लोकसभा अध्यक्ष ने जस्टिस वर्मा को हटाने के आधारों की जांच के लिए गठित पैनल का पुनर्गठन किया

By  Preeti Kamal February 26th 2026 11:10 AM -- Updated: February 26th 2026 11:15 AM

नई दिल्ली, भारत: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने के आधारों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय जांच समिति का पुनर्गठन किया है। लोकसभा की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, पुनर्गठित पैनल 6 मार्च, 2026 से प्रभावी होगा।

यह समिति मूल रूप से पिछले वर्ष मार्च में गठित की गई थी, जब जस्टिस वर्मा के आवास से कथित रूप से जली हुई नकदी के बंडल मिलने के बाद उनके हटाने की मांग उठी थी। इस घटना ने व्यापक चिंता पैदा की और जांच की मांग तेज हो गई।

पैनल में जस्टिस चंद्रशेखर नए सदस्य के रूप में शामिल

अधिसूचना के अनुसार, पुनर्गठित समिति मेंजस्टिस अरविंद कुमार (जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट), जस्टिस चंद्रशेखर (मुख्य जस्टिस, बॉम्बे हाईकोर्ट) और बी.वी. आचार्य (वरिष्ठ अधिवक्ता, कर्नाटक हाईकोर्ट) शामिल हैं। जस्टिस अरविंद कुमार और बी. वी. आचार्य पहले पैनल के भी सदस्य थे, जबकि जस्टिस चंद्रशेखर को नए सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। उन्होंने मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव (Manindra Mohan Shrivastava) का स्थान लिया है, जो मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे।

आखिर क्या है पूरा मामला ?

पुनर्गठित समिति जस्टिस वर्मा को हटाने की मांग से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों की जांच जारी रखेगी। पैनल साक्ष्यों की समीक्षा कर निर्धारित संसदीय प्रक्रिया के तहत अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। यह मामला जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास से कथित रूप से बरामद बेहिसाब और आंशिक रूप से जली नकदी से जुड़ा है। आंतरिक जांच के बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को उनके खिलाफ हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की सिफारिश भेजी थी।

इसके बाद 21 जुलाई, 2025 को संसद के दोनों सदनों में जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया गया। 12 अगस्त, 2025 को लोकसभा अध्यक्ष ने आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। यह निर्णय उन्हें 146 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित नोटिस मिलने के बाद लिया गया, जिसमें जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने की मांग की गई थी।

© Copyright Galactic Television & Communications Pvt. Ltd. 2026. All rights reserved.