Punjab SIR: CEC ज्ञानेश कुमार के विरोध के बीच CEO अनिंदिता मित्रा की तारीफ, आधी रात तक देती थीं जवाब

पंजाब में SIR के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची को लेकर AAP, कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल ने CEO अनिंदिता मित्रा की कार्यशैली की तारीफ की। नेताओं ने कहा कि उन्होंने सवालों के जवाब दिए और चिंताओं को सुना, लेकिन इसे SIR के व्यापक समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

By  Laxman October 13th 2026 12:30 PM

Punjab Voter List Revision: पंजाब में विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा की कार्यशैली की सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने सराहना की है। कांग्रेस, बीजेपी, आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने कहा कि उन्होंने उनकी शिकायतें सुनीं और सवालों के जवाब दिए। हालांकि, दलों ने स्पष्ट किया कि पंजाब में प्रक्रिया के संचालन की तारीफ को देश के दूसरे हिस्सों में SIR के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

पंजाब में अनिंदिता मित्रा की तारीफ क्यों कर रहे हैं सभी दल?

देश के कई हिस्सों में विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी मतदाता सूची में बदलावों को लेकर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन पंजाब में तस्वीर कुछ अलग दिखाई दी, जहां SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी होने पर आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा के कामकाज की सराहना की।

राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के मुताबिक, इस तारीफ की मुख्य वजह प्रक्रिया के दौरान संवाद और शिकायतों पर मिली प्रतिक्रिया थी। नेताओं ने बताया कि मित्रा ने उनकी चिंताओं को सुना, सवालों का जवाब दिया और जहां जरूरत पड़ी, वहां सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

कांग्रेस के प्रवक्ता हरदीप सिंह किंगरा ने विशेष रूप से उनके सक्रिय संवाद का उल्लेख किया। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के लिए बनाए गए व्हाट्सऐप समूह में सवालों का जवाब जल्दी दिया जाता था। कई बार देर रात, यहां तक कि आधी रात के आसपास भी संदेशों का उत्तर मिलने की बात उन्होंने कही।

किंगरा का कहना था कि किसी अधिकारी की ओर से राजनीतिक दलों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना और समय पर जवाब देना सराहनीय है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रशंसा का अर्थ SIR की पूरी प्रक्रिया का समर्थन करना नहीं है।

अंतिम मतदाता सूची में कितने वोटर?

पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों के लिए सोमवार को अंतिम मतदाता सूची जारी की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अंतिम सूची में कुल 2,01,00,727 मतदाता शामिल हैं। इससे पहले 13 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 1,93,94,435 मतदाता दर्ज थे।

दावे और आपत्तियों के चरण के दौरान 7,97,263 मतदाताओं के नाम जोड़े गए। अंतिम सूची में 1,03,76,026 पुरुष, 97,24,195 महिला और 506 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।

ड्राफ्ट सूची और अंतिम सूची के आंकड़ों में अंतर बताता है कि पुनरीक्षण के दौरान मतदाता विवरण में बदलाव हुए। हालांकि, नाम जोड़ने या हटाने के प्रत्येक मामले को समझने के लिए संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और प्रक्रिया के नियमों को देखना जरूरी है।

मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी व्यवस्था का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं का सही विवरण सुनिश्चित करना और अपात्र या स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं से संबंधित रिकॉर्ड को निर्धारित नियमों के अनुसार अद्यतन करना होता है। इसी वजह से राजनीतिक दल इस प्रक्रिया के विभिन्न चरणों पर नजर रखते हैं।

अकाली दल ने कहा- चिंताओं पर हुई सुनवाई

शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर ने पंजाब में प्रक्रिया पूरी होने का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि पार्टी ने बैठकों के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने अपनी चिंताएं रखीं और अधिकारियों ने उन पर ध्यान दिया।

कलेर के अनुसार, अंतिम सूची में करीब 2.01 करोड़ मतदाता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पुनरीक्षण के दौरान ऐसे नामों को लेकर भी काम किया गया, जिनके बारे में माना गया कि संबंधित व्यक्ति कहीं और स्थानांतरित हो चुका है या अब पात्र नहीं है। साथ ही, नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया का भी उन्होंने उल्लेख किया।

अकाली दल की ओर से जताई गई संतुष्टि इस बात पर केंद्रित रही कि पार्टी को अपनी आपत्तियां और सुझाव रखने का अवसर मिला।

बीजेपी और AAP ने क्या कहा?

पंजाब बीजेपी लीगल सेल के चेयरमैन एन.के. वर्मा के मुताबिक, राज्य में पुनरीक्षण की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने अंतिम सूची को लेकर अपनी बात रखी और प्रक्रिया के संचालन की सराहना की।

वहीं, आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता फेरी सोफत ने कहा कि उनकी पार्टी जून से ही SIR से जुड़े मुद्दों को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने उठा रही थी। उनके अनुसार, इन सवालों के जवाब संतोषजनक रहे। उन्होंने राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त करीब 90,000 बूथ लेवल एजेंट (BLA) की भागीदारी को भी प्रक्रिया में उपयोगी बताया।

सोफत ने पंजाब सरकार की ओर से बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को इस कार्य पर ध्यान देने के लिए मिले सहयोग का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, अधिकारियों को पुनरीक्षण का काम करने के लिए दूसरे सरकारी कार्यों से मुक्त किया गया था।

हालांकि, AAP ने भी स्पष्ट किया कि पंजाब में प्रक्रिया को संभालने के तरीके की प्रशंसा को दूसरे राज्यों में SIR को लेकर उसकी चिंताओं से अलग करके देखा जाना चाहिए।

क्या अनिंदिता मित्रा की तारीफ का मतलब SIR का समर्थन है?

यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू है। राजनीतिक दलों ने अधिकारी की कार्यशैली की प्रशंसा की, लेकिन कांग्रेस और AAP ने इसे SIR की व्यापक नीति के समर्थन के रूप में पेश किए जाने पर आपत्ति जताई। उनके मुताबिक, किसी अधिकारी का सवालों का जवाब देना और शिकायतों पर ध्यान देना एक बात है, जबकि प्रक्रिया के सभी नियमों या देशभर में उसके क्रियान्वयन से सहमत होना दूसरी बात है।

इसलिए पंजाब में अनिंदिता मित्रा को मिली सराहना को चुनाव आयोग के प्रति विपक्ष के रुख में पूर्ण बदलाव मानना सही नहीं होगा। यह प्रतिक्रिया मुख्य रूप से राज्य में संवाद, जवाबदेही और शिकायतों को संभालने के तरीके से जुड़ी है।

अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि सूची में दर्ज विवरण कितने सटीक हैं और मतदाताओं को नाम जोड़ने, सुधारने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का कितना प्रभावी लाभ मिलता है। पंजाब का यह अनुभव चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और राजनीतिक दलों के साथ नियमित संवाद के महत्व को भी रेखांकित करता है।



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