ISRO के भविष्य और कर्मचारियों की नौकरी पर उठे सवाल, 9 संगठनों ने चेयरमैन को लिखा पत्र

ISRO के नौ कर्मचारी संगठनों ने निजीकरण और प्रमुख अंतरिक्ष गतिविधियों के हस्तांतरण की खबरों पर चेयरमैन वी. नारायणन को पत्र लिखा। संगठनों ने PSLV, LVM3, SSLV, भर्ती, पदोन्नति, सेवा सुरक्षा और रणनीतिक क्षमताओं पर सरकार से स्पष्ट नीति मांगी है।

By  Preeti Kamal September 6th 2026 12:00 PM -- Updated: September 6th 2026 11:52 AM

बेंगलुरु, कर्नाटक: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के विभिन्न केंद्रों और इकाइयों में कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों ने संगठन के निर्माण और संचालन से जुड़ी गतिविधियों के निजीकरण या निजी कंपनियों तथा सार्वजनिक उपक्रमों को हस्तांतरण की खबरों पर चिंता जताई है।

4 सितंबर 2026 को नौ कर्मचारी संगठनों ने अंतरिक्ष विभाग के सचिव और ISRO के अध्यक्ष वी. नारायणन (V Narayanan) को संयुक्त पत्र भेजकर सरकार की नीति पर आधिकारिक और स्पष्ट जानकारी मांगी है।

निजीकरण को लेकर क्या है चिंता?

कर्मचारी संगठनों ने IN-SPACe के चेयरमैन पवन कुमार गोयनका के 21 अगस्त को एक सम्मेलन में दिए गए कथित बयान का हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा था कि भविष्य में ISRO लॉन्च व्हीकल का निर्माण नहीं करेगा और यह काम निजी क्षेत्र या सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा किया जाएगा।

संगठनों का कहना है कि इस बयान के बाद देशभर में निजीकरण को लेकर चर्चा तेज हुई, लेकिन अंतरिक्ष विभाग की ओर से कर्मचारियों को अब तक कोई आधिकारिक नीति दस्तावेज या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

SSLV से PSLV और LVM3 तक हस्तांतरण की आशंका

संयुक्त प्रतिनिधित्व में कर्मचारी संगठनों ने कुछ रिपोर्टों का भी उल्लेख किया है। इनमें कहा गया है कि SSLV की तकनीक और उत्पादन अधिकार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आगे इसे PSLV तथा LVM3 तक बढ़ाया जा सकता है।

संगठनों ने यह भी चिंता जताई है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को प्रस्तावित हस्तांतरण प्रक्रिया से बाहर रखा जा सकता है। इसके अलावा नियमित उपग्रह निर्माण को ISRO से बाहर ले जाने और कुलसेकरपट्टिनम में नए स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स जैसे बुनियादी ढांचे के संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की बात भी उठाई गई है। प्रतिनिधित्व में दावा किया गया है कि ISRO की करीब 120 तकनीकों को पहले ही निजी क्षेत्र में हस्तांतरित किया जा चुका है।

कर्मचारियों पर क्या पड़ेगा असर?

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ISRO की स्थापना एक राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्था के रूप में सार्वजनिक धन से हुई है। उनके अनुसार लॉन्च व्हीकल की डिजाइन, निर्माण, एकीकरण, परीक्षण और लॉन्च संचालन केवल सामान्य ‘मैन्युफैक्चरिंग कॉन्ट्रैक्ट’ नहीं, बल्कि संगठन की मुख्य वैज्ञानिक और रणनीतिक क्षमताएं हैं।

संगठनों ने आशंका जताई कि यदि इन गतिविधियों को धीरे-धीरे ISRO से बाहर किया गया तो:

  • संगठन में आंतरिक कार्यक्षेत्र कम हो सकता है।
  • स्वीकृत पदों पर भर्ती और पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
  • विकास केंद्रों में काम कर रहे कर्मचारियों के सामने काम की कमी या अतिरिक्त पदों का संकट पैदा हो सकता है।
  • ग्रुप A, B और C पदों पर नियमित भर्ती और घट सकती है।
  • कर्मचारियों के भविष्य और सेवा सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है।
  • रणनीतिक स्वायत्तता, गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा संस्कृति प्रभावित होने की आशंका है।
‘निजी उद्योग के विरोध में नहीं हैं कर्मचारी संगठन’

कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध भारतीय उद्योग या वैध व्यावसायीकरण से नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य चिंता यह है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और ISRO की अपनी क्षमताओं को खत्म करने के बीच स्पष्ट सीमा तय होनी चाहिए। संगठनों ने विशेष रूप से एक आधिकारिक नीति दस्तावेज की मांग की है, जिसमें यह स्पष्ट हो कि सरकार की वास्तविक नीति क्या है और उसका ISRO तथा उसके कर्मचारियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

5 से 10 साल की भर्ती नीति पर भी मांगा जवाब

कर्मचारी संगठनों ने वी. नारायणन से कई मुद्दों पर समयबद्ध लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें यह स्पष्ट करना शामिल है कि IN-SPACe चेयरमैन का बयान केंद्र सरकार का स्वीकृत निर्णय है या केवल IN-SPACe का व्यावसायिक दृष्टिकोण। उन्होंने यह भी पूछा है कि आने वाले समय में PSLV, LVM3, SSLV और उनके उत्तराधिकारी लॉन्च व्हीकल ISRO के दायरे में रहेंगे या नहीं।

इसके अलावा अगले 5 से 10 वर्षों में स्वीकृत पदों, रिक्तियों, भर्ती कैलेंडर और नई नियुक्तियों, मौजूदा कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा और पदोन्नति के अवसरों को लेकर भी स्पष्ट नीति की मांग की गई है।

कर्मचारी संगठनों से बातचीत की मांग

संगठनों ने ISRO चेयरमैन से आग्रह किया है कि किसी भी अपरिवर्तनीय फैसले से पहले मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के साथ औपचारिक बातचीत की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि ISRO द्वारा विकसित तकनीक, सुविधाओं और लॉन्च परिसरों को निजी संचालन में देने की स्थिति में संस्थागत व्यवस्था स्पष्ट की जाए और NSIL तथा IN-SPACe की अलग-अलग भूमिकाएं बताई जाएं।

नौ संगठनों के महासचिवों और अध्यक्षों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया कि उनका प्रतिनिधित्व रचनात्मक और लोकतांत्रिक भावना से किया गया है। संगठनों ने कहा कि ISRO और राष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रति उनकी निष्ठा पर कोई सवाल नहीं है और इसी निष्ठा के कारण वे किसी संभावित अपरिवर्तनीय नीति से पहले स्पष्टता चाहते हैं।

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