1984 सिख विरोधी दंगा केस: पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का निधन, तिहाड़ जेल में काट रहे थे उम्रकैद

1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व कांग्रेस नेता और सांसद सज्जन कुमार का निधन हो गया। वह पिछले करीब सात वर्षों से तिहाड़ जेल में बंद थे। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया, जहां उन्हें मृत अवस्था में पाया गया।

By  Laxman August 20th 2026 01:54 PM

दिल्ली: पूर्व कांग्रेस नेता और तीन बार सांसद रह चुके सज्जन कुमार का निधन हो गया है। वह 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। उनकी उम्र 84 वर्ष थी। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, सज्जन कुमार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया, जहां उन्हें मृत अवस्था में लाया गया था। वह पिछले करीब सात वर्षों से जेल में बंद थे।

सज्जन कुमार का नाम 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में प्रमुख आरोपियों में रहा। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिसंबर 2018 में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन शीर्ष अदालत से भी उन्हें राहत नहीं मिली।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में सज्जन कुमार को जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुंदीप सिंह की हत्या में भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था। अदालत के अनुसार, दंगों के दौरान भीड़ ने जसवंत सिंह और उनके परिवार को निशाना बनाया था। सज्जन कुमार पर भीड़ को उकसाने का आरोप था। इसी मामले में उन्हें हत्या और अन्य गंभीर आरोपों में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा दी गई।

दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला 17 दिसंबर 2018 को आया था। इसके बाद सज्जन कुमार ने अपनी सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने उनकी अपील खारिज कर दी और उम्रकैद की सजा बरकरार रही।

एक मामले में मिली थी जमानत, लेकिन जेल से नहीं आए बाहर

सज्जन कुमार को अप्रैल 2022 में 1984 दंगा मामले से जुड़े एक अन्य केस में जमानत मिली थी। हालांकि, दूसरे मामले में दोषी ठहराए जाने के कारण उन्हें जेल में ही रहना पड़ा। इस तरह एक मामले में राहत मिलने के बावजूद वह तिहाड़ जेल से बाहर नहीं आ सके और अपनी उम्रकैद की सजा काटते रहे।

पत्नी से मिलने के लिए भी मांगी थी जमानत

सज्जन कुमार ने अप्रैल 2026 में अपनी बीमार पत्नी से मुलाकात करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से जमानत की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद भी वह जेल में ही रहे। अब उनके निधन के बाद 1984 के दंगा मामलों में दोषी ठहराए गए प्रमुख राजनीतिक नेताओं में से एक सज्जन कुमार का अध्याय समाप्त हो गया है।

कांग्रेस से देना पड़ा था इस्तीफा

सज्जन कुमार लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे और दिल्ली से सांसद भी चुने गए। वह तीन बार सांसद रह चुके थे। लेकिन 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनका राजनीतिक जीवन दिल्ली की राजनीति में काफी प्रभावशाली रहा। हालांकि, 1984 के दंगों से जुड़े आरोप और बाद में अदालतों में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया ने उनके राजनीतिक जीवन पर गहरा असर डाला।

1984 के दंगों से जुड़ा लंबा कानूनी सफर

1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा हुई थी। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे और कई परिवारों ने अपने परिजनों को खोया। दंगों से जुड़े मामलों में वर्षों तक जांच और कानूनी प्रक्रिया चलती रही। कई मामलों में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पीड़ित परिवारों और संगठनों की ओर से लगातार न्याय की मांग की जाती रही।

सज्जन कुमार के मामले में भी कानूनी प्रक्रिया कई वर्षों तक चली। निचली अदालत के फैसले के बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जहां 2018 में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। अब उनके निधन के साथ 1984 दंगा मामले से जुड़ा उनका कानूनी और राजनीतिक सफर खत्म हो गया है। उनका निधन ऐसे समय हुआ है जब 1984 की हिंसा से जुड़े मामलों को लेकर न्याय और जवाबदेही की बहस लंबे समय से सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रही है।

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