संजय कपूर संपत्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने समझौते पर दिया जोर, कानून अपना रास्ता लेगा

सुप्रीम कोर्ट ने परिवार के बीच चल रहे संपत्ति विवाद को बातचीत और मध्यस्थता से सुलझाने पर जोर दिया। अदालत ने 2 नवंबर तक मध्यस्थता जारी रखने की अनुमति देते हुए सभी पक्षों से खुले मन से समाधान तलाशने की अपील की।

By  Laxman August 6th 2026 02:35 PM

नई दिल्ली: उद्योगपति संजय कपूर के परिवार से जुड़े संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सौहार्दपूर्ण समाधान पर जोर दिया है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि परिवार के सदस्य आपसी बातचीत और मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझा लेते हैं तो यह सभी पक्षों के हित में होगा। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि समझौते की प्रक्रिया सफल नहीं होती, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि वह इस विवाद के शांतिपूर्ण समाधान को लेकर आशावादी है और चाहता है कि वर्षों तक चलने वाली कानूनी लड़ाई से बचा जाए। अदालत ने मध्यस्थता की प्रक्रिया को 2 नवंबर तक जारी रखने की अनुमति दी है।

अदालत ने दोनों पक्षों से दिखाई सकारात्मक सोच

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि दोनों पक्ष अपने-अपने अधिकारों और दावों को लेकर विस्तार से अपनी बात रख चुके हैं। अब समय आ गया है कि सभी लोग खुले मन और सकारात्मक सोच के साथ समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।

पीठ ने कहा कि लंबी कानूनी लड़ाइयां न केवल परिवारों को विभाजित करती हैं, बल्कि समय और संसाधनों की भी भारी बर्बादी होती है। ऐसे मामलों में आपसी सहमति और संवाद सबसे बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

'अगर समझौता नहीं हुआ तो कानून अपना रास्ता लेगा'

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उसका पूरा ध्यान मध्यस्थता प्रक्रिया को सफल बनाने पर है। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय तक कोई समाधान नहीं निकलता, तो दोनों पक्ष कानून के तहत उपलब्ध सभी अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

अदालत की टिप्पणी से साफ है कि वह फिलहाल विवाद को अदालत के बजाय बातचीत के जरिए समाप्त होते देखना चाहती है।

2 नवंबर तक जारी रहेगी मध्यस्थता

कोर्ट ने मामले में नियुक्त मध्यस्थ को 2 नवंबर तक प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि फिलहाल इस दौरान किसी अतिरिक्त बहस की आवश्यकता नहीं है और सभी पक्षों को मध्यस्थता प्रक्रिया में पूरा सहयोग करना चाहिए।

साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मध्यस्थ की फीस का भुगतान आरके फैमिली ट्रस्ट द्वारा किया जाएगा।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला संजय कपूर के परिवार के बीच संपत्ति और पारिवारिक हितों से जुड़े विवाद का है। संजय कपूर की मां रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कुछ अंतरिम राहत की मांग की है।

उनकी याचिका में कहा गया है कि जब तक मध्यस्थता की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर और अन्य संबंधित पक्षों को आरके फैमिली ट्रस्ट के संचालन और फैसलों में हस्तक्षेप करने से रोका जाए।

इसी विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी मध्यस्थता का रास्ता अपनाने की सलाह दे चुका है।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश को बनाया गया था मध्यस्थ

मामले की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया था। उनका उद्देश्य परिवार के सभी पक्षों को एक मंच पर लाकर विवाद का ऐसा समाधान निकालना है, जिसे सभी स्वीकार कर सकें।

अदालत का मानना है कि पारिवारिक मामलों में अदालत के आदेश से बेहतर समाधान अक्सर आपसी सहमति और संवाद से निकलता है।

कोर्ट की प्राथमिकता: रिश्ते बचें, विवाद खत्म हो

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि परिवारों से जुड़े मामलों में न्यायालय की प्राथमिकता केवल कानूनी निर्णय देना नहीं, बल्कि रिश्तों को बचाना भी होती है। अदालत ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर व्यावहारिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

न्यायालय ने यह भी कहा कि किसी भी पक्ष को ऐसा वातावरण नहीं बनाना चाहिए जिससे मध्यस्थता प्रक्रिया प्रभावित हो या समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ें।

अब आगे क्या होगा?

अब इस मामले में सभी की नजर 2 नवंबर तक चलने वाली मध्यस्थता प्रक्रिया पर रहेगी। यदि इस दौरान समझौता हो जाता है तो लंबे समय से चला आ रहा पारिवारिक विवाद समाप्त हो सकता है। वहीं, यदि बातचीत विफल रहती है तो सुप्रीम कोर्ट मामले की कानूनी सुनवाई आगे बढ़ाएगा और कानून के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।

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