लखनऊ: कांग्रेस कार्यालय के बाहर बीजेपी महिला मोर्चा का प्रदर्शन, जेएनयू प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर विरोध
लखनऊ में बीजेपी महिला मोर्चा ने कांग्रेस कार्यालय के बाहर जेएनयू प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय ने आंतरिक समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) महिला मोर्चा ने शनिवार को कांग्रेस कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजाम और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के एक प्रोफेसर से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर किया गया।
बीजेपी महिला मोर्चा ने इन आरोपों के मुद्दे पर देशव्यापी अभियान के तहत विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। इस अभियान के जरिए संगठन राज्य और जिला स्तर पर प्रदर्शन कर मामले को उठाने तथा अपनी मांगों को सामने रखने की तैयारी में है।
जेएनयू के 11 छात्राओं ने लगाए थे यौन उत्पीड़न के आरोप
जेएनयू के प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम पर विश्वविद्यालय की 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। वह विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स से जुड़े थे। विश्वविद्यालय की ओर से 9 अक्टूबर को जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, आंतरिक समिति की जांच और रिपोर्ट पर विचार करने के बाद प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
आदेश में कहा गया कि विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने जांच के निष्कर्षों के आधार पर उनके खिलाफ कठोर दंड की सिफारिश की थी। विश्वविद्यालय ने उपलब्ध तथ्यों और निर्धारित प्रक्रिया पर विचार करने के बाद बर्खास्तगी का फैसला लिया।
आंतरिक समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई
जेएनयू के आदेश के अनुसार, आंतरिक समिति ने मामले की जांच की और विश्वविद्यालय के सेवा नियमों के तहत कठोर दंड की सिफारिश की। आदेश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के संदर्भ संख्या F.91-1/2013 (TFGS)/10(1) और केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के नियम 11(ix) का उल्लेख किया गया।
यह घटनाक्रम छात्राओं की उन शिकायतों के बाद सामने आया, जिनमें उन्होंने आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं की। छात्राओं के अनुसार, उन्होंने मई 2026 में कुलपति को शिकायत सौंपी थी।
दिल्ली महिला आयोग ने भी लिया था मामले का संज्ञान
इस मामले में 16 सितंबर को दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो का स्वतः संज्ञान लिया था। आयोग ने जेएनयू प्रशासन से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी थी।
आयोग ने विश्वविद्यालय से यह जानकारी देने को कहा था कि क्या शिकायत आंतरिक शिकायत समिति को भेजी गई थी और इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई। इसके साथ ही विश्वविद्यालय को तीन दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। आयोग ने इस बात पर जोर दिया था कि यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों का निपटारा कानून के अनुरूप निष्पक्षता, तत्परता और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए।
आरोपों को लेकर राजनीतिक टकराव तेज
कांग्रेस कार्यालय के बाहर बीजेपी महिला मोर्चा का प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। बीजेपी महिला मोर्चा ने देशभर में समन्वित प्रदर्शन के जरिए इस मुद्दे को उठाने की योजना बनाई है। हालांकि, लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान उठाई गई विशिष्ट मांगों और कांग्रेस की ओर से इस विरोध पर दी गई प्रतिक्रिया का विवरण उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।