Explained: झारखंड छात्र आंदोलन के चलते JSSC-CGL रद्द, सरकार झुकी, अब नया आंदोलन शुरू
अनशन खत्म करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि यह झारखंड के लिए एक बड़ी जीत है, हालांकि उन्होंने फिलहाल अपना प्रोटेस्ट रोका है, सुधार के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने ऐसे एजुकेशन सिस्टम की उम्मीद जताई जहां पेपर लीक और गड़बड़ियां न हों।
नई दिल्ली: झारखंड में करीब एक महीने से चल रहे छात्र आंदोलन ने आखिरकार सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। सोमवार रात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लिया गया, JSSC-CGL यानी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया गया। इसके साथ ही TDPL (TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) नाम की परीक्षा एजेंसी से जुड़ी हर परीक्षा, हर नतीजा और हर चयन प्रक्रिया को रद्द करने का ऐलान हुआ।
सरकार ने ये भी घोषणा की कि 2014 से अब तक झारखंड में हुई सभी भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जांच होगी। इसके लिए वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक सुधार समिति भी गठित की गई है। यह फैसला छात्रों के 24 दिन लंबे आंदोलन के बाद आया, जो रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में केंद्रित रहा।
सरकार के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद मंगलवार तड़के करीब सवा एक बजे रांची के सदर अस्पताल में एक भावुक पल देखने को मिला। तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने वहां भी अपनी भूख हड़ताल जारी रखी थी।
देर रात मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और विधायक जयराम महतो सदर अस्पताल पहुंचे। जयराम महतो ने देवेंद्र नाथ महतो को अपने हाथों से कुछ खिलाया, वहीं दीपिका पांडेय सिंह ने उन्हें जूस पिलाया। इसके बाद देवेंद्र नाथ महतो ने अपना अनशन खत्म किया। उनके साथ-साथ उम्मे हबीबा, प्रेम नायक और कुश महतो ने भी अपनी भूख हड़ताल तोड़ी।
अनशन खत्म करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि यह झारखंड के लिए एक बड़ी जीत है, हालांकि उन्होंने फिलहाल अपना प्रोटेस्ट रोका है, सुधार के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने ऐसे एजुकेशन सिस्टम की उम्मीद जताई जहां पेपर लीक और गड़बड़ियां न हों।
अनशन खत्म, लेकिन आंदोलन जारी - CBI जांच पर पेच फंसा
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि अनशन का खत्म होना पूरे आंदोलन के खत्म होने के बराबर नहीं है। JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के प्रवक्ता रवींद्र पासवान ने साफ किया है कि सरकार ने छात्रों की सबसे बड़ी मांग मान ली है, लेकिन CBI जांच पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। जब तक इस मांग पर स्पष्टता नहीं मिलती, आंदोलन जारी रहेगा।
एक और छात्र नेता पीयूष कुमार ने इसे ‘पहली बड़ी जीत’ बताया, लेकिन उनके मुताबिक 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े कई मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे सरकार के आधिकारिक नोटिफिकेशन का अध्ययन करने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस पूरे मामले पर एक विस्तृत प्रेस रिलीज़ जारी करने की भी मांग की है।
20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव पर फैसला कोर कमेटी की बैठक में होना है, और प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस घेराव के लिए करीब एक लाख लोगों को संगठित करने की तैयारी चल रही है।

