परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड: SHO बेअंत कौर सस्पेंड, पंजाब बंद के बीच परिवार की CBI जांच की मांग

मानसा में परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के बाद SHO बेअंत कौर को निलंबित कर दिया गया है। किसान और मजदूर संगठनों ने पंजाब बंद का आह्वान किया, जबकि परिवार CBI जांच की मांग पर अड़ा है।

By  Laxman October 15th 2026 03:35 PM

पंजाब के मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज कर दी है। मामले में पहली प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए मानसा के सिटी पुलिस स्टेशन-2 की एसएचओ इंस्पेक्टर बेअंत कौर को निलंबित कर दिया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब किसान और मजदूर संगठनों ने हत्या के विरोध में राज्यव्यापी ‘पंजाब बंद’ का आह्वान किया है।

परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। प्रदर्शनकारी मामले में जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस पहले ही मामले के मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को गिरफ्तार कर चुकी है।

SHO बेअंत कौर पर कार्रवाई, SSP कार्यालय ने जारी किया आदेश

मानसा के सिटी पुलिस स्टेशन-2 की प्रभारी इंस्पेक्टर बेअंत कौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय की ओर से जारी आदेश के जरिए सामने आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के बाद हुई पहली प्रशासनिक कार्रवाई है।

हालांकि, निलंबन के विस्तृत कारणों और विभागीय जांच के निष्कर्षों की जानकारी सामने आना बाकी है। इसलिए इस कार्रवाई को हत्या के मामले में किसी अधिकारी की दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

किसान और मजदूर संगठनों का पंजाब बंद का आह्वान

परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में किसान और मजदूर संगठनों ने गुरुवार को पंजाब बंद का आह्वान किया। संगठनों की मांग है कि मामले में जवाबदेही तय की जाए और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।

हत्या के बाद मानसा में बाजार बंद कराने और विरोध प्रदर्शन की खबरें भी सामने आई थीं। इस घटनाक्रम के बीच राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए अहम चुनौती बन गया है। बंद के दौरान अलग-अलग इलाकों में गतिविधियों और यातायात पर पड़ने वाले असर की स्थिति स्थानीय स्तर पर अलग हो सकती है।

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मेडिकल स्टोर में आगजनी

पुलिस ने पंजाब और राजस्थान पुलिस के संयुक्त प्रयास से मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आरोपी एक होटल में छिपा हुआ था।

इस गिरफ्तारी के बाद बुधवार को आरोपी के घर पर बुलडोजर कार्रवाई की गई। इसी दौरान गुस्साई भीड़ द्वारा उसके मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ और आग लगाए जाने की भी खबर सामने आई। इन घटनाओं ने मामले को और संवेदनशील बना दिया।

किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत होना जरूरी है। वहीं, भीड़ द्वारा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या आगजनी की घटनाएं कानून-व्यवस्था से जुड़ी अलग जांच का विषय हो सकती हैं।

परिवार की मांग- CBI जांच हो, मुख्यमंत्री और DGP दें इस्तीफा

परविंदर सिंह झोटा के परिजन मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग कर रहे हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। परिवार ने कहा है कि उनकी मांगें पूरी होने तक वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए पंजाब के मुख्य सचिव और DGP से रिपोर्ट मांगी है। आयोग की यह पहल मामले में प्रशासनिक जवाबदेही और मानवाधिकार से जुड़े पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करती है। रिपोर्ट में क्या जानकारी दी जाती है और जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शांति बनाए रखने की अपील की

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक वीडियो संदेश के जरिए घटना पर दुख जताते हुए दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस को पूरे मामले की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, मुख्य आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में हत्या की साजिश में किसी अन्य व्यक्ति या संगठन की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

जांच और जवाबदेही पर टिकी निगाहें

परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है। SHO का निलंबन, किसान-मजदूर संगठनों का बंद, परिवार की CBI जांच की मांग और NHRC की कार्रवाई ने मामले को व्यापक सार्वजनिक महत्व दे दिया है।

अब आगे की जांच, प्रशासन की प्रतिक्रिया और परिवार की मांगों पर होने वाले फैसले अहम होंगे। साथ ही यह भी जरूरी होगा कि हत्या से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और किसी भी तरह की हिंसा या आगजनी पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।


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