CJP तिरंगा मार्च पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की मांग, जस्टिस बागची बोले- प्रदर्शन, कारोबार और कानून-व्यवस्था सब जरूरी

CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की गई। CJI सूर्यकांत ने छोटे दुकानदारों की आजीविका पर चिंता जताई, जबकि जस्टिस बागची ने प्रदर्शन, कारोबार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन की जरूरत बताई। सेंट्रल पार्क बंद करने का मुद्दा भी अदालत में उठा।

By  Laxman October 16th 2026 12:02 PM

नई दिल्ली:  कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘लहरा दो तिरंगा’ अभियान को लेकर दिल्ली में कानूनी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित मार्च के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की गई। इस दौरान छोटे दुकानदारों की आजीविका, सार्वजनिक व्यवस्था और प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन का मुद्दा उठा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे, जबकि जस्टिस बागची ने प्रदर्शन, कारोबार और कानून-व्यवस्था को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताया।

याचिका का उल्लेख वकील जय अनंत देहाद्राई ने किया। इसमें आशंका जताई गई कि प्रस्तावित मार्च के कारण कनॉट प्लेस के कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। अदालत के सामने यह मुद्दा ऐसे समय आया, जब CJP ने 16 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च आयोजित करने का आह्वान किया था।

छोटे दुकानदारों की आजीविका पर चिंता

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि उम्मीद है कि सभी लोग विवेकपूर्ण तरीके से स्थिति को संभालेंगे। उन्होंने छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापार में बाधा आने का असर केवल दुकानदार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके पूरे परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

अदालत में उठाई गई चिंता का केंद्र यह था कि किसी सार्वजनिक आयोजन के कारण व्यावसायिक गतिविधियां कितनी प्रभावित हो सकती हैं। कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख कारोबारी और व्यस्त सार्वजनिक क्षेत्र है, जहां दुकानों, रेस्तरां और अन्य प्रतिष्ठानों पर रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंचते हैं।

जस्टिस बागची की टिप्पणी क्यों रही अहम?

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि किसी को प्रदर्शन करना है, किसी को मूंगफली बेचकर आजीविका कमानी है और किसी को कानून-व्यवस्था बनाए रखनी है। उनकी टिप्पणी का आशय यह था कि सार्वजनिक स्थानों पर अलग-अलग लोगों की जरूरतों और जिम्मेदारियों को साथ लेकर चलना जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कारोबार को नुकसान पहुंचता है, तो अदालत अपने संवैधानिक अधिकार क्षेत्र के तहत उचित पहलुओं पर विचार कर सकती है। हालांकि, तत्काल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय उन्होंने पहले स्थिति सामने आने देने की बात कही।

इस टिप्पणी से साफ हुआ कि मामले में केवल प्रदर्शन की अनुमति या प्रतिबंध का सवाल नहीं है, बल्कि व्यापारियों के हित, सार्वजनिक व्यवस्था और नागरिकों के अधिकारों पर भी विचार किया जा रहा है।

सेंट्रल पार्क बंद करने का मुद्दा भी उठा

याचिका का उल्लेख करते हुए देहाद्राई ने अदालत को बताया कि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने गुरुवार देर रात एक नोटिस जारी कर कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने की घोषणा की थी। नोटिस में प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया गया था।

इस पर जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि यदि पार्क बंद करने के कारण कारोबार प्रभावित होता है, तो ऐसा कदम जरूरत से अधिक कठोर साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नुकसान और जनहित से जुड़े पहलुओं पर उचित स्थिति सामने आने के बाद विचार किया जा सकता है।

मामले में सुनवाई की अगली तारीख 26 या 27 अक्टूबर बताई गई है। इस बीच पार्क बंद करने के आदेश और उसके व्यावसायिक प्रभाव को लेकर उठे सवाल महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

मार्च से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के आह्वान के बाद कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाए जाने की जानकारी दी गई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सेंट्रल पार्क और राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के आसपास निगरानी के लिए CCTV कैमरे लगाने की व्यवस्था भी की जा रही थी।

दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई थी। हालांकि, तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था के वास्तविक स्तर की पुष्टि के लिए आधिकारिक पुलिस बुलेटिन देखना जरूरी है।

जंतर-मंतर से शुरू हुआ विवाद

इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर विवाद भी शामिल है। पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर किए जाने के बाद रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान जैसे वैकल्पिक स्थानों का उल्लेख किया था।

CJP ने इसके बाद कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च का आह्वान किया। पार्टी की ओर से राष्ट्रीय ध्वज फहराने को लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का हिस्सा बताया गया है। वहीं, प्रशासन के सामने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और लागू नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।

आगे क्या होगा?

इस मामले में अदालत के सामने उठे सवाल आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेंगे। एक ओर छोटे कारोबारियों को संभावित नुकसान से बचाने की चिंता है, तो दूसरी ओर शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति के अधिकार का सवाल भी है।

अदालत ने कारोबार पर संभावित असर और मुआवजे से जुड़े पहलुओं पर विचार की गुंजाइश जताई है, लेकिन अंतिम फैसला आगे की कार्यवाही और सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगा। फिलहाल सभी पक्षों की नजर अगली सुनवाई और प्रशासनिक कदमों पर बनी हुई है।

© Copyright Galactic Television & Communications Pvt. Ltd. 2026. All rights reserved.