Maharashtra MLC Election: 3 सीटों पर हार के बाद Mahayuti में घमासान, BJP ने Shinde Sena पर उठाए सवाल

महाराष्ट्र MLC चुनाव में पांच में से तीन सीटें गंवाने के बाद महायुति में मतभेद सामने आए हैं। भाजपा ने सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना पर चुनावी तालमेल में कमी का आरोप लगाया।

By  Laxman October 29th 2026 12:02 PM

महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव परिणामों ने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर राजनीतिक मतभेदों को उजागर कर दिया है। पांच में से तीन सीटों पर हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सहयोगी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के रवैये पर सवाल उठाए हैं। भाजपा का आरोप है कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में सहयोगियों के बीच अपेक्षित तालमेल नहीं होने से गठबंधन को नुकसान पहुंचा।

इन चुनावों में महायुति को दो सीटों पर जीत मिली, जबकि महाविकास आघाड़ी के घटक दलों ने तीन सीटें अपने नाम कीं। नतीजों के बाद गठबंधन के भीतर चुनावी रणनीति और सहयोग को लेकर बहस तेज हो गई है।

BJP प्रवक्ता ने शिवसेना पर लगाए सहयोग नहीं करने के आरोप

भाजपा महाराष्ट्र के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ कमल उत्तमराव बन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए शिवसेना की भूमिका पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, पुणे और नागपुर में शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव के दौरान सहयोगी दलों के बीच अपेक्षित समन्वय नहीं रहा।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पुणे में अंतिम समय पर सचिन सानप को समर्थन देने के फैसले से महायुति की एकजुटता प्रभावित हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना को मिले वोट भाजपा के उम्मीदवारों के पक्ष में स्थानांतरित नहीं हुए।

इसके अलावा, उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के खिलाफ प्रचार करने का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता के मुताबिक, इस तरह के घटनाक्रमों ने गठबंधन की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित किया।

हालांकि, ये आरोप भाजपा प्रवक्ता की ओर से लगाए गए हैं। चुनाव परिणामों में हार के कारणों का आकलन करने के लिए प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवारों के प्रदर्शन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को भी देखना जरूरी होगा।

‘गठबंधन धर्म निभाया होता तो सभी सीटें जीत सकते थे’

नवनाथ कमल ने अपनी पोस्ट में कहा कि यदि शिवसेना ने महायुति के सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखा होता, तो गठबंधन सभी पांच सीटों पर जीत हासिल कर सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुणे में एक सीट हासिल करने की राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण दूसरे सहयोगियों को नुकसान पहुंचा।

भाजपा की इस प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि चुनावी हार के बाद गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे, उम्मीदवारों के समर्थन और प्रचार अभियान में समन्वय जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ सकते हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में महायुति के लिए सहयोगी दलों के बीच तालमेल महत्वपूर्ण है, क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय नेतृत्व और पार्टी कार्यकर्ताओं का प्रभाव चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में इन नतीजों के बाद गठबंधन के घटक दलों के बीच बातचीत और रणनीति की समीक्षा पर नजर रहेगी।

नागपुर में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी की जीत

नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने जीत दर्ज की। उपलब्ध परिणामों के अनुसार, वंजारी को 67,231 वोट मिले, जबकि भाजपा के कोहले को 63,960 मत प्राप्त हुए। इस सीट पर कांग्रेस की जीत महायुति के लिए महत्वपूर्ण झटका मानी जा रही है।

पांच सीटों पर किसने दर्ज की जीत?

उपलब्ध परिणामों के अनुसार, पांच सीटों में से तीन पर महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि दो सीटें महायुति के खाते में गईं।

  • पुणे स्नातक सीट: हर्षदा जाधव-देशमुख (NCP-SP)
  • पुणे शिक्षक सीट:  कौस्तुभ गावड़े (BJP)
  • अमरावती शिक्षक सीट:  किरण सरनाईक (शिवसेना-शिंदे गुट)
  • मराठवाड़ा स्नातक सीट:  डॉ. प्रताप पाटिल (NCP-SP)
  • नागपुर स्नातक सीट: अभिजीत वंजारी (कांग्रेस)

इन नतीजों ने महाराष्ट्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ महायुति के अंदरूनी समीकरणों को भी चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि भाजपा और शिवसेना नेतृत्व इन मतभेदों को किस तरह सुलझाते हैं और आगामी चुनावों के लिए गठबंधन में समन्वय कैसे मजबूत किया जाता है।

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