CJP नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को जमानत, हिरासत बढ़ाने की पुलिस की मांग खारिज

CJP नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को SEM अदालत से जमानत मिल गई है। दिल्ली पुलिस की हिरासत बढ़ाने की मांग खारिज होने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ। दोनों जंतर-मंतर पर बैरिकेड्स पार करने के आरोपों से जुड़े मामलों का सामना कर रहे हैं।

By  Laxman October 21st 2026 06:58 PM

नई दिल्ली:  कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को जमानत मिल गई है। दोनों पिछले कई दिनों से तिहाड़ जेल में बंद थे। स्पेशल एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने उनकी हिरासत आगे बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की और दोनों की रिहाई का आदेश जारी कर दिया। इस फैसले के बाद दोनों नेताओं के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया।

दोनों को दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया था। उन पर आरोप है कि वे जंतर-मंतर पर लगाए गए बैरिकेड्स पार करके प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल हुए थे। इस मामले में उन्हें 14 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में उनकी हिरासत की अवधि बढ़ाई गई, जिसके चलते उन्हें जेल में रहना पड़ा।

पुलिस ने मांगी थी हिरासत बढ़ाने की अनुमति

रांका और दास की न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने पर उन्हें बुधवार को दोपहर करीब दो बजे SEM अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों की हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की। हालांकि, अदालत ने पुलिस की इस मांग को खारिज कर दिया और दोनों को जमानत देने का आदेश दिया।

जमानत के आदेश के बाद उनकी रिहाई से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ी। इस घटनाक्रम को दोनों नेताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि वे कई दिनों से जेल में बंद थे। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उनके खिलाफ दर्ज मामलों की कार्यवाही समाप्त हो गई है। संबंधित मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।

दिल्ली हाईकोर्ट में भी पहुंचा था मामला

न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के बाद आशुतोष रांका और सौरव दास ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब मजिस्ट्रेट अदालत में मामला लंबित है और कानून में अपील सहित दूसरे विकल्प उपलब्ध हैं, तो सीधे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका क्यों दायर की गई।

सुनवाई में अदालत ने बॉन्ड की शर्तों, जमानतदारों से जुड़े मुद्दों और मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल किए। अदालत ने दोनों के वकीलों से उनकी उम्र के बारे में पूछा। वकील ने बताया कि सौरव दास 27 वर्ष और आशुतोष रांका 31 वर्ष के हैं। सुनवाई के दौरान जेनरेशन जेड और मिलेनियल्स को लेकर भी टिप्पणी हुई।

हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद दोनों कार्यकर्ताओं ने अपनी याचिकाएं वापस ले ली थीं। इस घटनाक्रम के बाद उनकी रिहाई से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया मजिस्ट्रेट अदालत में आगे बढ़ी।


किन धाराओं के तहत दर्ज हैं मामले?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आशुतोष रांका और सौरव दास के खिलाफ अलग-अलग थानों में दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। कनॉट प्लेस थाने में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223A, 332 और 61(2) का उल्लेख है। ये प्रावधान सरकारी आदेश के उल्लंघन, कुछ परिस्थितियों में परिसर में प्रवेश और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों के संदर्भ में बताए गए हैं।

वहीं, संसद मार्ग थाने में दर्ज दूसरी एफआईआर में धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) शामिल हैं। ये आरोप सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने, चोट पहुंचाने, ड्यूटी से रोकने के लिए बल प्रयोग और साझा मंशा जैसे विषयों से संबंधित हैं।

इन धाराओं का उल्लेख प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को दर्शाता है। आरोपों की अंतिम वैधता और दोनों नेताओं की जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

जमानत के बाद आगे क्या?

जमानत मिलने से दोनों नेताओं को तत्काल राहत मिली है, लेकिन उनके खिलाफ दर्ज मामलों का भविष्य आगे की कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगा। पुलिस और अदालतों की अगली कार्रवाई यह तय करेगी कि मामलों में सुनवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।

फिलहाल, SEM अदालत का आदेश दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाने की मांग पर विराम लगाता है। जंतर-मंतर पर हुई घटना से जुड़े आरोपों और उसके बाद की कानूनी कार्रवाई ने इस मामले को राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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