FCRA Bill JPC में भेजने का प्रस्ताव पास, विपक्ष का हंगामा; सरकार बोली- कांग्रेस गुमराह कर रही
FCRA Bill 2026 को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में पारित हो गया। विपक्ष ने बिल का विरोध किया, जबकि सरकार ने कांग्रेस पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया। मिजोरम में भी विधेयक के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन हुआ।
नई दिल्ली: विदेशी चंदे से जुड़े FCRA (Foreign Contribution Regulation Amendment) Bill, 2026 को लेकर संसद में जारी सियासी टकराव के बीच बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। लोकसभा में इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव पारित हो गया। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने यह प्रस्ताव सदन में पेश किया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया और सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग दोहराई।
FCRA विधेयक पिछले कई दिनों से संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है। विपक्षी दल इसके कई प्रावधानों पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रस्तावित बदलावों का असर गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), सामाजिक संस्थाओं और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े संस्थानों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर पड़ सकता है।
JPC भेजने पर बनी सहमति
बुधवार को लोकसभा में FCRA संशोधन विधेयक को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव पेश किया गया। सरकार और विपक्ष के बीच लंबे समय से चल रहे गतिरोध के बीच इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। JPC में विभिन्न दलों के सांसद शामिल होते हैं और समिति विधेयक के प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट देती है।
विपक्ष इससे पहले लगातार मांग कर रहा था कि सरकार विधेयक को वापस ले या फिर इसे JPC के पास भेजे। अब JPC को भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में पारित होने से विधेयक की आगे की प्रक्रिया पर समिति की भूमिका अहम हो जाएगी।
हालांकि, प्रस्ताव पारित होने के दौरान सदन का माहौल शांत नहीं रहा। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने विधेयक को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और इसे वापस लेने की मांग की।
सरकार ने कांग्रेस पर साधा निशाना
FCRA बिल को लेकर सरकार और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी इस विधेयक के मुद्दे पर देश को गुमराह कर रही है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि विधेयक किसी खास धर्म को निशाना बनाने के लिए नहीं लाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ईसाई संगठनों के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया था कि FCRA विधेयक किसी धर्म के खिलाफ नहीं है और इसका स्वरूप पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष है।
ईसाई संगठनों ने जताई थी चिंता
विधेयक को लेकर ईसाई संगठनों की ओर से भी चिंता जताई गई है। द्रमुक सांसद पी. विल्सन के नेतृत्व में ईसाई नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने अमित शाह से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल की ओर से कहा गया था कि यदि सरकार विधेयक को वापस लेने के लिए तैयार नहीं है तो इसे JPC के पास भेजा जाना चाहिए।
संगठनों की मुख्य चिंता विधेयक के उन प्रावधानों को लेकर बताई गई है, जिनका असर विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संस्थानों पर पड़ सकता है।
25 मार्च को लोकसभा में पेश हुआ था बिल
FCRA Bill 2026 को इसी साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। हालांकि, विपक्षी दलों के हंगामे के कारण उस समय विधेयक को आगे बढ़ाने में सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रस्तावित बदलावों से NGOs और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े सामाजिक कल्याण तथा शैक्षणिक संस्थानों को मिलने वाली विदेशी सहायता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि विधेयक को लेकर विपक्ष गलत धारणा बना रहा है।
आइजोल में भी हुआ विरोध प्रदर्शन
FCRA विधेयक का विरोध संसद तक ही सीमित नहीं रहा। मिजोरम की राजधानी आइजोल में मंगलवार को हजारों लोगों ने रैली निकाली। यह प्रदर्शन ‘काउंसिल ऑफ चर्चेज इन मिजोरम’ (CCM) के आह्वान पर आयोजित किया गया था।
रैली में शामिल लोगों ने FCRA विधेयक को उसके मौजूदा स्वरूप में पारित किए जाने का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों की आपत्ति मुख्य रूप से विदेशी फंडिंग से जुड़े प्रस्तावित नियमों को लेकर है।
अब विधेयक को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव पारित होने के बाद समिति की जांच और उसके सुझाव आगे की संसदीय प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिलहाल FCRA बिल पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस जारी है और JPC की रिपोर्ट पर सभी की नजर रहेगी।