CJP प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, कहा- 10 अक्टूबर को अनुमति देते तो बिगड़ सकते थे हालात
दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के कारण बताए। पुलिस ने जुलाई की कथित हिंसा, अक्टूबर में यातायात बाधित होने और राजधानी के संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा का हवाला दिया।
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्पष्ट किया है कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति क्यों नहीं दी गई। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के अनुसार, पहले हुए प्रदर्शनों में हिंसा, प्रदर्शनकारियों पर भीड़ को नियंत्रित न कर पाने के आरोप और मध्य दिल्ली में यातायात व्यवस्था प्रभावित होने जैसी परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला लिया गया। पुलिस का कहना है कि उसे आशंका थी कि प्रदर्शन की अनुमति देने पर स्थिति 20 जुलाई की घटनाओं से भी अधिक गंभीर हो सकती थी।
संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा को प्राथमिकता
हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली को सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र बताया। इस इलाके में संसद, राष्ट्रपति भवन, सुप्रीम कोर्ट, विभिन्न देशों के दूतावास और कई महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान स्थित हैं। पुलिस के मुताबिक, ऐसे स्थानों के आसपास किसी बड़े जमावड़े के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आम नागरिकों की आवाजाही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारी है।
पुलिस कमिश्नर ने अपने पक्ष में 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा का उल्लेख किया। हलफनामे के अनुसार, पुलिस को यह भी आशंका थी कि CJP के नेता और आयोजक प्रदर्शन में शामिल लोगों को नियंत्रित करने में सफल नहीं हो पाएंगे। इसी आधार पर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर जुटने की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया गया।
6 से 8 अक्टूबर के प्रदर्शनों का भी दिया हवाला
दिल्ली पुलिस ने हलफनामे में 6, 7 और 8 अक्टूबर को हुए लगातार प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं से मध्य दिल्ली में यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई थी। पुलिस के मुताबिक, कई प्रमुख मार्गों पर लंबे समय तक जाम लगा रहा और आम लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
हलफनामे में दावा किया गया कि यातायात बाधित होने से छात्रों और अन्य यात्रियों को परेशानी हुई। कुछ लोगों की ट्रेनें और उड़ानें छूटने की बात भी पुलिस ने कही। पुलिस का तर्क है कि इन अनुभवों को देखते हुए 10 अक्टूबर को एक और बड़े प्रदर्शन की अनुमति देना सार्वजनिक व्यवस्था के लिए जोखिम भरा हो सकता था।
प्रदर्शनकारियों पर पुलिसकर्मियों से दुर्व्यवहार के आरोप
10 अक्टूबर से संबंधित घटनाओं का उल्लेख करते हुए पुलिस कमिश्नर ने आरोप लगाया कि निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद कुछ लोगों ने एकत्र होने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, भीड़ में मौजूद कुछ लोग आक्रामक व्यवहार कर रहे थे और कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाल रहे थे। हलफनामे में महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार और एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों के घायल होने का भी दावा किया गया है।
पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए कुछ लोगों ने उन्हें ले जाने के लिए इस्तेमाल की जा रही बसों के टायर पंचर कर दिए और शीशे तोड़ दिए। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों को प्रदर्शन स्थल से हटाया गया।
हालांकि, ये विवरण पुलिस की ओर से अदालत में रखे गए दावे हैं। इन आरोपों के संबंध में संबंधित पक्षों का जवाब और अदालत में हुई आगे की कार्यवाही अलग से देखी जानी चाहिए।
पुलिस का दावा- औपचारिक अनुमति नहीं मांगी गई थी
हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने कहा कि CJP की ओर से 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के संबंध में औपचारिक अनुमति के लिए आवेदन नहीं किया गया था, बल्कि पुलिस को प्रस्तावित कार्यक्रम की सूचना दी गई थी। पुलिस के अनुसार, खुफिया सूचनाओं और पहले की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए थे।
पुलिस का कहना है कि अनुमति नहीं होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों के जंतर-मंतर पहुंचने की आशंका थी। प्रशासन को डर था कि इससे यातायात, सार्वजनिक व्यवस्था और महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
हिरासत में लिए गए लोगों को कुछ घंटे बाद छोड़ा गया
पुलिस कमिश्नर ने हलफनामे में हिरासत में लिए गए लोगों के साथ किए गए व्यवहार का भी उल्लेख किया। पुलिस के अनुसार, निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर प्रदर्शन करने की कोशिश के दौरान हिरासत में लिए गए सभी लोगों को कुछ घंटे बाद रिहा कर दिया गया था।
हलफनामे में दावा किया गया कि लोगों को पुलिस लॉकअप के बजाय अस्थायी केंद्रों में रखा गया और उन्हें भोजन उपलब्ध कराया गया। पुलिस के मुताबिक, जब हिरासत में रखने की आवश्यकता समाप्त हो गई, तो उन्हें जाने की अनुमति दे दी गई।
पुलिस ने यह भी कहा कि हटाए गए राजनीतिक नेताओं को संबंधित थानों में अधिकारियों के कक्षों में बैठने का विकल्प दिया गया और उनके लिए चाय, कॉफी तथा जलपान की व्यवस्था की गई। पुलिस का दावा है कि उनके पद और गरिमा का ध्यान रखा गया।
अब सुप्रीम कोर्ट में पुलिस के पक्ष पर नजर
दिल्ली पुलिस का हलफनामा 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने के फैसले के पीछे सुरक्षा, यातायात और कानून-व्यवस्था से जुड़े कारणों को सामने रखता है। पुलिस ने 20 जुलाई की कथित हिंसा और अक्टूबर में लगातार हुए प्रदर्शनों को अपने निर्णय का आधार बताया है।
इस मामले में पुलिस के दावों के साथ-साथ प्रदर्शन आयोजकों का पक्ष और अदालत की आगे की कार्यवाही भी महत्वपूर्ण होगी। हलफनामे में लगाए गए आरोपों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।