TMC के 20 बागी सांसदों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई

TMC के महासचिव अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 20 बागी सांसदों से जवाब मांगा है। अदालत ने लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी नहीं किया और अयोग्यता कार्यवाही को तय समयसीमा में पूरा करने के मुद्दे पर जोर दिया।

By  Laxman August 25th 2026 01:03 PM

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सांसदों के एक समूह के कथित विद्रोह को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। पार्टी के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 20 बागी सांसदों से जवाब मांगा है। हालांकि, अदालत ने इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को नोटिस जारी नहीं किया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में इस मामले की सुनवाई हुई। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि मुद्दा केवल नोटिस जारी करने का नहीं, बल्कि अयोग्यता से जुड़ी कार्यवाही को एक निश्चित समयसीमा के भीतर पूरा करने का है।

अयोग्यता याचिकाओं में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अभिषेक

अभिषेक बनर्जी की याचिका का केंद्र TMC के उन सांसदों के खिलाफ लंबित अयोग्यता कार्यवाही है, जिन पर पार्टी से अलग रुख अपनाने का आरोप है। पार्टी की ओर से पहले लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग वाली याचिकाएं दाखिल की गई थीं।

TMC का पक्ष है कि ये सांसद पार्टी के चुनाव चिन्ह पर लोकसभा पहुंचे थे। ऐसे में पार्टी से अलग होकर किसी दूसरे राजनीतिक समूह से जुड़ने की कोशिश दलबदल विरोधी कानून के दायरे में आ सकती है।

अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में अयोग्यता से जुड़े मामलों पर जल्द फैसला किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि कार्यवाही में हो रही देरी का असर राजनीतिक और संसदीय स्थिति पर पड़ रहा है।

कोर्ट में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि मामला नोटिस जारी करने से ज्यादा कार्यवाही को निश्चित समय सीमा के भीतर समाप्त करने से जुड़ा है। इसी वजह से अदालत का फोकस अयोग्यता याचिकाओं के निपटारे में हो रही देरी पर रहा।

सॉलिसिटर जनरल ने लोकसभा अध्यक्ष और उनके कार्यालय को नोटिस जारी नहीं करने का अनुरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि वह अध्यक्ष की ओर से पेश होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें मिले निर्देशों के अनुसार अध्यक्ष ने अयोग्यता याचिकाओं पर नोटिस जारी कर दिए हैं।

इससे संकेत मिलता है कि लोकसभा स्तर पर भी इस मामले में प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। हालांकि, अंतिम फैसला अभी बाकी है और सुप्रीम कोर्ट ने बागी सांसदों से जवाब मांगा है।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला TMC के संसदीय दल में सामने आए मतभेदों से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, 20 सांसदों ने पार्टी से अलग रुख अपनाया है और एक अलग राजनीतिक समूह के तौर पर पहचान बनाने की कोशिश की है। बागी सांसदों की ओर से लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता की मांग किए जाने की बात भी सामने आई है।

दूसरी तरफ TMC का कहना है कि सांसदों का चुनाव पार्टी के टिकट और चुनाव चिन्ह पर हुआ था। ऐसे में पार्टी से अलग होकर किसी दूसरे राजनीतिक दल या समूह से जुड़ने की कोशिश पर दलबदल विरोधी कानून लागू हो सकता है।

यही विवाद अब संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया के स्तर पर पहुंच गया है। अभिषेक बनर्जी चाहते हैं कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला जल्द हो।

कौन-कौन हैं 20 बागी सांसद?

याचिका से जुड़े बागी सांसदों की सूची में कई चर्चित नाम शामिल हैं। इनमें काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, रचना बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, पार्थ भौमिक, अरूप चक्रवर्ती, अधिकारी दीपक देव, सायोनी घोष, बापी हलदर, एमडी अबू ताहेर खान, कालीपद सारेन खेरवाल, असित कुमार मल, जून मलिया, मिताली बाग, खलीलुर रहमान, माला रॉय, शर्मिला सरकार और यूसुफ पठान शामिल हैं।

अब इन सांसदों के जवाब मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की प्रक्रिया तय करेगा।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम TMC के भीतर चल रहे विवाद को और महत्वपूर्ण बना देता है। अब 20 सांसदों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत यह देख सकती है कि अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में देरी का मुद्दा किस तरह सुलझाया जाए।

दूसरी ओर, लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर पहले ही नोटिस जारी किए जाने की बात अदालत को बताई गई है। ऐसे में आगे की कार्रवाई संसद के स्तर पर होने वाली प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई, दोनों पर निर्भर करेगी।

फिलहाल अदालत ने किसी सांसद को अयोग्य घोषित नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट के सामने अभी मुख्य सवाल यह है कि लंबित अयोग्यता कार्यवाही का निपटारा किस समयसीमा में किया जाए। आने वाली सुनवाई में बागी सांसदों के जवाब और आगे की कानूनी प्रक्रिया से तस्वीर और साफ हो सकती है।

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