संसद के अंतिम हफ्ते में FCRA और परिसीमन बिल पर सियासी संग्राम, सरकार-विपक्ष ने तेज की रणनीति

मॉनसून सत्र के आखिरी सप्ताह में FCRA संशोधन और परिसीमन विधेयक पर टकराव बढ़ने के आसार, बीजेपी ने सांसदों को सदन में रहने के निर्देश दिए तो कांग्रेस ने जारी किया तीन दिन का व्हिप।

By  Laxman August 7th 2026 05:36 PM

नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र का अंतिम सप्ताह राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच कई दिनों से जारी गतिरोध के बीच अब दो महत्वपूर्ण विधेयकों—एफसीआरए (Foreign Contribution Regulation Act) संशोधन विधेयक और परिसीमन एवं महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक—को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है और संसद के भीतर संख्याबल तथा राजनीतिक सहमति जुटाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि सत्र समाप्त होने से पहले कम से कम एक बड़े विधेयक को पारित कराया जाए। वहीं विपक्ष इन विधेयकों पर विस्तृत चर्चा और अपनी आपत्तियों को दर्ज कराने की तैयारी में है। ऐसे में अगले सप्ताह संसद के दोनों सदनों में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।

सरकार ने बढ़ाई सक्रियता

संसदीय कार्य मंत्रालय लगातार विपक्षी दलों के नेताओं से संपर्क बनाए हुए है। सरकार चाहती है कि लंबे समय से जारी गतिरोध खत्म हो और महत्वपूर्ण विधायी कार्य समय पर पूरे हो सकें। इसी उद्देश्य से विभिन्न दलों के साथ बातचीत का सिलसिला जारी है।

सत्तारूढ़ पक्ष ने अपने सांसदों को पूरे सप्ताह संसद में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी महत्वपूर्ण मतदान के समय संख्या बल में कमी न रहे। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी अपने सांसदों के लिए तीन दिन का व्हिप जारी कर स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी इन विधेयकों को लेकर पूरी तैयारी के साथ सदन में उतरेगी।

FCRA संशोधन पर बढ़ा विवाद

एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक मतभेद सबसे अधिक दिखाई दे रहे हैं। विपक्ष का मानना है कि इस कानून में प्रस्तावित बदलावों का असर विभिन्न सामाजिक और गैर-सरकारी संगठनों पर पड़ सकता है। कांग्रेस इस विषय पर सरकार से विस्तृत चर्चा चाहती है और कुछ प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग कर रही है।

वहीं सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। सरकारी पक्ष इस विधेयक में बड़े बदलाव की संभावना से इनकार कर चुका है और इसे निर्धारित स्वरूप में ही आगे बढ़ाने के पक्ष में दिखाई दे रहा है।

परिसीमन विधेयक पर राजनीतिक समीकरण

परिसीमन विधेयक को लेकर भी सरकार सक्रिय है। यह विधेयक लोकसभा सीटों के पुनर्गठन और भविष्य की प्रतिनिधित्व व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रस्ताव माना जा रहा है। इसके साथ महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया भी जुड़ी हुई है।

सरकार विपक्षी दलों के साथ सहमति बनाने का प्रयास कर रही है क्योंकि संविधान संशोधन के लिए आवश्यक समर्थन जुटाना जरूरी होगा। सूत्रों के अनुसार कुछ क्षेत्रीय दलों ने अपने-अपने राज्यों के हितों को लेकर सरकार के सामने सुझाव और शर्तें रखी हैं, जिन पर विचार किया जा रहा है।

क्षेत्रीय दलों की भूमिका होगी अहम

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार क्षेत्रीय दलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। दक्षिण भारत के कई दल परिसीमन प्रक्रिया को लेकर पहले भी अपनी चिंताएं व्यक्त कर चुके हैं। हालांकि हाल के दिनों में सरकार और कुछ दलों के बीच बातचीत बढ़ने से नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना भी जताई जा रही है।

यदि कुछ प्रमुख क्षेत्रीय दल सरकार का समर्थन करते हैं तो विधेयक के पारित होने का रास्ता आसान हो सकता है। वहीं विपक्ष इन दलों को अपने पक्ष में बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

संसद का गतिरोध बना चुनौती

मॉनसून सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिला। विपक्ष गृह मंत्री के बयान सहित कई मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

दोनों पक्षों के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सहमति सामने नहीं आई है। ऐसे में अंतिम सप्ताह की कार्यवाही बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विशेष सत्र भी विकल्प

सूत्रों के अनुसार यदि सभी विधेयकों पर मौजूदा सत्र में सहमति नहीं बनती है, तो सरकार कुछ प्रस्तावों के लिए विशेष सत्र बुलाने के विकल्प पर भी विचार कर सकती है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय राजनीतिक परिस्थितियों और सदन में बनने वाले माहौल को देखकर लिया जाएगा।

फिलहाल सरकार की प्राथमिकता संसद के अंतिम सप्ताह का अधिकतम उपयोग करते हुए महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की है। वहीं विपक्ष इन प्रस्तावों पर विस्तृत बहस और अपने संशोधनों के साथ सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।

अब सभी की निगाहें अगले सप्ताह संसद की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि सहमति बनती है या फिर दोनों पक्षों के बीच टकराव और तेज होता है।

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