आंदोलन की जड़ें: एक वायरल OMR शीट से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे आंदोलन की चिंगारी एक वायरल OMR शीट से लगी थी। सोशल मीडिया पर सामने आई एक कथित OMR शीट में दावा किया गया कि दूसरे राज्य के एक अभ्यर्थी ने पेपर-1 में सिर्फ 48 सवाल हल किए, फिर भी वह मेन्स परीक्षा के लिए क्वालिफाई कर गया। हालांकि इस वायरल शीट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। इसके साथ ही उम्मीदवारों ने यह भी सवाल उठाया कि मेरिट लिस्ट पर आयोग के संवैधानिक सदस्य के हस्ताक्षर तक नहीं थे। इन्हीं आरोपों के बाद JPSC दफ्तर के बाहर प्रदर्शन शुरू हुए।
21 जुलाई को परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों पर CID ने JPSC दफ्तर पर छापा मारा। उप परीक्षा नियंत्रक समेत आठ लोग हिरासत में लिए गए, और अगले ही दिन JPSC चेयरमैन एल ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया। सिविल सेवा परीक्षा समेत नौ परीक्षाएं तुरंत रोक दी गईं।
जांच में चौंकाने वाले खुलासे, अब तक 20 गिरफ्तारियां
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। CID की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी अभय तिवारी ने कबूल किया कि बोकारो में करीब 15 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये लेकर उन्हें परीक्षा से पहले 65 सवाल रटवाए गए थे। यानी करीब पौने दो करोड़ रुपये की वसूली सिर्फ एक बैच से हुई।
जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा का बायोमेट्रिक और पेपर छपाई का काम TDPL से हटाकर एक और एजेंसी वेबेल को सौंपा गया था, और वहीं से पेपर लीक होने का सिलसिला शुरू हुआ। पूर्व JPSC चेयरमैन एल ख्यांगते की गिरफ्तारी हो चुकी है, और अब तक कुल 20 लोगों को CID गिरफ्तार कर चुकी है। दबाव इतना बढ़ा कि आयोग के तीनों मौजूदा सदस्य- अजीता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और जमाल अहमद ने भी इस्तीफा दे दिया।

आंदोलन की पूरी टाइमलाइन
- 21 जुलाई: परीक्षा गड़बड़ी पर CID की JPSC दफ्तर में रेड, उप परीक्षा नियंत्रक समेत 8 हिरासत में, चेयरमैन का इस्तीफा
- 22 जुलाई: JPSC चेयरमैन एल ख्यांगते का इस्तीफा मंज़ूर, सिविल सेवा समेत 9 परीक्षाएं स्थगित
- 24 जुलाई: JPSC-JSSC नियुक्ति अनियमितता के खिलाफ छात्र आंदोलन शुरू
- 28 जुलाई: मोरहाबादी की बापू वाटिका से आंदोलन जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम शिफ्ट
- 2 अगस्त: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भूख हड़ताल शुरू की
- 5 अगस्त: सरकार ने वार्ता के लिए 4 मंत्रियों की कमेटी बनाई
- 8 अगस्त: छात्रों और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच दूसरे दौर की बातचीत, बेनतीजा रही
- 9 अगस्त: तीसरे दौर की बातचीत में सरकार ने JPSC 14वीं PT रद्द समेत 6 मांगें मानीं, CGL रद्द और CBI जांच पर सहमति नहीं बनी
- 10 अगस्त: छात्रों का विधानसभा घेराव, पुलिस लाठीचार्ज में 100 से ज्यादा घायल, देवेंद्र नाथ महतो अस्पताल में भर्ती
- 11 अगस्त: लाठीचार्ज के खिलाफ भाजपा का झारखंड बंद, ABVP का विधानसभा घेराव
- 12 अगस्त: विधानसभा घेराव को लेकर 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों पर FIR
- 15 अगस्त: जयपाल सिंह स्टेडियम से फिरायालाल चौक तक तिरंगा यात्रा
- 17 अगस्त: सरकार-छात्रों में चौथे दौर की बातचीत, उसी रात सरकार का बड़ा ऐलान - JSSC-CGL रद्द
- 18 अगस्त (देर रात/तड़के): देवेंद्र नाथ महतो और तीन अन्य ने भूख हड़ताल तोड़ी

एक जीत ने दूसरे आंदोलन को दिया जन्म, CGL पास अभ्यर्थियों का विरोध
सरकार के इस फैसले ने झारखंड में एक बिल्कुल नया मोर्चा खोल दिया है। जिस JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे थे, उसी परीक्षा को पास करके नौकरी पाने वाले 1932 अभ्यर्थी अब अपनी नियुक्ति बचाने के लिए सड़क पर उतर आए हैं।
