L Murugan Resignation: केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने छोड़ा पद, राज्यसभा से भी इस्तीफा; तमिलनाडु BJP को मजबूत करने का लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने अपने पद और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ काम करने की इच्छा जताई।

By  Laxman October 13th 2026 07:12 PM

नई दिल्ली:  केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र और सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में अपने फैसले की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि अब वह जमीनी स्तर पर लौटकर तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मजबूत करने के लिए काम करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में पार्टी के संगठन और जनाधार का विस्तार करना है।

मुरुगन का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब भाजपा दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। उनके इस्तीफे के बाद तमिलनाडु में पार्टी की आगामी संगठनात्मक योजनाओं और उनकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, राज्य में उन्हें कौन-सी नई जिम्मेदारी दी जाएगी, इसे लेकर अभी किसी औपचारिक घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है।


पीएम मोदी के नेतृत्व में काम करना बताया बड़ा सम्मान

एल. मुरुगन ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार में काम करने के अवसर को अपने जीवन का बड़ा सम्मान बताया। उन्होंने अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि दिहाड़ी मजदूर के बेटे के रूप में शुरुआत करने के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात रही।

मुरुगन ने कहा कि अब वह जमीन पर लौटकर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ काम करना चाहते हैं। उनका जोर तमिलनाडु में भाजपा की राजनीतिक स्थिति मजबूत करने और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर रहेगा।

उन्होंने अपने संदेश में राष्ट्र को प्राथमिकता देने, उसके बाद पार्टी और अंत में स्वयं को रखने की बात भी कही। उनके बयान से स्पष्ट है कि वह फिलहाल केंद्रीय पद की तुलना में संगठनात्मक काम और राज्य की राजनीति में सक्रिय भागीदारी को प्राथमिकता देना चाहते हैं।

2029 के लोकसभा चुनाव पर भाजपा की नजर

तमिलनाडु में भाजपा के सामने लंबे समय से अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की चुनौती रही है। ऐसे में मुरुगन का जमीनी राजनीति में लौटने का फैसला पार्टी के संगठनात्मक काम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुरुगन राज्य में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उन्हें पार्टी के प्रमुख दलित नेताओं में गिना जाता है। इसलिए राज्य में उनकी सक्रियता से भाजपा को विभिन्न सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने और कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

राजनीतिक स्तर पर उनके फैसले को 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इसे भाजपा की किसी घोषित नई रणनीति या मुरुगन को मिलने वाली संभावित जिम्मेदारी की अंतिम पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए। फिलहाल उनकी ओर से सार्वजनिक रूप से बताई गई प्राथमिकता तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करना है।

कौन हैं एल. मुरुगन?

एल. मुरुगन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पेशे से वकील हैं। उनका जन्म 29 मई 1977 को तमिलनाडु के नामक्कल जिले के कोनूर में हुआ था। उन्होंने चेन्नई में तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा और डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की।

राजनीति में आने से पहले मुरुगन ने वकालत के क्षेत्र में काम किया। वह मद्रास हाईकोर्ट में भारत सरकार के स्थायी अधिवक्ता के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। उनके कानूनी अनुभव ने उन्हें पार्टी के विभिन्न मामलों में भूमिका निभाने का अवसर दिया।

मुरुगन ने 2017 से 2020 तक राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वह तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने और राज्य में पार्टी संगठन को मजबूत करने के प्रयासों से जुड़े रहे।

जुलाई 2021 में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया। उन्होंने मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में भी काम किया। बाद में वह सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

इस्तीफे के बाद आगे क्या?

मुरुगन के फैसले से यह संकेत मिलता है कि वह आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति और भाजपा के संगठनात्मक विस्तार पर अधिक ध्यान देना चाहते हैं। उनके अनुभव को देखते हुए पार्टी उन्हें राज्य में जनसंपर्क, कार्यकर्ता समन्वय और चुनावी तैयारियों से जुड़ी भूमिका दे सकती है, लेकिन इस संबंध में अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

राज्यसभा की सदस्यता और केंद्रीय मंत्री पद छोड़ने का उनका ऐलान भाजपा की तमिलनाडु रणनीति को लेकर नई चर्चा जरूर शुरू करता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी उनके अनुभव का इस्तेमाल किस तरह करती है और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में अपने संगठन को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाती है।

फिलहाल मुरुगन ने अपने फैसले का मुख्य कारण स्पष्ट कर दिया है—केंद्र में पद संभालने के बजाय तमिलनाडु में पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम करना। उनके इस कदम का राज्य में भाजपा के संगठन और चुनावी तैयारियों पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में सामने आएगा।

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