‘मैं दिमागी नक्सल हूं’ कहने वाले नसीरुद्दीन शाह पर रिजिजू का हमला, बयान को बताया खतरनाक

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की कड़ी आलोचना की। शाह ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र संघ बहाली आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार पर शैक्षणिक संस्थानों और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया है।

By  Preeti Kamal October 29th 2026 11:30 AM -- Updated: October 29th 2026 11:17 AM

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन पर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के बयान की आलोचना की है। शाह ने एक वीडियो में खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताते हुए छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया था। इसके जवाब में रिजिजू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अभिनेता के विचारों पर निराशा जताई और उन्हें भारतीय लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक बताया।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि वह पहले नसीरुद्दीन शाह का सम्मान करते थे और उन्हें पसंद करते थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि अभिनेता के विचार इतने खतरनाक हो सकते हैं। रिजिजू ने शाह को ‘खतरनाक अर्बन दिमागी नक्सल’ बताते हुए आरोप लगाया कि उनके विचार भारत के लोकतंत्र के लिए बेहद नुकसानदायक हैं। यह टिप्पणी शाह के उस वीडियो के जवाब में आई, जिसमें अभिनेता ने सरकार की नीतियों और शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति पर सवाल उठाए थे।

नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों के समर्थन में जारी किया वीडियो

नसीरुद्दीन शाह ने मंगलवार को फेसबुक पर वीडियो साझा कर दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। विश्वविद्यालय में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर कई सप्ताह से विरोध-प्रदर्शन जारी है।

वीडियो में शाह ने केंद्र सरकार पर शैक्षणिक संस्थानों को कमजोर करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार युवाओं की आवाज और उनके उत्साह को दबाने की कोशिश कर रही है।

शाह ने खुद को गर्व से ‘दिमागी नक्सल’ बताया

शाह ने वीडियो में खुद को गर्व से ‘दिमागी नक्सल’ बताया और कहा कि उनके जैसे लोगों के लिए सरकार के आलोचक कई तरह के दूसरे नाम भी इस्तेमाल करती है। ये आरोप अभिनेता के विचार हैं; सरकार की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया का विवरण उपलब्ध कराए गए समाचार में नहीं दिया गया है।

जामिया में छात्र संघ की बहाली को लेकर आंदोलन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। जानकारी के अनुसार, छात्र संघ के चुनाव वर्ष 2006 के बाद से नहीं हुए हैं। विश्वविद्यालय ने पहले कहा था कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। हालांकि, प्रदर्शनकारी चुनाव की निश्चित तारीख घोषित करने की मांग पर अड़े हैं।

आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ऑनलाइन कक्षाएं जारी रखने का फैसला किया है। उपलब्ध समाचार के मुताबिक, ऑनलाइन कक्षाएं 24 नवंबर तक जारी रहेंगी और परिसर में नियमित कक्षाएं 13 जनवरी से पहले शुरू नहीं होंगी। विश्वविद्यालय ने परीक्षाओं के तरीके और शीतकालीन अवकाश के कार्यक्रम में भी बदलाव किए हैं।

© Copyright Galactic Television & Communications Pvt. Ltd. 2026. All rights reserved.