उत्तर प्रदेश अनलिमिटेड पोटेंशियल का स्टेट, प्रगति और गति से दुनिया को दे रहा जवाब: सीएम योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश का मतलब पूछने वालों को अब प्रदेश की प्रगति और विकास की गति से जवाब मिल रहा है।
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश का मतलब पूछने वालों को अब प्रदेश की प्रगति और विकास की गति से जवाब मिल रहा है। उत्तर प्रदेश ‘अनलिमिटेड पोटेंशियल’ यानी असीमित संभावनाओं वाला प्रदेश है, जो निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, उद्योग, रोजगार और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक समय निवेशक लखनऊ आने से इनकार कर देते थे, लेकिन नए उत्तर प्रदेश में ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें ₹15 लाख करोड़ की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव इसके लिए तैयार हैं। प्रदेश में 36 सेक्टोरल पॉलिसी हैं और सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को जीसीसी, आधुनिक तकनीक और उच्च कौशल वाले रोजगार का प्रमुख केंद्र बनाना है।
मुख्यमंत्री सोमवार को राजधानी में जीसीसी इनोवेशन समिट 2026 को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष पहले लखनऊ में जीसीसी समिट की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। वर्ष 2015-16 में उत्तर प्रदेश में इन्वेस्टर समिट होना था, लेकिन एक भी इंडस्ट्री लीडर लखनऊ आने को तैयार नहीं हुआ। निवेशकों ने शहर की खतरनाक छवि का हवाला देकर आने से इनकार कर दिया। नतीजतन, उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए समिट दिल्ली के पांच सितारा होटल में आयोजित करना पड़ा। उस समय प्रदेश की पहचान उपद्रव, अराजकता, माफिया के वर्चस्व और पॉलिसी पैरालिसिस से थी। जब व्यक्ति सुरक्षित नहीं था तो पूंजी कैसे सुरक्षित होती? इसी अकर्मण्यता और अव्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को बीमारू बना दिया था। युवाओं के लिए नौकरी नहीं थी, व्यापारियों को सुरक्षा नहीं थी, सूर्यास्त के बाद महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं और बेटियां स्कूल नहीं जा सकती थीं। मुख्यमंत्री ने तत्कालीन सरकार के कुछ एमओयू पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें देखकर लोग हंसेंगे। उस समय की सरकार को अंग्रेजी के ‘OR’ और हिंदी के ‘और’ में भी अंतर नहीं महसूस होता था।
20 हजार करोड़ नहीं, दो लाख करोड़ का लक्ष्य:
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 में सरकार बनने के बाद औद्योगिक विकास मंत्री और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त इन्वेस्टर समिट की तैयारी को लेकर उनसे मिले। जब अधिकारियों ने समिट का नाम ग्लोबल इन्वेस्टर समिट और निवेश लक्ष्य ₹20 हजार करोड़ बताया तो उन्होंने पूछा कि लक्ष्य इतना कम है तो नाम ग्लोबल क्यों रखा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लखनऊ इन्वेस्टर समिट नाम रखिए या लक्ष्य को ग्लोबल स्तर का बनाइए। तब अधिकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कौन निवेश करेगा। मुख्यमंत्री ने उनसे पहले तैयारी करने, पॉलिसी व लैंड बैंक बनाने को कहा। उन्होंने लक्ष्य की निचली सीमा ₹2 लाख करोड़ रखने का निर्देश दिया और रोड शो की तैयारी करने को कहा। पहले इन्वेस्टर समिट में ₹4.65 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। आज प्रदेश में ₹50 लाख करोड़ से अधिक के प्रस्ताव हैं, ₹15 लाख करोड़ की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं तैयार हैं।
10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी, बजट और पूंजीगत व्यय में वृद्धि:
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सरकारी नौकरी का विज्ञापन जारी होते ही अदालत से स्थगन आदेश आ जाता था, लेकिन पिछले साढ़े नौ वर्षों में 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई। भारत सरकार की योजनाओं को लागू करने में उत्तर प्रदेश आज अग्रणी राज्यों में है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश की जीएसडीपी, प्रति व्यक्ति आय, बजट और महिला कार्यबल की भागीदारी को तीन गुना करने में सफलता मिली है। उत्तर प्रदेश अब बीमारू नहीं, बल्कि रेवेन्यू सरप्लस स्टेट है। देश में किसी राज्य का सबसे बड़ा बजट उत्तर प्रदेश का है और इसमें दो लाख करोड़ रुपये से अधिक पूंजीगत व्यय इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले सड़क, बिजली, औद्योगिक संस्कृति और आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव था। उन्होंने अपने आश्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले बिजली के लिए हर महीने डीजल पर पांच लाख रुपये खर्च करने पड़ते थे। अब 24 घंटे बिजली मिलती है और करीब दो लाख रुपये का बिल आता है, जिससे तीन लाख रुपये की बचत होती है। उन्होंने इसे प्रदेश के सभी 75 जिलों में आए बदलाव का उदाहरण बताया।
एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60 प्रतिशत यूपी में, पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट:
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। प्रदेश के पास देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, सबसे अधिक शहरों में मेट्रो संचालन और 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक है। वर्ष 2017 में केवल लखनऊ और वाराणसी के दो अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पूरी तरह क्रियाशील थे, जबकि आज पांच अंतरराष्ट्रीय और 17 घरेलू एयरपोर्ट क्रियाशील हैं। प्रदेश में इनलैंड वाटरवे, देश की पहली रैपिड रेल और आठ हजार से अधिक उच्च शिक्षा संस्थान भी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ‘फ्रेजाइल फाइव’ से दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में पहुंचा है और उत्तर प्रदेश भी देश के पिछड़े तीन राज्यों से शीर्ष तीन राज्यों में शामिल हुआ है।
निवेशकों को सिंगल विंडो क्लीयरेंस, इंसेंटिव सीधे खाते में:
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेशकों से किए गए वादों को पूरा करने की व्यवस्था विकसित हुई है। अब उद्योगपतियों को बुलाकर बताया जाता है कि उनका इंसेंटिव तैयार है और राशि खाते में भेज दी गई है। पहले निवेशकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब सिंगल विंडो क्लीयरेंस की सुविधा उपलब्ध है। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, सेमीकंडक्टर मिशन और एआई मिशन को जिस तेजी से आगे बढ़ाया गया, वह 2014 से पहले अकल्पनीय था। भारत दुनिया की जीसीसी कैपिटल के रूप में स्थापित हुआ है और उनके आकलन के अनुसार हर दूसरी जीसीसी कंपनी भारत में काम कर रही है।
दो लाख STEM ग्रेजुएट, 25 हजार स्टार्टअप और आधुनिक तकनीक:
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में इंजीनियरिंग, तकनीकी और औद्योगिक शिक्षा का विस्तार हुआ है। प्रदेश प्रतिवर्ष दो लाख STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथमेटिक्स) ग्रेजुएट तैयार कर रहा है और युवाओं को कौशल, नवाचार तथा तकनीक से जोड़कर इंडस्ट्री रेडी और फ्यूचर टेक्नोलॉजी रेडी वर्कफोर्स बनाया जा रहा है। एआई, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, 3डी प्रिंटिंग, रोबोटिक्स, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और ग्रीन हाइड्रोजन में रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तैयार किए जा रहे हैं। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क का भी विस्तार हो रहा है।
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल 120 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या आज बढ़कर 25 हजार हो गई है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधा कि अंधविश्वास के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री इन क्षेत्रों में नहीं जाते थे। उन्हें ईश्वर में विश्वास कम, कुर्सी पर ज्यादा विश्वास था। आज नोएडा और ग्रेटर नोएडा आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के हब बने हैं।
जेवर में औद्योगिक विकास, सेमीकंडक्टर यूनिट और कई पार्क:
मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में 25 हजार हेक्टेयर का लैंड बैंक है। वर्ष 2014-15 में गोलीकांड और अपराध के लिए चर्चित रहे इस क्षेत्र में अब औद्योगिक विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नामकरण ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा, जेवर’ के रूप में किया गया है, क्योंकि इसके पीछे प्रधानमंत्री मोदी जी का विजन था। 2017 से पहले इस क्षेत्र में सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही लोगों का बाहर निकलना संभव था और विकास ही ऐसी अव्यवस्था से लोगों को बाहर निकाल सकता था। आज यीडा क्षेत्र में फिल्म सिटी, टॉय पार्क, अपैरल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, एमएसएमई पार्क, डेटा सेंटर पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क और लॉजिस्टिक हब विकसित हो रहे हैं। उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर चिप बनाने वाली यूनिट का काम भी शुरू हो चुका है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तर प्रदेश अचीवर स्टेट बना है और डीरेगुलेशन 1.0 रैंकिंग में प्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया है।
‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ से रक्षा उत्पादन केंद्र तक:
मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। पहले इन्वेस्टर समिट में प्रधानमंत्री मोदी जी ने इसकी घोषणा की थी। 2017 से पहले प्रदेश में ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ की स्थिति थी और उत्पादन क्षमता कट्टा तथा बम बनाने तक सीमित थी। आज वही उत्तर प्रदेश रक्षा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन रहा है। ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल लॉन्च करने के तीन दिन बाद उसी मिसाइल को पाकिस्तान के अंदर दागा गया। कोविड कालखंड में डीआरडीओ ने ब्रह्मोस परियोजना के लिए प्रस्ताव रखा तो उत्तर प्रदेश ने देश की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए मुफ्त में जमीन देने का निर्णय लिया। उन्होंने डीआरडीओ से प्रदेश के संस्थानों में कैंपस सेलेक्शन की शर्त भी रखी, जिसे स्वीकार किया गया और एकेटीयू के माध्यम से चयन किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्घाटन के समय उन्होंने 500 युवा इंजीनियरों को देखा, जिन्होंने आईटीआई, पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग संस्थानों से पढ़ाई की थी और अब लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण से जुड़े हैं। रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में प्रदेश को ₹35 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इसके साथ ही 27 इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।
ओडीओपी से एमएसएमई को नई पहचान, 96 लाख इकाइयों में 3.25 करोड़ से अधिक लोग कार्यरत:
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश का एमएसएमई क्षेत्र लगभग मृतप्राय हो गया था। सरकार ने ‘एक जिला, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को ब्रांड पहचान दी और कारीगरों तथा छोटे कारोबारियों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया। आज प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जिनमें तीन करोड़ 25 लाख से अधिक लोग काम कर रहे हैं। कोविड कालखंड में लौट रहे श्रमिकों और कारीगरों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनसे पूछा गया कि इन लोगों को वापस क्यों लाया जा रहा है और इनके लिए क्या किया जाएगा, तो उन्होंने उत्तर दिया कि ये यूपी के लोग हैं, यह उनका अधिकार है, उनको लाना मेरा दायित्व। उत्तर प्रदेश के लोगों को अपने प्रदेश में सम्मान और अवसर मिलना चाहिए।
आदिकाल से ज्ञान-विज्ञान की धरती रहा है उत्तर प्रदेश:
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति और परमात्मा की कृपा इस धरती पर आदिकाल से रही है। मां गंगा और मां यमुना की धरती उत्तर प्रदेश में प्रभु श्रीराम ने जन्म लेकर रामराज्य की अवधारणा साकार की और श्रीकृष्ण की पावन जन्मभूमि भी यहीं है। लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में लगभग तीन हजार वर्ष पहले 88 हजार विद्वानों और ऋषि-मुनियों ने वैदिक ज्ञान की धरोहर को लिपिबद्ध किया, जो आज पुराणों के रूप में मौजूद है। करीब पांच हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण का वाचन भी इसी धरती पर आत्मा, जीवन के उद्देश्य और जन्म-मृत्यु के रहस्य को समझने के लिए हुआ था।
उन्होंने कहा कि प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक-त्र्यंबकेश्वर और उज्जैन में होने वाला कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ज्ञान-विज्ञान, इनोवेशन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और विचारों के आदान-प्रदान का भी केंद्र रहा है। प्रयागराज महाकुंभ की भूमि और काशी ज्ञान की धरोहर के रूप में विश्वविख्यात रही है। उसी परंपरा को आज जीसीसी के आधुनिक स्वरूप में आगे बढ़ाने का प्रयास है। भारतीय ज्ञान परंपरा के सूत्र “आनो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” का उल्लेख करते हुए सीएम ने कहा कि ज्ञान के लिए सभी दिशाओं से रास्ते खुले रखने चाहिए। भारत ने कभी यह दावा नहीं किया कि केवल वही सत्य है और बाकी सब असत्य। तक्षशिला, नालंदा, काशी, नवद्वीप, अवंतिका यानी उज्जैन और कांचीपुरम जैसे केंद्रों ने ज्ञान की परंपरा को सम्मान दिया। प्राचीन भारत में उत्तर भारत के विद्वान और राजा काशी, पूर्वी भारत के नवद्वीप, मध्य भारत के उज्जैन और दक्षिण भारत के विद्वान कांचीपुरम से मान्यता प्राप्त करते थे। मुख्यमंत्री ने जीसीसी समिट में शामिल उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को इस आधुनिक ज्ञान व्यवस्था का फिर से प्रमुख केंद्र बनाना है।
इस अवसर पर औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार, प्रमुख सचिव आईटी/इलेक्ट्रॉनिक्स आलोक कुमार, आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मनिंद्र अग्रवाल सहित अन्य इंडस्ट्री लीडर्स उपस्थित रहे।