JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने पर बवाल, क्वालिफाइड अभ्यर्थियों ने दी कोर्ट जाने की चेतावनी

झारखंड में 44 भर्ती परीक्षाएं रद्द किए जाने के खिलाफ JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थियों ने रांची में प्रदर्शन किया। उम्मीदवारों ने फैसले को मनमाना बताते हुए कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। सरकार ने परीक्षा सुधार के लिए दो महीने में रिपोर्ट देने वाली समिति गठित करने की घोषणा की है।

By  Laxman August 19th 2026 11:34 AM

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने का मामला अब एक बार फिर सड़कों से अदालत तक पहुंचने की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। JSSC-CGL परीक्षा में सफल और नियुक्ति पा चुके अभ्यर्थियों ने बुधवार को रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के उस फैसले का विरोध किया, जिसके तहत अनियमितताओं की शिकायतों के बाद 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया गया है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर किसी परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन सभी सफल उम्मीदवारों को एक साथ दोषी मानकर नियुक्तियां रद्द करना उचित नहीं है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले को मनमाना बताते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों की लड़ाई अदालत में भी लड़ेंगे।

'जांच में दोषी साबित करें, ऐसे कैसे हटा सकते हैं'

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें बिना किसी व्यक्तिगत जांच के नौकरी से हटाना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। एक अभ्यर्थी ने कहा कि अगर किसी उम्मीदवार पर संदेह है तो उसे जांच के दायरे में लाया जाए और दोष साबित किया जाए। उनका तर्क था कि जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति अदालत के आदेश के बाद हुई, उन्हें केवल सामूहिक फैसले के आधार पर हटाया नहीं जा सकता।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि कुछ उम्मीदवारों ने नौकरी मिलने के भरोसे दूसरी नौकरियां छोड़ दी थीं, जबकि कई उम्मीदवारों ने दूसरी जगह दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। अब नियुक्तियां रद्द होने के बाद उनके सामने गंभीर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।

'कल तक ऑफिस में थे, अब प्रवेश पर रोक'

प्रदर्शन कर रहे एक अन्य अभ्यर्थी ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने हाल तक सरकारी कार्यालयों में काम किया, उन्हें अब उन्हीं कार्यालयों में प्रवेश करने से रोका जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने दबाव में आकर फैसला लिया है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए। सभी उम्मीदवारों को एक ही नजर से देखना उनके साथ अन्याय है।

BJP सांसद ने की CBI जांच की मांग

मामले पर बीजेपी सांसद दीपक प्रकाश ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि छात्र व्यापक स्तर पर जांच चाहते हैं ताकि कथित अनियमितताओं के पीछे जिम्मेदार लोगों तक पहुंचा जा सके। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए CBI जांच की मांग का समर्थन किया।

उनका आरोप है कि छात्र लगातार प्रदर्शन और भूख हड़ताल कर रहे हैं, लेकिन सरकार की मंशा को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि आखिरकार सरकार को छात्रों की मांगों पर जवाब देना होगा।

44 भर्ती परीक्षाओं को किया गया रद्द

झारखंड सरकार ने हाल ही में JPSC और JSSC से जुड़ी 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की अधिसूचना जारी की है। सरकार के मुताबिक, इन परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायतें मिली थीं और कुछ मामलों में CID तथा SIT स्तर पर जांच भी की गई।

रद्द की गई परीक्षाओं में ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल जज, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर समेत कई पदों की भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। सरकार के अनुसार, सूची में 2014 के बाद JPSC, JSSC और आउटसोर्स एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) से संबंधित परीक्षाएं भी शामिल हैं।

परीक्षा सुधार के लिए बनेगी समिति

सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की है। यह समिति IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में काम करेगी। समिति में अन्य अधिकारियों के अलावा एक प्रतिष्ठित संस्थान के निदेशक को भी शामिल किया जाएगा।

सरकार के मुताबिक समिति JPSC और JSSC की परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर व्यापक अध्ययन करेगी और दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

26वें दिन भी जारी रहा छात्रों का आंदोलन

सरकारी अधिसूचना आने के बावजूद छात्रों का आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि आंदोलन का यह 26वां दिन है और सरकार की ओर से जारी अधिसूचना का अध्ययन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि आंदोलन की आगे की रणनीति तय करने के लिए कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई है। छात्रों का कहना है कि अधिसूचना में न्यायिक जांच का उल्लेख तो किया गया है, लेकिन उसकी प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

अब कोर कमेटी की बैठक के बाद यह तय किया जाएगा कि आंदोलन जारी रहेगा या सरकार के फैसले के बाद आगे की रणनीति बदली जाएगी। फिलहाल JSSC-CGL से जुड़े सफल अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले कदम और संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।

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