अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की सेहत पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, रोजाना निगरानी का आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर गंभीर चिंता जताई और सरकार को उनकी रोजाना मेडिकल जांच कराने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि हर नागरिक का जीवन अनमोल है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है।
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि "हर नागरिक का जीवन अनमोल है और उसे बचाने के लिए सरकार को हरसंभव प्रयास करने चाहिए।" अदालत ने निर्देश दिया कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के जंतर-मंतर पर जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान उनकी रोजाना चिकित्सकीय निगरानी (Daily Medical Monitoring) की जाए।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सरकारी डॉक्टरों की राय में किसी तरह के चिकित्सकीय हस्तक्षेप (Medical Intervention) की आवश्यकता हो, तो उसे बिना किसी देरी के उपलब्ध कराया जाए। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने यह निर्देश उस जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए दिए, जिसे राकेश कुमार साहनी ने सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दायर किया था।
केंद्र ने कोर्ट को दिया भरोसा
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि याचिका में बताया गया है कि सोनम वांगचुक पिछले 17–18 दिनों से जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं और लंबे उपवास के कारण उनकी सेहत खराब होने की आशंका जताई गई है। केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की ओर से वर्चुअल माध्यम से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक की हर दिन स्वास्थ्य जांच की जा रही है और उनके सभी मेडिकल पैरामीटर की नियमित निगरानी की जा रही है।
इस पर अदालत ने पूछा कि क्या उनकी स्वास्थ्य निगरानी के लिए कोई तय व्यवस्था (Mechanism) मौजूद है। जवाब में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम नियमित रूप से उनकी जांच कर रही है।
जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज का निर्देश
सरकार के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि हर नागरिक का जीवन बहुमूल्य है। अदालत ने सरकारी पक्ष के रुख की सराहना करते हुए निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक की रोजाना क्लीनिकल मॉनिटरिंग जारी रहे और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार यदि किसी उपचार या मेडिकल हस्तक्षेप की जरूरत हो तो उसे तत्काल किया जाए। सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर एक अतिरिक्त मेडिकल टीम भी वांगचुक की जांच के लिए भेजी जा सकती है।
सरकार के इस आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया। गौरतलब है कि लद्दाख के इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।