महाराष्ट्र में वित्त मंत्रालय पर सियासी खींचतान, सुनेत्रा पवार ने CM फड़नवीस से मांगा विभाग वापस
महाराष्ट्र में वित्त मंत्रालय को लेकर NCP ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के सामने अपनी मांग रखी है। सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में हुई मुलाकात के बाद छगन भुजबल ने शीतकालीन सत्र से पहले विभाग वापस मिलने की उम्मीद जताई।
महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति सरकार में वित्त मंत्रालय को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से मुलाकात कर वित्त मंत्रालय वापस सौंपने की मांग उठाई। यह विभाग पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद मुख्यमंत्री ने अपने पास रख लिया था। अब NCP चाहती है कि उसे उसका यह विभाग जल्द वापस मिले, ताकि पार्टी की सरकार में भूमिका और जिम्मेदारियां पहले की तरह स्पष्ट हो सकें।
रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ में हुई इस मुलाकात के दौरान NCP नेताओं ने वित्त मंत्रालय लौटाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री फड़नवीस ने इस मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि, विभाग कब और किस औपचारिक प्रक्रिया के तहत सौंपा जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
अजित पवार के निधन के बाद मुख्यमंत्री के पास आया था विभाग
अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र में बजट तैयार करने और उसे पेश करने की जिम्मेदारी को देखते हुए वित्त मंत्रालय मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने अपने पास रख लिया था। उस समय बजट सत्र नजदीक होने के कारण सरकार के सामने वित्तीय फैसलों और बजट प्रक्रिया को समय पर पूरा करने की चुनौती थी।
NCP का कहना है कि वित्त मंत्रालय को अस्थायी तौर पर मुख्यमंत्री के पास रखने पर सहमति बनी थी और बाद में इसे पार्टी को वापस सौंपने का भरोसा दिया गया था। लेकिन लंबे समय तक विभाग वापस नहीं मिलने के कारण पार्टी के भीतर इस विषय पर चर्चा बढ़ गई है।
रविवार की बैठक में सुनेत्रा पवार के साथ वरिष्ठ नेता और मंत्री छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ, अजित पवार के बेटे जय पवार, विधायक धनंजय मुंडे और अन्य नेता शामिल हुए। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने पार्टी की मांग रखी और जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया।
छगन भुजबल बोले- वित्त मंत्रालय हमारे हिस्से का विभाग
बैठक के बाद NCP के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने स्पष्ट किया कि वित्त मंत्रालय पार्टी के हिस्से में आने वाला विभाग है और उसे वापस मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के विधायकों और नेताओं के बीच लगातार चर्चा हो रही है, जो संगठन के लिहाज से उचित स्थिति नहीं है।
भुजबल ने मुख्यमंत्री के रुख को लेकर भरोसा जताया। उनके मुताबिक, विभाग लौटाने को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन राज्य की मौजूदा वित्तीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति से निपटने, किसानों से जुड़ी योजनाओं और आर्थिक सहायता के लिए धन का प्रबंध किया जा रहा है। किसानों की कर्जमाफी योजना और अग्रिम वित्तीय सहायता जैसे मामलों में राशि उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
भुजबल के अनुसार, इन वित्तीय व्यवस्थाओं को संभालने के बाद विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले वित्त मंत्रालय NCP को वापस दिए जाने की उम्मीद है। हालांकि, यह समयसीमा उनका बयान है; विभाग के हस्तांतरण की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
NCP के भीतर बढ़ रही थी चर्चा
वित्त मंत्रालय को लेकर NCP की मांग ऐसे समय सामने आई है, जब पार्टी अजित पवार के निधन के बाद अपने राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरणों को व्यवस्थित करने में जुटी है। मंत्रालयों का बंटवारा किसी भी गठबंधन सरकार में सत्ता-संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में विभाग की वापसी का मुद्दा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर NCP की भूमिका से भी जुड़ा माना जा रहा है।
भुजबल ने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर इस विषय पर बार-बार चर्चा होना ठीक नहीं है। NCP चाहती है कि मुख्यमंत्री जल्द फैसला लें, ताकि इस मुद्दे पर बनी अनिश्चितता खत्म हो सके।
पार्टी विलय की अटकलों को भुजबल ने किया खारिज
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में छगन भुजबल ने NCP के विलय को लेकर चल रही अटकलों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में चर्चा मुख्य रूप से मीडिया में हो रही है और पार्टी के स्तर पर ऐसा कोई निर्णय सामने नहीं आया है।
उन्होंने उन खबरों को भी गलत बताया, जिनमें NCP (SP) के पांच मंत्रियों को बदले जाने या महाराष्ट्र मंत्रिमंडल के जल्द विस्तार की बात कही जा रही थी।
भुजबल ने बताया कि NCP के हिस्से का एक मंत्री पद खाली है। हालांकि, उनके अनुसार, केवल NCP का खाली पद भरने के बजाय भाजपा भी अपने रिक्त पदों को भरना चाहती है। इसलिए आगे चलकर खाली मंत्री पदों को एक साथ भरे जाने की संभावना है।
अब मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी निगाहें
वित्त मंत्रालय की वापसी को लेकर हुई यह मुलाकात महाराष्ट्र की राजनीति में अहम मानी जा रही है। NCP ने अपनी मांग स्पष्ट कर दी है और मुख्यमंत्री की ओर से सकारात्मक रुख अपनाए जाने का दावा भी किया गया है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि विभाग की जिम्मेदारी कब वापस सौंपी जाएगी।
यदि शीतकालीन सत्र से पहले वित्त मंत्रालय NCP को मिलता है, तो इससे पार्टी को राज्य की वित्तीय नीतियों और बजट से जुड़े फैसलों में फिर प्रमुख भूमिका मिल सकती है। फिलहाल, औपचारिक घोषणा होने तक विभाग की वापसी को संभावित घटनाक्रम के रूप में ही देखा जाना चाहिए।