SEMICON India 2026 का PM मोदी ने किया उद्घाटन, सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मिलेगी नई रफ्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में SEMICON India 2026 का उद्घाटन किया। सम्मेलन में भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र पर चर्चा होगी। सरकार ने 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाले 10 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में SEMICON India 2026 के पांचवें संस्करण का उद्घाटन किया। तीन दिवसीय यह राष्ट्रीय सम्मेलन 17 से 19 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को लेकर उद्योग, नीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा होगी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 11 वर्षों में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2014-15 में करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक्स सामान तैयार किया जाता था, जो 2024-25 में बढ़कर लगभग 12 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का निर्यात भी करीब 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 3.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण रणनीति का उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत के तहत देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है।
मोबाइल फोन उत्पादन में 28 गुना बढ़ोतरी
मोबाइल फोन विनिर्माण में भी पिछले एक दशक में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। 2014-15 में करीब 18,000 करोड़ रुपये का मोबाइल फोन उत्पादन हुआ था, जो 2024-25 में बढ़कर 5.45 लाख करोड़ रुपये हो गया। मोबाइल फोन का निर्यात 1,500 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 2 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, देश की कुल मांग में आयातित मोबाइल फोन की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से घटकर केवल 0.02 प्रतिशत रह गई है।
2022 में शुरू हुआ था Semicon India Programme
भारत सरकार ने जनवरी 2022 में Semicon India Programme शुरू किया था। इसका उद्देश्य देश में डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन, असेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग और मॉड्यूल विनिर्माण तक पूरा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करना है। पिछले चार वर्षों में सरकार ने करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रतिबद्धताओं वाले 10 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें से माइक्रोन (Micron) और कायन्स (Kaynes) के दो संयंत्रों से व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है, जबकि दो अन्य संयंत्रों के इसी वर्ष उत्पादन शुरू करने की योजना है।
चिप डिजाइन इकोसिस्टम को भी बढ़ावा
भारत में चिप डिजाइन क्षमता विकसित करने के लिए सरकार आठ कंपनियों के चिप डिजाइन टूल्स 315 विश्वविद्यालयों को मुफ्त उपलब्ध करा रही है। इनके इस्तेमाल का आंकड़ा 200 लाख घंटे से अधिक हो चुका है। देशभर के 75 संस्थानों द्वारा 211 चिप्स का टेप-आउट भी किया जा चुका है। इसके अलावा सरकार ने वीडियो निगरानी, ड्रोन डिटेक्शन, ऊर्जा मीटरिंग, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ब्रॉडबैंड और IoT SoCs जैसे क्षेत्रों के लिए सेमीकंडक्टर चिप्स और SoCs से जुड़े 24 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है।
इनमें से 14 कंपनियां अपने समाधानों को बड़े स्तर पर विकसित और बाजार में लाने के लिए 650 करोड़ रुपये से अधिक की वेंचर कैपिटल फंडिंग जुटा चुकी हैं। सात चिप्स विभिन्न नोड्स पर सफलतापूर्वक तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें 12 nm जैसे उन्नत नोड भी शामिल हैं।
अमरीका, जापान और यूरोप समेत कई देशों से सहयोग
सेमीकंडक्टर की मजबूत और भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन तैयार करने के लिए भारत ने अमरीका, जापान, यूरोपीय संघ, सिंगापुर और नीदरलैंड के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किए हैं। सरकार के अनुसार, ऐसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उद्देश्य सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और लचीला बनाना तथा भारत की वैश्विक भूमिका को बढ़ाना है।
10 सेमीकंडक्टर इकाइयां निर्माणाधीन
