‘लोकतंत्र से खिलवाड़’ या मतदाता सूची की सफाई? SIR पर पूर्व CEC कुरैशी और EC आमने-सामने

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर तंज कसा और करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने अवैध प्रवासियों की पहचान का आंकड़ा सार्वजनिक करने तथा मतदान अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की।

By  Preeti Kamal September 6th 2026 01:30 PM -- Updated: September 6th 2026 12:44 PM

भुवनेश्वर, ओडिशा: देश के कई राज्यों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एसवाई कुरैशी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग को यह बताना चाहिए कि इस पूरी कवायद में कितने अवैध प्रवासियों की पहचान हुई।

एसवाई कुरैशी ने SIR की प्रक्रिया पर व्यंग्य करते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने इस अभ्यास के जरिए भारत की करीब 14-15 करोड़ आबादी को ‘खत्म’ करने का मुश्किल काम पूरा कर लिया है। उन्होंने कहा कि SIR का प्रमुख उद्देश्य अवैध प्रवासियों की पहचान करना बताया गया था, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वास्तव में कितने अवैध प्रवासियों की पहचान हुई।

‘वोट देना संवैधानिक अधिकार, चुनाव आयोग की कृपा नहीं’

कुरैशी ने चुनाव आयोग से इस आंकड़े को सार्वजनिक करने की मांग की। उनके मुताबिक, इससे यह पता चलेगा कि आयोग ने अपने बताए गए उद्देश्य को किस हद तक हासिल किया है। पूर्व CEC इससे पहले भी SIR की मंशा और प्रक्रिया पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि मतदान नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और इसे चुनाव आयोग की ‘कृपा’ के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

कुरैशी ने आरोप लगाया कि SIR के तहत करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाना लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 326 का हवाला देते हुए कहा कि पात्र नागरिकों के मतदाता के रूप में पंजीकरण का अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

चुनाव आयोग ने SIR को लेकर क्या कहा?

चुनाव आयोग के अनुसार, SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना तथा अपात्र या दोहराए गए नामों को हटाना है। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाना है कि कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अक्टूबर 2025 में देशभर में SIR की प्रक्रिया की घोषणा की थी। आयोग ने इसके पीछे प्रवासन, एक से अधिक स्थानों पर मतदाता पंजीकरण, मृत मतदाताओं के नाम सूची में बने रहना और विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने जैसे कारणों का उल्लेख किया था।

महाराष्ट्र में दो करोड़ कम मतदाताओं को लेकर विवाद

SIR को लेकर महाराष्ट्र में भी राजनीतिक विवाद तेज हुआ है। राज्य में जारी मसौदा मतदाता सूची में पिछली मतदाता सूची की तुलना में करीब दो करोड़ कम मतदाता दिखाई दिए।

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 9,78,54,049 मतदाताओं में से 7,71,65,562 मतदाताओं ने 17 अगस्त तक SIR की गणना प्रक्रिया के दौरान अपने फॉर्म जमा किए थे। मतदाता सूची में कमी को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

कांग्रेस ने भी साधा निशाना

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने महाराष्ट्र में SIR के दौरान कथित तौर पर करीब दो करोड़ मतदाताओं के नाम कम होने को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में ‘वोटों की चोरी’ हो रही है। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाना है, न कि पात्र मतदाताओं को बाहर करना।

SIR अब चुनावी राज्यों में राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक तरफ आयोग इसे मतदाता सूची को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया बता रहा है, वहीं विपक्षी दल बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

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