Parminder Singh Jhota Murder Case: 24 घंटे में मुख्य आरोपी गिरफ्तार, राजस्थान के सालासर से पकड़ा गया
पंजाब के नशा विरोधी कार्यकर्ता परमिंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में पुलिस ने 24 घंटे के भीतर कथित मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। मानसा में हुई गोलीबारी में झोटा की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य युवक घायल हुए थे।
मानसा/चंडीगढ़: पंजाब के नशा विरोधी कार्यकर्ता परमिंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने वारदात के 24 घंटे के भीतर कथित मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को राजस्थान के चूरू जिले के सालासर से गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई पंजाब और राजस्थान पुलिस के संयुक्त अभियान के तहत की गई। आरोपी को एक होटल से पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।
परमिंदर सिंह झोटा की मंगलवार सुबह पंजाब के मानसा क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह लंबे समय से राज्य में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे थे। उनकी हत्या के बाद इलाके में चिंता और आक्रोश का माहौल बना। पुलिस अब मामले में हत्या की वजह, हमले की साजिश और इसमें अन्य लोगों की संभावित भूमिका की जांच कर रही है।
राजस्थान के सालासर से आरोपी गिरफ्तार
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हत्या के मामले में कथित शूटर अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर स्थित एक होटल से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी पंजाब और राजस्थान पुलिस के बीच समन्वय के बाद हुई। घटना के बाद से आरोपी की तलाश की जा रही थी और पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर जांच कर रही थीं।
24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी को जांच की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, आरोपी की गिरफ्तारी से मामले के सभी पहलू स्पष्ट नहीं हुए हैं। हत्या के पीछे क्या कारण था, वारदात में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं और हमले की योजना किस तरह बनाई गई—इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे।
आरोपी पर हत्या में शामिल होने का आरोप है। अदालत में आरोप साबित होने तक उसे दोषी नहीं माना जा सकता।
मानसा में झोटा पर ताबड़तोड़ फायरिंग
जानकारी के मुताबिक, परमिंदर सिंह झोटा मंगलवार सुबह अपने साथियों के साथ मानसा क्षेत्र में मौजूद थे, तभी हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया गया कि हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाकर नजदीक से फायरिंग की।
हमले में झोटा के पेट और पैर में गंभीर चोटें आईं। गोलीबारी के दौरान तीन अन्य युवक भी घायल हुए। मौके पर मौजूद लोगों और साथियों ने घायलों को तत्काल मानसा के सिविल अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, डॉक्टरों ने परमिंदर सिंह झोटा को मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। हमले की परिस्थितियों, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों और संभावित आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है। पुलिस की जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि हमलावरों ने झोटा को ही निशाना क्यों बनाया।
नशे के खिलाफ अभियान से जुड़ा था झोटा का काम
परमिंदर सिंह झोटा मानसा और आसपास के क्षेत्रों में नशे के खिलाफ सामाजिक अभियान चलाने के लिए जाने जाते थे। वह कथित तौर पर हेरोइन, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘चिट्टा’ कहा जाता है, और मेडिकल दुकानों से अवैध रूप से बेची जाने वाली नशीली दवाओं के खिलाफ आवाज उठाते थे।
उनकी हत्या के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या उनके नशा विरोधी अभियान का इस वारदात से कोई संबंध था। शुरुआती चर्चाओं में नशे के कारोबार से जुड़े लोगों की संभावित भूमिका की आशंका जताई गई, लेकिन इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पुलिस जांच जरूरी है।
कुछ शुरुआती विवरणों में एक स्थानीय मेडिकल स्टोर मालिक का नाम भी सामने आया था। हालांकि, मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह पुलिस के आधिकारिक बयान और जुटाए गए साक्ष्यों से स्पष्ट होगा। किसी व्यक्ति की भूमिका को बिना पुष्टि के हत्या की साजिश से जोड़ना उचित नहीं होगा।
मां ने जताई थी बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंता
परमिंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद उनकी मां का बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा कि उनका बेटा पहले भी अपनी जान को खतरा होने की बात कहता था। मां के मुताबिक, झोटा ने कई बार आशंका जताई थी कि कुछ लोग उन्हें मार सकते हैं।
उन्होंने अपने बेटे को याद करते हुए बताया कि घटना वाले दिन घर से निकलने से पहले उसने उनके पैर छुए थे और खाना तैयार रखने की बात कही थी। बेटे की मौत से दुखी मां ने सरकार और व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई।
परिवार के इस बयान ने मामले की संवेदनशीलता बढ़ा दी है। अब जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि क्या झोटा को पहले कोई धमकी मिली थी, क्या उन्होंने इस संबंध में किसी अधिकारी से शिकायत की थी और उनकी सुरक्षा को लेकर पहले कोई कदम उठाया गया था।
गिरफ्तारी के बाद जांच में क्या होगा आगे?
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने वारदात की पूरी कड़ी जोड़ने की चुनौती है। जांच में हमले की वजह, इस्तेमाल किए गए हथियार, आरोपी की गतिविधियों और संभावित सहयोगियों की भूमिका जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है।
इसके साथ ही, तीन घायल युवकों के बयान और घटनास्थल से मिले साक्ष्य भी मामले को समझने में महत्वपूर्ण होंगे। यदि जांच में किसी साजिश या अन्य लोगों की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं, तो पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
परमिंदर सिंह झोटा की हत्या ने पंजाब में नशे के खिलाफ चल रहे सामाजिक अभियानों से जुड़े लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल, राजस्थान से कथित मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी जांच में अहम प्रगति है, लेकिन हत्या के पीछे की वास्तविक वजह और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका का खुलासा पुलिस की आगे की कार्रवाई के बाद ही हो सकेगा।