कैबिनेट बैठक के दौरान ही ये अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुट गए थे। जैसे ही मुख्यमंत्री ने परीक्षा रद्द करने की घोषणा की, कई अभ्यर्थी रो पड़े और वहीं धरने पर बैठ गए। नारेबाज़ी करते हुए उन्होंने कहा कि वे अब न्याय के लिए कोर्ट का रुख करेंगे। रात एक बजे तक ये अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे रहे, और अगले दिन भारी बारिश के बावजूद उनका विरोध सचिवालय के बाहर जारी रहा।
गौर करने वाली बात यह है कि इस भर्ती प्रक्रिया में करीब तीन साल लगे थे, और 30 दिसंबर 2025 को खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मोरहाबादी मैदान में इन चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे थे। नियुक्ति के महज आठ महीने बाद ही उनकी नौकरी पर तलवार लटक गई है।

अभ्यर्थियों का पक्ष
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी चंदा कुमारी ने इस फैसले पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि न्यायपालिका और लोकतंत्र इस सिद्धांत पर चलते हैं कि सौ दोषी भले बच जाएं, एक निर्दोष को सज़ा नहीं मिलनी चाहिए, लेकिन इस फैसले से हज़ारों निर्दोष लोगों को तुरंत सज़ा मिल गई।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता विनोद सिंह के मुताबिक, नियुक्ति के बाद बिना पक्ष सुने नौकरी रद्द करना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। सरकार ने आठ महीने तक इन्हें वेतन भी दिया है, ऐसे में यह फैसला एकतरफा नज़र आता है। उनके अनुसार अभ्यर्थियों के पास हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक जाने का रास्ता खुला है।
सरकार का बचाव
सत्तारूढ़ JMM के प्रवक्ता मनोज पांडे ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि काफी बातचीत के बाद ही राज्य सरकार इस नतीजे पर पहुंची है, और केंद्र सरकार से अलग, उन्होंने छात्रों की बात सुनकर फैसला लिया, लाठी और पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया।
राजनीतिक हलचल: राहुल गांधी की चिट्ठी से लेकर भाजपा के तंज तक
सरकार के फैसले से ठीक पहले, 14 अगस्त को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर कहा था कि छात्रों का विरोध शांतिपूर्ण रहा है और उनकी मांगें जायज़ हैं। उन्होंने सीएम से अपील की कि वे खुद छात्र प्रतिनिधियों से मुलाकात करें।
चूंकि झारखंड में कांग्रेस खुद हेमंत सोरेन सरकार में सहयोगी दल है, इसलिए विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने इस पर तंज कसते हुए सवाल उठाया कि अपनी ही गठबंधन सरकार को चिट्ठी लिखना राजनीति का कौन सा मॉडल है।
सरकार के ऐलान के बाद भी मरांडी ने इसे अधूरी जीत बताया, उनका कहना था कि जब तक CBI जांच नहीं होगी, दोषियों पर असली कार्रवाई नहीं होगी। भाजपा जिलाध्यक्ष आदित्य साहू ने भी कहा कि सिर्फ परीक्षा रद्द होना काफी नहीं, दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए।
वहीं मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर झारखंड को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार लगातार बातचीत से समाधान निकालने में जुटी रही।
अब आगे क्या?
फिलहाल स्थिति यह है कि झारखंड सरकार ने छात्रों की सबसे बड़ी मांगों में से कई मान ली हैं - JSSC-CGL रद्द, TDPL से जुड़ी प्रक्रियाओं पर कार्रवाई, 2014 से अब तक की परीक्षाओं की व्यापक जांच, और देवेंद्र नाथ महतो का अनशन भी खत्म हो चुका है। लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
दो मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं:
- पहला, CBI जांच की मांग, जिस पर सरकार ने अब तक कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है। छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक यह मांग नहीं मानी जाती, आंदोलन जारी रहेगा।
- दूसरा, JSSC-CGL के ज़रिए पहले से नियुक्त हो चुके 1932 अभ्यर्थियों का भविष्य, जो अब अपनी नौकरी बचाने के लिए कोर्ट का रुख करने की तैयारी में हैं।