UP MLC Election 2026: 11 सीटों पर चुनाव से पहले सपा के सामने नेता प्रतिपक्ष बचाने की चुनौती, NDA के लिए ताकत दिखाने का मौका

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By  Laxman September 23rd 2026 12:20 PM -- Updated: September 23rd 2026 11:52 AM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों के लिए होने वाला चुनाव राजनीतिक दलों के लिए अहम परीक्षा बन गया है। 23 अक्टूबर 2026 को पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है।

इन चुनावों का असर सिर्फ विधान परिषद की खाली हो रही सीटों तक सीमित नहीं है। खास तौर पर समाजवादी पार्टी के लिए परिषद में अपनी मौजूदा संख्या और नेता प्रतिपक्ष के पद को बनाए रखना एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। वहीं भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के पास परिषद में पहले से स्पष्ट बहुमत है, इसलिए उसके सामने तत्काल कोई पद बचाने की चुनौती नहीं है, लेकिन ये चुनाव शिक्षित और शिक्षक मतदाताओं के बीच उसके संगठन और गठबंधन की स्थिति को परखने का अवसर देंगे।

11 सीटों पर कहां-कहां होगा मुकाबला?

इस बार विधान परिषद की पांच Graduates Constituencies और छह Teachers Constituencies में चुनाव होना है।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी शामिल हैं। वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद सीटें हैं। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है।

यह चुनाव सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होता है। इसमें केवल संबंधित स्नातक या शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज मतदाता ही मतदान कर सकते हैं।

सपा के सामने नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी का सवाल

100 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधान परिषद में फिलहाल समाजवादी पार्टी के 10 सदस्य हैं। यही संख्या नेता प्रतिपक्ष का पद बनाए रखने के लिए जरूरी 10 प्रतिशत के स्तर पर है। इसलिए मौजूदा चुनाव में सपा की सीटों में कमी आती है तो इसका असर उसके उच्च सदन में आधिकारिक विपक्षी दर्जे पर पड़ सकता है।

सपा के मौजूदा 10 MLC में सात विधायक-निर्वाचित सदस्य हैं, जबकि तीन उन्हीं निर्वाचन क्षेत्रों से हैं जहां इस बार चुनाव हो रहा है। इनमें इलाहाबाद-झांसी स्नातक से मान सिंह यादव, वाराणसी स्नातक से आशुतोष सिन्हा और वाराणसी शिक्षक से लाल बिहारी यादव शामिल हैं। पार्टी ने तीनों को दोबारा मैदान में उतारा है।

इसके अलावा सपा ने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से कमलेश यादव और लखनऊ स्नातक सीट से पूर्व MLC कांति सिंह को उम्मीदवार बनाया है।

इस तरह इन चुनावों में सपा के लिए मुकाबला केवल नए MLC चुनने तक सीमित नहीं है। परिणाम यह तय करने में भी भूमिका निभा सकते हैं कि पार्टी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रख पाती है या नहीं।

NDA के पास 83 सदस्य, फिर भी चुनाव अहम

दूसरी तरफ भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के पास 100 सदस्यीय विधान परिषद में फिलहाल 83 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के 79 सदस्य हैं, जबकि अपना दल (एस), RLD, सुभासपा और निषाद पार्टी के पास एक-एक सदस्य है।

इस संख्याबल के कारण NDA के सामने सपा जैसी संस्थागत चुनौती नहीं है। लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे उसके लिए संगठनात्मक प्रदर्शन का संकेत दे सकते हैं।

इन सीटों पर मतदान आम विधानसभा चुनाव की तरह व्यापक मतदाता आधार पर नहीं होता। इसलिए उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, स्थानीय संगठन, शिक्षक और स्नातक मतदाताओं से संपर्क तथा गठबंधन का समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

2020 के नतीजे भी रहेंगे नजर में

इन 11 सीटों पर पिछला चुनाव 2020 में हुआ था। उस समय भाजपा ने छह सीटें, समाजवादी पार्टी ने तीन सीटें जीती थीं, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार सफल रहे थे। इस बार के मुकाबले में पिछले नतीजों को पार्टियों की रणनीति के लिए एक संदर्भ के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि 2026 की परिस्थितियां 2020 से अलग हैं। अब राज्य में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है और राजनीतिक दल संगठनात्मक स्तर पर भी अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं।

INDIA गठबंधन की एकजुटता भी होगी परखी

इन चुनावों में विपक्षी दलों के बीच तालमेल भी महत्वपूर्ण रहेगा। विधान परिषद में फिलहाल कांग्रेस का कोई सदस्य नहीं है। इसके बावजूद कांग्रेस ने चुनाव में सक्रिय होने के संकेत दिए हैं और पांच निर्वाचन क्षेत्रों में अपने संयोजकों की नियुक्ति की है।

ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सपा और कांग्रेस समेत विपक्षी दल किस तरह उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति को लेकर समन्वय करते हैं। अलग-अलग उम्मीदवार मैदान में रहने की स्थिति में विपक्षी मतों के विभाजन का असर भी चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।

2027 से पहले चुनावी माहौल का एक और संकेत

उत्तर प्रदेश में अक्टूबर के दौरान राज्यसभा और विधान परिषद दोनों के चुनाव होने हैं। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है, जबकि विधान परिषद की 11 स्नातक-शिक्षक सीटों पर 23 अक्टूबर को वोटिंग होगी।

इस वजह से अक्टूबर का राजनीतिक कार्यक्रम 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। हालांकि MLC चुनावों के नतीजों को सीधे विधानसभा चुनाव का अनुमान मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि दोनों चुनावों की मतदाता संरचना और निर्वाचन प्रक्रिया अलग है।

फिलहाल सबसे बड़ा संस्थागत सवाल सपा के लिए विधान परिषद में अपनी मौजूदा संख्या बनाए रखने का है, जबकि NDA के लिए चुनौती अपने मौजूदा प्रभाव को बनाए रखने और शिक्षक-स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में संगठनात्मक प्रदर्शन दिखाने की है।

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