सुप्रीम कोर्ट के आदेश से न्याय व्यवस्था में भरोसा बहाल हुआ: कपिल सिब्बल
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत और प्रतिबंधों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम निर्देश जारी किए। कपिल सिब्बल ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश की न्याय व्यवस्था में भरोसा बहाल हुआ है।
नई दिल्ली: वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों और हिरासत में लिए गए लोगों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश से देश की न्याय व्यवस्था में पेशेवरों का भरोसा बहाल हुआ है।
कपिल सिब्बल ने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के लिए बेहद आभारी हैं, जिसने इस देश की न्याय व्यवस्था में पेशेवरों का भरोसा बहाल किया है।” सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि लोगों की आवाजाही कानून के अनुसार सुचारु रूप से जारी रहनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि कानून के विपरीत हिरासत, यातायात या मेट्रो पर प्रतिबंध नहीं लगाए जाने चाहिए। इंटरनेट सेवाओं को भी बिना बाधा जारी रखने का निर्देश दिया गया है।
दिल्ली में हिरासत और प्रतिबंधों के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई
जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने रविवार को विशेष सुनवाई के दौरान ये अंतरिम निर्देश दिए। अदालत दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने तथा विभिन्न प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
पीठ के समक्ष अदालत के पूर्व आदेशों की कथित जानबूझकर अवहेलना को लेकर अवमानना याचिका भी रखी गई। याचिका में सार्वजनिक परिवहन और इंटरनेट जैसी नागरिक सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कार्रवाई को अदालत के निर्देशों के उल्लंघन से जोड़कर सवाल उठाए गए हैं।
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की अवैध हिरासत पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजधानी में लोगों की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र हुए निहत्थे लोगों को गैरकानूनी रूप से हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए।
पीठ ने कहा कि शहर में लोगों की आवाजाही कानून के अनुसार सुचारु रूप से जारी रहनी चाहिए। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू क्षेत्र के बाहर शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि बैरिकेड लगाने की आवश्यकता की समीक्षा कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखकर की जाए।
सुप्रीम कोर्ट के आसपास प्रतिबंध हटाने का निर्देश
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किया गया है। इस पर पीठ ने संबंधित अधिकारियों को प्रतिबंध हटाने का निर्देश दिया, ताकि लोगों को सुप्रीम कोर्ट आने-जाने और न्याय तक पहुंचने में किसी तरह की आशंका या बाधा का सामना न करना पड़े। अदालत ने दोहराया कि लोगों की आवाजाही कानून के दायरे में सुचारु रहनी चाहिए और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
अवमानना याचिका पर भी जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर भी विचार किया, जिनमें आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने अदालत के पूर्व आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की। इन याचिकाओं में रेल और मेट्रो सेवाओं सहित विभिन्न नागरिक सुविधाओं तथा इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पीठ ने कथित अवमानना के मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगने पर सहमति जताई। मामले में आगे की कार्रवाई अदालत के समक्ष प्रस्तुत जवाब और संबंधित तथ्यों के आधार पर होगी।