुड़े पहले से लंबित मामले भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थे।

इससे यह स्पष्ट होता है कि शिकायतों को अदालत के सामने रखने के लिए मुलाकात के बजाय औपचारिक याचिका का रास्ता अपनाया जा सकता है।

4. मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध अदालत

मुख्य न्यायाधीश ने भरोसा दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोहराया कि हर नागरिक और जनप्रतिनिधि को कानून के मुताबिक न्याय पाने का अधिकार है।

अदालत की भूमिका किसी शिकायत पर विचार करने, संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने और कानून के आधार पर फैसला देने की है। इसी प्रक्रिया के जरिए संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाती है।

वोट चोरी के आरोपों पर विपक्ष का रुख

कांग्रेस और इंडिया गठबंधन में शामिल अन्य विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी मुख्य न्यायाधीश से मिलने के लिए समय मांगा था। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दों पर अपनी चिंताएं सामने रखने की कोशिश की गई।

वहीं, इन आरोपों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित तथ्यों, दस्तावेजों और कानूनी दलीलों की जांच जरूरी है। आरोपों को अपने आप में सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। अदालत में लंबित मामलों का नतीजा न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

अब आगे क्या होगा?

CJI सूर्यकांत के जवाब के बाद विपक्ष के सामने संबंधित शिकायतों को औपचारिक कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाने का विकल्प है। यदि याचिका दाखिल की जाती है, तो अदालत उसके तथ्यों और कानूनी आधार पर विचार कर सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य मुद्दा यह है कि न्याय तक पहुंच का अधिकार और अदालत की निर्धारित प्रक्रिया, दोनों साथ-साथ चलते हैं। CJI का रुख इसी अंतर को रेखांकित करता है। विपक्ष अपनी शिकायतें अदालत के सामने रख सकता है, लेकिन उन पर विचार और कार्रवाई कानून के दायरे में ही होगी।

© Copyright Galactic Television & Communications Pvt. Ltd. 2026. All rights reserved.