‘कुछ लोग सिस्टम पर हमला करने को एक्टिविज्म बना लेते हैं’, सुनवाई के दौरान Chief Justice की टिप्पणी

By  GTC Bharat May 15th 2026 05:14 PM -- Updated: May 15th 2026 05:15 PM

वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, सोशल मीडिया व्यवहार पर भी उठाए सवाल |

Chief Justice Surya Kant ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कुछ युवाओं और तथाकथित एक्टिविस्ट्स पर तीखी टिप्पणी की। एक मामले की सुनवाई करते हुए CJI ने कहा कि कुछ लोग पेशेवर पहचान न बना पाने के बाद सोशल मीडिया और एक्टिविज्म के जरिए व्यवस्था पर लगातार हमला करने लगते हैं।

यह टिप्पणी उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट की बेंच एक वकील की वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) पदनाम से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। बेंच में जस्टिस Joymalya Bagchi भी शामिल थे।

अदालत ने वकील के व्यवहार पर जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता वकील के सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा केवल कानूनी योग्यता ही नहीं, बल्कि पेशेवर आचरण और जिम्मेदारी से भी जुड़ा होता है।

CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल केवल संस्थाओं और व्यवस्था की आलोचना करने के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जो बिना किसी रचनात्मक योगदान के केवल विवाद पैदा करने में लगे रहते हैं।

‘सीनियर एडवोकेट का दर्जा सम्मान है’

बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा कोई “स्टेटस सिंबल” नहीं है, बल्कि यह कानूनी क्षेत्र में लंबे अनुभव, विश्वसनीयता और पेशेवर मर्यादा के आधार पर दिया जाने वाला सम्मान है।

अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उनका सार्वजनिक व्यवहार उस व्यक्ति जैसा है जिसे अदालत वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा देने पर विचार करे।

सोशल मीडिया पोस्ट पर भी चर्चा

कोर्ट ने वकील के फेसबुक पोस्ट और कथित आपत्तिजनक भाषा का भी उल्लेख किया। बेंच ने कहा कि न्यायिक संस्थाओं और व्यवस्था पर टिप्पणी करते समय जिम्मेदारी और मर्यादा जरूरी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि केवल लोकप्रियता या सोशल मीडिया उपस्थिति किसी व्यक्ति की पेशेवर योग्यता का आधार नहीं हो सकती।

वकीलों की डिग्रियों पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश में कुछ वकीलों की शैक्षणिक डिग्रियों की विश्वसनीयता को लेकर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि कई मामलों में डिग्रियों की प्रमाणिकता पर सवाल उठते रहे हैं और इसकी गंभीर जांच की जरूरत है।

बेंच ने संकेत दिया कि इस तरह के मामलों में जांच एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

याचिका वापस ली गई

सख्त टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ता वकील ने अदालत से माफी मांगी और अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

कानूनी हलकों में चर्चा तेज

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद कानूनी और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कुछ लोगों ने इसे पेशेवर नैतिकता पर जरूरी टिप्पणी बताया, जबकि कुछ ने अदालत की भाषा को लेकर सवाल भी उठाए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक वकील की याचिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सोशल मीडिया, एक्टिविज्म और पेशेवर जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर भी बड़ी चर्चा को जन्म देता है।

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