India Semiconductor Mission के तहत फिलहाल 10 सेमीकंडक्टर इकाइयां निर्माणाधीन हैं। वहीं, Electronics Component Manufacturing Scheme के तहत 249 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें PCB, कैपेसिटर, लैमिनेट और अन्य घटकों के साथ-साथ उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले बेस मटेरियल और कैपिटल इक्विपमेंट से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। स्वीकृत 10 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स छह राज्यों—गुजरात, असम, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश—में स्थापित किए जा रहे हैं।
गुजरात में माइक्रोन और टाटा के बड़े प्रोजेक्ट
गुजरात में Micron Technology Inc. 22,516 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधा स्थापित कर रही है। यहां DRAM और NAND उत्पादों की असेंबली और टेस्टिंग की जाएगी। संयंत्र की उत्पादन क्षमता करीब 1.4 करोड़ यूनिट प्रति सप्ताह बताई गई है। वहीं Tata Electronics Private Limited (TEPL) गुजरात में 91,526 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर फैब स्थापित कर रही है। यह परियोजना ताइवान की PSMC के साथ तकनीकी साझेदारी में विकसित की जाएगी और इसकी क्षमता करीब 50,000 wafer starts प्रति माह होगी। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स असम में भी 27,120 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर सुविधा स्थापित कर रही है। यहां स्वदेशी पैकेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा और उत्पादन क्षमता 4.8 करोड़ यूनिट प्रतिदिन होगी।
CG Power और Kaynes की परियोजनाएं
गुजरात में CG Power and Industrial Solutions Limited 7,584 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर सुविधा स्थापित कर रही है। यह परियोजना Renesas Electronics America और Thailand की STARS Microelectronic के साथ संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित की जाएगी। वहीं Kaynes Technology India Limited 3,307 करोड़ रुपये के निवेश से वायर बॉन्ड इंटरकनेक्ट और सब्सट्रेट आधारित पैकेज के लिए सुविधा स्थापित कर रही है। इसकी क्षमता प्रतिदिन 63.3 लाख से अधिक चिप्स उत्पादन की होगी।
उत्तर प्रदेश और ओडिशा में भी परियोजनाएं
उत्तर प्रदेश में Vama Sundari Investments (Delhi) Private Limited 3,706 करोड़ रुपये के निवेश से डिस्प्ले ड्राइवर IC के लिए सेमीकंडक्टर सुविधा स्थापित कर रही है। यह परियोजना Foxconn India के साथ साझेदारी में विकसित होगी और इसकी क्षमता करीब 20,000 wafers प्रति माह या 3.6 करोड़ chips प्रति माह होगी। ओडिशा में दो परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं। 3D Glass Solutions Inc. 1,943 करोड़ रुपये के निवेश से पैकेज्ड उत्पादों, ग्लास इंटरपोजर्स और 3D हेटरोजीनियस इंटीग्रेशन मॉड्यूल की असेंबली के लिए सुविधा स्थापित कर रही है। वहीं SiCSem Private Limited 2,066 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधा स्थापित कर रही है। इसकी क्षमता 5,000 wafers प्रति माह और पैकेजिंग क्षमता 80 लाख यूनिट प्रति माह होगी।
पंजाब और आंध्र प्रदेश में भी निवेश
पंजाब में Continental Device India Private Limited 117 करोड़ रुपये के निवेश से अपनी सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधा का विस्तार कर रही है। यहां MOSFETs, IGBTs, Schottky bypass diodes और transistors जैसे हाई-पावर डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर उपकरण बनाए जाएंगे। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब 15.838 करोड़ यूनिट होगी। आंध्र प्रदेश में Advanced System in Package Technologies Private Limited 480 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधा स्थापित कर रही है। यह परियोजना दक्षिण कोरिया की APACT Co. Ltd. के साथ तकनीकी साझेदारी में विकसित होगी और इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब 9.6 करोड़ यूनिट होगी।
रोजगार के नए अवसर
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के विस्तार का असर रोजगार पर भी पड़ा है। उद्योग के अनुमान के अनुसार, यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 25 लाख नौकरियों को समर्थन देता है। इनमें मोबाइल फोन विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी करीब 12 लाख नौकरियां शामिल हैं, जो विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और संबद्ध सेवाओं में फैली हैं। SEMICON India 2026 ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब भारत सेमीकंडक्टर निर्माण, चिप डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के क्षेत्र में अपनी घरेलू क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करने पर जोर दे रहा है।