संसद का मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ा, आखिरी दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष का आमना-सामना

संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच प्रदर्शन और नारेबाजी जारी रही। भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी को झारखंड छात्र आंदोलन के मुद्दे पर घेरा, जबकि विपक्षी सांसदों ने सरकार पर सदन नहीं चलाने और जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया।

By  Preeti Kamal August 13th 2026 11:50 AM -- Updated: August 13th 2026 11:21 AM

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र लगभग पूरी तरह हंगामे और विरोध-प्रदर्शनों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। सत्र के आखिरी दिन भी संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आमने-सामने प्रदर्शन हुआ। भाजपा और विपक्षी इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) के सांसदों ने संसद परिसर के मकर द्वार की सीढ़ियों पर अलग-अलग प्रदर्शन किए।

भाजपा सांसदों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को झारखंड में जारी छात्र आंदोलनों के मुद्दे पर निशाना बनाया। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस और राहुल गांधी ने झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दी। इसी को लेकर भाजपा सांसदों ने मकर द्वार पर प्रदर्शन किया।

विपक्षी सांसदों का भी प्रदर्शन

भाजपा के प्रदर्शन के बाद विपक्षी सांसदों ने भी संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा (Pawan Khera) के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों को खिलौना बंदर के साथ नारेबाजी करते देखा गया। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार को निशाना बनाते हुए नारे लगाए।

सौगत राय बोले- सदन चलाना विपक्ष की जिम्मेदारी नहीं

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत राय (Saugata Roy) ने कहा कि सदन चलाने की जिम्मेदारी विपक्ष की नहीं, बल्कि सरकार की है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सरकार से छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर स्पष्टीकरण चाहता था, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित जवाब नहीं दिया गया। राय ने कहा कि सरकार को विपक्ष को समझाकर सदन चलाने के लिए सहमति बनानी चाहिए थी और मौजूदा स्थिति के लिए पूरी सरकार जिम्मेदार है।

कांग्रेस ने सरकार पर जवाबदेही नहीं निभाने का आरोप लगाया

कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला (Gurjeet Singh Aujla) ने संसद के कामकाज बाधित होने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जवाबदेही का अभाव रहा और गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने सत्र के अंतिम दिन चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही। औजला ने सवाल उठाया कि अगर सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, तो पिछले कई दिनों में इस मुद्दे पर सदन में चर्चा क्यों नहीं हुई।

सपा सांसद जावेद अली खान ने भी उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने कहा कि यदि सरकार चर्चा के लिए तैयार है तो संबंधित मंत्री सदन में आकर बयान दे सकते हैं और स्पष्टीकरण दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री के बयान को सदन की कार्यसूची में शामिल करने के लिए विपक्ष से अनुमति लेना आवश्यक नहीं होता। उन्होंने सत्र समाप्त होने से ठीक पहले चर्चा की पेशकश किए जाने पर सवाल उठाया।

सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी को ठहराया जिम्मेदार

सत्ता पक्ष के सांसदों ने समानांतर प्रदर्शन करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) ने राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि संसद किसी व्यक्ति की निजी व्यवस्था के अनुसार नहीं चलती, बल्कि संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार चलती है। उन्होंने राहुल गांधी पर राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर भी निशाना साधा और सरकार की ओर से किए गए विभिन्न संवैधानिक एवं कानूनी फैसलों का उल्लेख किया।

मानसून सत्र के पूरी तरह धुलने की आशंका

सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने रुख पर कायम हैं। लगातार विरोध और हंगामे के कारण संसद के मानसून सत्र का अधिकांश हिस्सा प्रभावित हुआ है।मौजूदा स्थिति को देखते हुए सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित (Sine Die) होने की संभावना है। यदि यही स्थिति बनी रहती है, तो संसद का मानसून सत्र प्रभावी विधायी कामकाज के लिहाज से लगभग पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ सकता है।

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