नीरज यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत: एशियन पैरा गेम्स में जीते थे 3 गोल्ड, डोपिंग निलंबन के कारण नहीं ले सके हिस्सा
तीन एशियन पैरा गेम्स गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय पैरा एथलीट नीरज यादव की दिल्ली में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। डोपिंग मामले में निलंबित चल रहे नीरज हाल ही में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाए थे। उनकी मौत के कारणों की जांच जारी है।
एशियन पैरा गेम्स में भारत का नाम रोशन करने वाले पैरा एथलीट नीरज यादव की दिल्ली में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। 42 वर्षीय नीरज ने अपने खेल करियर में तीन एशियन पैरा गेम्स गोल्ड मेडल जीतकर देश को गौरवान्वित किया था। उनकी मौत की खबर से भारतीय पैरा-एथलेटिक्स जगत में शोक का माहौल है। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में उनकी मौत को आत्महत्या से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन घटना की परिस्थितियों और मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नीरज यादव मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 की रात दिल्ली स्थित अपने फ्लैट में मृत पाए गए। बुधवार को दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल में उनका पोस्टमार्टम कराया गया। मामले की जांच जारी है और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटना से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
डोपिंग निलंबन के कारण एशियन पैरा गेम्स से रहे बाहर
नीरज यादव हाल ही में जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाए थे। वह डोपिंग से जुड़े मामले में निलंबित चल रहे थे। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में उनकी भागीदारी नहीं हो सकी।
भारत के मुख्य पैरा-एथलेटिक्स कोच एस. सत्यनारायण के हवाले से आई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि नीरज की मौत की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाने से खिलाड़ी पर मानसिक दबाव पड़ा हो सकता है। हालांकि, नीरज की वास्तविक मानसिक स्थिति के बारे में कोई निश्चित जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए उनके निलंबन और मौत के बीच सीधा संबंध मानना उचित नहीं होगा।
कोच के मुताबिक, एशियन पैरा गेम्स में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी पुरस्कार और रोजगार के अवसर मिलने की संभावना रहती है। नीरज भी इन खेलों में हिस्सा लेने के लिए उत्साहित रहे होंगे। लेकिन निलंबन के चलते वह प्रतियोगिता से बाहर रहे। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस घटनाक्रम का उन पर कितना असर पड़ा था।
सात साल की उम्र में हुआ लकवा, फिर भी नहीं छोड़ा खेल
नीरज यादव की जिंदगी संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल रही। मूल रूप से उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाले नीरज को सात साल की उम्र में पोस्ट-पोलियो रेसिडुअल पैरालिसिस की समस्या हुई थी। इस शारीरिक चुनौती के बावजूद उन्होंने खेलों में आगे बढ़ने का सपना नहीं छोड़ा।
एथलेटिक्स में अपनी पहचान बनाने से पहले उन्होंने वर्ष 2005 से 2012 तक व्हीलचेयर टेनिस में भाग लिया। इसके बाद उनका रुझान पैरा-एथलेटिक्स की ओर बढ़ा। वर्ष 2015 में आयोजित दिल्ली स्टेट एथलेटिक्स मीट उनके करियर का अहम पड़ाव साबित हुई। इस प्रतियोगिता में उन्होंने शॉट पुट, जैवलिन थ्रो और डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक हासिल किए।
इन उपलब्धियों ने उन्हें आगे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया। लगातार मेहनत और प्रदर्शन के दम पर वह भारतीय पैरा-एथलेटिक्स के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हो गए।
2018 में पहला एशियन गोल्ड, 2023 में दो और स्वर्ण पदक
नीरज यादव ने वर्ष 2018 में इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया था। पुरुषों की एफ55 जैवलिन थ्रो स्पर्धा में उन्होंने 29.84 मीटर की दूरी दर्ज कर एशियाई रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता। इस प्रदर्शन से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
इसके बाद वर्ष 2023 में चीन के हांगझू में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में नीरज ने जैवलिन थ्रो और डिस्कस थ्रो में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इस तरह उनके एशियन पैरा गेम्स गोल्ड मेडल की कुल संख्या तीन हो गई। उनकी उपलब्धियां इस बात का प्रमाण थीं कि शारीरिक चुनौतियां किसी खिलाड़ी के हौसले को रोक नहीं सकतीं।
डोपिंग मामले ने करियर पर डाला असर
नीरज के खेल करियर को अक्टूबर 2023 में सामने आए डोपिंग मामले से बड़ा झटका लगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु में एक प्रतियोगिता के दौरान लिए गए उनके नमूने में स्टैनोजोलोल नामक प्रतिबंधित एनाबॉलिक स्टेरॉयड पाए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) ने उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया।
बताया गया है कि नीरज ने एंटी-डोपिंग अनुशासनात्मक प्रक्रिया के तहत अपने नमूने का डीएनए परीक्षण कराने की मांग भी की थी। इस मामले की प्रक्रिया और निलंबन की स्थिति ने उनके खेल करियर को प्रभावित किया।
नीरज यादव की मौत से भारतीय पैरा-खेल जगत ने एक ऐसे खिलाड़ी को खो दिया, जिसने बचपन की शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व किया और कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। फिलहाल उनकी मौत के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष का इंतजार है। जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही घटना से जुड़े सभी पहलुओं पर स्पष्टता मिल सकेगी।