पीएम मोदी का जालंधर दौरा: दोआबा में दलित वोटों पर बीजेपी की नजर, 2027 चुनाव की रणनीति तेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को जालंधर पहुंचेंगे। रेलवे परियोजनाओं के उद्घाटन के साथ यह दौरा राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि दोआबा क्षेत्र की बड़ी दलित आबादी पंजाब की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाती है।

By  Laxman July 15th 2026 02:59 PM

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियां धीरे-धीरे तेज होती जा रही हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 17 जुलाई को प्रस्तावित जालंधर दौरा राजनीतिक और विकास दोनों ही दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। ऐसे में दोआबा क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और नई सौगातों की घोषणा होने की संभावना है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे का मुख्य फोकस दोआबा क्षेत्र के प्रभावशाली दलित और रविदासिया समुदाय के बीच भाजपा की पहुंच को और मजबूत करना भी है।

दोआबा क्यों है चुनावी राजनीति का केंद्र?

दोआबा क्षेत्र में जालंधर, कपूरथला, होशियारपुर और शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) जिले शामिल हैं। यह इलाका पंजाब की राजनीति में हमेशा से निर्णायक माना जाता रहा है। यहां अनुसूचित जाति (SC) की आबादी राज्य के अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, दोआबा की कुल आबादी का लगभग 37 प्रतिशत हिस्सा दलित समुदाय से आता है, जिसमें रविदासिया समाज की बड़ी हिस्सेदारी है।

पंजाब विधानसभा की कुल 117 सीटों में से 23 सीटें इसी क्षेत्र में आती हैं। इनमें आठ सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। यही वजह है कि चुनाव के समय लगभग सभी राजनीतिक दल इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान देते हैं।

डेरा सचखंड बल्लान का भी रहेगा फोकस

जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लान रविदासिया समुदाय का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है। सामाजिक और धार्मिक प्रभाव के साथ-साथ इसका राजनीतिक महत्व भी काफी अधिक है। वर्षों से विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता यहां पहुंचकर समुदाय के लोगों से संवाद करते रहे हैं।

इस वर्ष गुरु रविदास जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी डेरा सचखंड बल्लान का दौरा किया था। इसके अलावा आदमपुर एयरपोर्ट का नाम गुरु रविदास के नाम पर रखा गया और डेरा प्रमुख संत निरंजन दास को पद्मश्री सम्मान दिए जाने जैसे फैसलों को भी समुदाय के प्रति सम्मान के रूप में देखा गया।

रेलवे परियोजनाओं के जरिए विकास का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का उद्घाटन प्रमुख आकर्षण रहेगा। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से लैस इस स्टेशन का नवीनीकरण किया गया है। इसके साथ ही देशभर के कई अन्य रेलवे स्टेशनों का भी वर्चुअल उद्घाटन किए जाने की संभावना है।

इसके अलावा जालंधर और वाराणसी के बीच 'श्री गुरु रविदास जी महाराज एक्सप्रेस' ट्रेन सेवा शुरू किए जाने की भी चर्चा है। यह सेवा पंजाब और वाराणसी के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक संपर्क को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरु रविदास जयंती के अवसर पर वाराणसी जाते हैं और नई ट्रेन उनके लिए सुविधाजनक विकल्प बन सकती है।

राजनीतिक संदेश भी रहेगा अहम

हालांकि प्रधानमंत्री का दौरा आधिकारिक रूप से विकास परियोजनाओं और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित है, लेकिन इसकी राजनीतिक अहमियत भी कम नहीं है। भाजपा पंजाब में अपने संगठन का विस्तार करने और शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ दलित समुदाय के बीच समर्थन बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

जालंधर में आयोजित होने वाली जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री विभिन्न विकास योजनाओं और केंद्र सरकार की उपलब्धियों को भी जनता के सामने रख सकते हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि यह दौरा आगामी चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने का काम करेगा।

2027 चुनाव पर रहेगी नजर

पंजाब में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच मुकाबला लगातार रोचक होता जा रहा है। ऐसे में दोआबा क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि पार्टी इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करती है तो इसका असर पूरे पंजाब की चुनावी तस्वीर पर पड़ सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी का जालंधर दौरा विकास, धार्मिक जुड़ाव और राजनीतिक संदेश—तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि यह दौरा पंजाब की राजनीति में कितना प्रभाव छोड़ता है।

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