चीनी आयात के नियम बदले, अब 2 महीने में करनी होगी प्रोसेसिंग और बिक्री

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने TRQ के तहत ड्यूटी-फ्री रॉ शुगर आयात के नियम बदले हैं। अब आयातकों को बिल ऑफ एंट्री की तारीख से दो महीने के भीतर चीनी प्रोसेस कर घरेलू बाजार में बेचनी होगी।

By  Laxman August 25th 2026 12:37 PM

घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए प्रावधान के तहत अब टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत आयात की जाने वाली रॉ शुगर को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने के भीतर प्रोसेस कर सफेद या रिफाइंड चीनी के रूप में घरेलू बाजार में बेचना होगा।

इस बदलाव से आयातकों को पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक समयसीमा मिलेगी। इससे पहले नियमों में 31 अक्टूबर तक आयातित कच्ची चीनी की प्रोसेसिंग और बिक्री पूरी करने की शर्त थी। यानी कोई कारोबारी अगर अक्टूबर के काफी करीब आयात करता, तो उसके पास प्रोसेसिंग और बिक्री के लिए अपेक्षाकृत कम समय बचता था।

क्या बदला है चीनी आयात के नियम में?

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने TRQ योजना के तहत कच्ची चीनी के आयात से जुड़े प्रावधानों में संशोधन किया है। सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी।

पहले आयातकों के लिए 31 अक्टूबर की एक निश्चित अंतिम तारीख तय थी। संशोधित व्यवस्था में इस निश्चित तारीख को हटा दिया गया है। अब आयात की तारीख के आधार पर दो महीने की समयसीमा लागू होगी।

इसका मतलब है कि अलग-अलग तारीखों पर रॉ शुगर आयात करने वाले कारोबारियों को अपनी खेप की प्रोसेसिंग और बिक्री के लिए आयात की तारीख से दो महीने का समय मिलेगा।

बाकी शर्तें रहेंगी लागू

DGFT के ताजा संशोधन में 20 अगस्त को जारी मूल अधिसूचना की बाकी शर्तों में बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने TRQ योजना के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी।

इसके अलावा सरकार ने SION E-52 के तहत पहले से जारी एडवांस ऑथराइजेशन को एक बार TRQ योजना में बदलने की अनुमति भी दी थी। यह सुविधा उन एडवांस ऑथराइजेशन के तहत 20 अगस्त तक वास्तव में आयात की गई कच्ची चीनी पर लागू होगी।

व्यवस्था में पहले से तैयार रिफाइंड चीनी के साथ-साथ आयातित रॉ शुगर से तैयार होने वाली चीनी को भी शामिल किया गया है। हालांकि, इस प्रक्रिया में आयात के समय छूटे GST के भुगतान सहित निर्धारित अन्य शर्तों का पालन करना होगा।

चीनी की कीमतों के बीच क्यों लिया गया फैसला?

सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी देखी गई है। अगस्त से नवंबर के बीच देश में त्योहारों का सीजन रहता है और इस दौरान चीनी की मांग बढ़ सकती है।

सरकार का उद्देश्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। शुल्क-मुक्त रॉ शुगर आयात से घरेलू चीनी उद्योग को अतिरिक्त कच्चा माल उपलब्ध होगा, जिसे प्रोसेस करके बाजार में बिक्री के लिए लाया जा सकेगा।

नई समयसीमा से आयातकों को भी अपनी खेप को प्रोसेस करने और बाजार में उतारने की योजना बनाने में अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है।

उद्योग ने कहा- देश में पर्याप्त स्टॉक

हालांकि चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बावजूद उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि देश में घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार, पिछले 15-20 दिनों में कीमतों में तेजी मुख्य रूप से बाजार की धारणा, सट्टेबाजी वाली खरीदारी और अल्पकालिक आपूर्ति को लेकर चिंता के कारण हुई है।

उनका कहना है कि मौजूदा चीनी सीजन के 30 सितंबर को समाप्त होने तक पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहने की उम्मीद है। उनके मुताबिक, मौजूदा स्थिति किसी बड़ी संरचनात्मक कमी का संकेत नहीं देती और आने वाले हफ्तों में बाजार की स्थिति बेहतर हो सकती है।

ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने भी उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया है कि देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक मौजूद है और आगामी त्योहारी सीजन में घरेलू मांग पूरी करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।

उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?

सरकार की ओर से उठाए गए कदम का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है। अगर आयातित कच्ची चीनी तय समय में प्रोसेस होकर बाजार में पहुंचती है, तो इससे आपूर्ति को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, चीनी की खुदरा कीमतों पर इसका वास्तविक असर कितना और कितनी जल्दी दिखाई देगा, यह बाजार में आपूर्ति, मांग और त्योहारी खपत जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल सरकार ने आयातकों के लिए तय समयसीमा को अधिक लचीला बनाते हुए उसे आयात की तारीख से जोड़ दिया है। इससे एक ओर कारोबारियों को अपनी प्रक्रिया व्यवस्थित करने का समय मिलेगा, वहीं सरकार को उम्मीद है कि अतिरिक्त चीनी घरेलू बाजार में उपलब्ध कराकर कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

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