‘जल्द ही पूर्व प्रधानमंत्री होंगे मोदी’, सचिन पायलट का तंज; बोले- उपराष्ट्रपति इस्तीफा दे सकते हैं तो CEC क्यों नहीं?

कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्ष की मांग दोहराते हुए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की आवाज पुलिस कार्रवाई से नहीं दबाई जा सकती। हालांकि, पायलट ने चुनावों के बहिष्कार की संभावना को फिलहाल जल्दबाजी बताया और सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा जताया।

By  Laxman October 14th 2026 06:43 PM

कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश में उपराष्ट्रपति अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं, तो मुख्य चुनाव आयुक्त ऐसा क्यों नहीं कर सकते। पायलट ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर भी राजनीतिक तंज कसते हुए कहा कि वह जल्द ही पूर्व प्रधानमंत्री हो जाएंगे।

समाचार एजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में पायलट ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस बल या लाठीचार्ज के जरिए युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश सफल नहीं होगी। उनके बयान ऐसे समय आए हैं, जब विपक्षी दल चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं।

CEC के इस्तीफे की मांग पर क्या बोले सचिन पायलट?

सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक, यदि चुनाव आयुक्त इस भरोसे को कायम रखने में सफल नहीं होते, तो उन्हें पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए।

पायलट ने अपनी बात समझाने के लिए क्रिकेट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यदि खिलाड़ियों और दर्शकों को लगे कि मैच और अंपायर पहले से तय हैं, तो मुकाबले की निष्पक्षता पर भरोसा कमजोर पड़ जाता है। उनके अनुसार, विपक्ष केवल निष्पक्ष मुकाबला चाहता है, जिसमें जीत और हार का फैसला स्वतंत्र तथा पारदर्शी प्रक्रिया से हो।

उन्होंने उपराष्ट्रपति के इस्तीफे का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि जब किसी संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति इस्तीफा दे सकता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए ऐसा विकल्प क्यों नहीं होना चाहिए। यह पायलट का राजनीतिक तर्क था; CEC के इस्तीफे और जवाबदेही की प्रक्रिया अपने संवैधानिक तथा कानूनी प्रावधानों के तहत तय होती है।

चुनाव बहिष्कार पर फिलहाल जल्दबाजी नहीं

चुनावों का बहिष्कार करने की संभावना पर पायलट ने कहा कि अभी इस बारे में फैसला लेना जल्दबाजी होगी। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को पहले कानूनी और लोकतांत्रिक माध्यमों से उठाना चाहता है।

पायलट ने कहा कि कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के सहयोगियों को न्यायपालिका पर भरोसा है। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची और कथित वोट चोरी से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनके मुताबिक, अदालत इस मामले में अंतिम प्राधिकरण है और कानूनी प्रक्रिया के परिणाम का इंतजार किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन, धरना और पदयात्रा लोकतंत्र का हिस्सा हैं। उनके अनुसार, सरकार या प्रशासन को लोगों को शांतिपूर्ण विरोध करने से रोकने के बजाय उनकी शिकायतें सुननी चाहिए।

पुलिस कार्रवाई और छात्रों के प्रदर्शन पर सवाल

पायलट ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि युवाओं पर बल प्रयोग करके उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज या अन्य कठोर कार्रवाई से लोगों की असहमति समाप्त नहीं होगी।

कांग्रेस नेता ने पेपर लीक और NEET परीक्षा से जुड़े विवादों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने दावा किया कि छात्रों और जनता के दबाव ने पहले भी सरकार को जवाबदेही के लिए मजबूर किया है। उनके अनुसार, युवाओं के सवालों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

हालांकि, पुलिस कार्रवाई से संबंधित प्रत्येक घटना में क्या हुआ, इसकी पुष्टि के लिए संबंधित अधिकारियों का पक्ष, वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को देखना आवश्यक है। पायलट के आरोपों पर पुलिस या सरकार की प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर खबर में उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।

राहुल गांधी की भूमिका पर पायलट का बयान

राहुल गांधी के कथित ‘वोट चोरी’ अभियान और 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए विपक्ष के संभावित प्रधानमंत्री चेहरे को लेकर पूछे गए सवाल पर पायलट ने कहा कि राहुल गांधी ने स्वयं प्रधानमंत्री पद की दावेदारी की घोषणा नहीं की है।

पायलट के अनुसार, राहुल गांधी विपक्ष के नेता के रूप में मतदाता सूची, चुनावी प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में इन सवालों का मजाक उड़ाया गया, लेकिन अब विपक्ष इन मुद्दों पर व्यापक चर्चा की मांग कर रहा है।

उन्होंने राहुल गांधी की भूमिका को विपक्षी दलों के बीच समन्वय और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को सामने लाने के संदर्भ में देखा। हालांकि, 2029 के लिए विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के चेहरे पर कोई अंतिम निर्णय इस बयान से स्थापित नहीं होता।

चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल

सचिन पायलट ने कहा कि स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव भारत के लोकतंत्र की बुनियादी ताकत हैं। उनके मुताबिक, स्वतंत्रता के बाद अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और स्वायत्तता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में कई संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है और चुनाव आयोग को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पायलट ने कहा कि विपक्षी दलों, नागरिक संगठनों और अन्य समूहों को निष्पक्ष चुनाव की मांग पर साथ आना चाहिए।

उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और अन्य संगठनों की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों का भी उल्लेख किया। पायलट के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया में भरोसा बनाए रखना किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र का विषय है।

प्रधानमंत्री मोदी पर राजनीतिक तंज

इंटरव्यू के रैपिड-फायर हिस्से में सचिन पायलट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही पूर्व प्रधानमंत्री हो जाएंगे। यह टिप्पणी उनके राजनीतिक आकलन और विपक्ष की ओर से सरकार को चुनौती देने की रणनीति के संदर्भ में आई।

कुल मिलाकर, पायलट के बयान में तीन प्रमुख बातें उभरकर सामने आईं—मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग, चुनाव बहिष्कार पर फिलहाल कोई जल्दबाजी न करने का रुख और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर विपक्ष की चिंता। अब इस विवाद में न्यायिक प्रक्रिया, चुनाव आयोग का पक्ष और संबंधित आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।

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