एआई के सबसे बड़े गठबंधन में भारत की एंट्री, चीन-पाकिस्तान बाहर
'पैक सिलिका' (Pax Silica) केवल एक तकनीकी समझौता नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक देशों का एक ऐसा शक्तिशाली समूह है जिसका उद्देश्य एआई और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। इस गठबंधन का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और एआई चिप्स की सप्लाई चेन पर किसी एक देश का एकाधिकार न रहे। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर पर कहा कि भारत का इस समूह में शामिल होना यह दर्शाता है कि दुनिया को भारत के टैलेंट और नीतियों पर अटूट भरोसा है। इस गठबंधन में ऑस्ट्रेलिया, जापान, यूएई, इजरायल और दक्षिण कोरिया जैसे देश पहले से ही शामिल हैं, और अब भारत के जुड़ने से इसकी ताकत कई गुना बढ़ गई है।
इस गठबंधन की सबसे चर्चा वाली बात चीन और पाकिस्तान की अनुपस्थिति है। जानकारों का मानना है कि 'पैक सिलिका' का गठन ही उन देशों पर निर्भरता कम करने के लिए किया गया है जो तकनीक का उपयोग 'सर्विलांस' या सैन्य दबाव बनाने के लिए करते हैं। अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन 'स्वतंत्र समाजों' (Free Societies) के लिए है, न कि उन देशों के लिए जो तकनीक का इस्तेमाल अपने नागरिकों को नियंत्रित करने के लिए करते हैं। पाकिस्तान को तो इस समिट के लिए निमंत्रण तक नहीं दिया गया, जो यह संकेत देता है कि वैश्विक एआई परिदृश्य में पाकिस्तान की स्थिति फिलहाल हाशिए पर है। वहीं चीन की अनुपस्थिति यह संदेश देती है कि भविष्य का टेक ईकोसिस्टम अब 'ट्रस्टेड पार्टनर्स' के बीच ही विकसित होगा।
भारत के लिए यह समझौता एक बड़ी जीत है। इसके तहत भारत को न केवल अत्याधुनिक एआई तकनीक और डेटा शेयरिंग का लाभ मिलेगा, बल्कि देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को भी भारी बढ़ावा मिलेगा। अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि भारत में पहले से ही 10 सेमीकंडक्टर प्लांट पर काम चल रहा है और इस समझौते के बाद भारत ग्लोबल सप्लाई चेन का केंद्र (Hub) बन जाएगा। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भी इस पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत-अमेरिका की यह पार्टनरशिप एआई के फायदे को हर व्यक्ति तक पहुँचाने का काम करेगी। भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था की दिशा और दशा तय करेंगे।