योगी सरकार के जीरो पॉवर्टी अभियान को मिली रफ्तार, 4.25 लाख परिवारों तक पहुंचीं सरकारी योजनाएं
प्रदेश सरकार का अनुमान है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लंबित लक्ष्य पूरे होने के बाद यह उपलब्धि लगभग 30 प्रतिशत और बढ़ जाएगी।
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी 'जीरो पॉवर्टी उत्तर प्रदेश अभियान' के तहत प्रदेश के गरीब और वंचित परिवारों को सरकारी योजनाओं से शत-प्रतिशत जोड़ने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। अभियान की समीक्षा में सामने आए आंकड़ों के अनुसार अब तक 4,25,101 परिवारों (करीब 34 प्रतिशत) को सभी पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ मिल चुका है। प्रदेश सरकार का अनुमान है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लंबित लक्ष्य पूरे होने के बाद यह उपलब्धि लगभग 30 प्रतिशत और बढ़ जाएगी।
अभियान के पहले चरण में आठ प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है। इनमें राशन कार्ड, निराश्रित महिला पेंशन, श्रमिक (बीओसीडब्ल्यू) कार्ड, आयुष्मान भारत, दिव्यांग पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजनाएं शामिल हैं। समीक्षा के अनुसार राशन कार्ड योजना में 97 प्रतिशत, निराश्रित महिला पेंशन में 98 प्रतिशत, श्रमिक कार्ड में 95 प्रतिशत और आयुष्मान भारत योजना में 92 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है। वहीं किसान सम्मान निधि और प्रधानमंत्री आवास योजना में अभी और कार्य किया जाना शेष है।
दूसरे चरण में शौचालय सहायता योजना, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), स्कूल नामांकन, हर घर नल से जल, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना तथा विद्युत संयोजन जैसी योजनाओं को जोड़ा गया है। इनमें शौचालय सहायता, स्वयं सहायता समूह और स्कूल नामांकन में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है, जबकि अन्य योजनाओं में भी तेजी से कार्य जारी है।
हाथरस पहले, उन्नाव सबसे पीछे:
योजना संतृप्तिकरण की जिला रैंकिंग में हाथरस 78 प्रतिशत उपलब्धि के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। इसके बाद गाजियाबाद, शामली, मुजफ्फरनगर, बदायूं, अमरोहा, महाराजगंज, मेरठ, बागपत और गोरखपुर शीर्ष दस जिलों में शामिल हैं। वहीं आगरा, मऊ, प्रयागराज, बांदा, बलिया, फतेहपुर, फिरोजाबाद, श्रावस्ती, बहराइच और उन्नाव सबसे कम प्रदर्शन करने वाले जिलों में रहे, जिनमें उन्नाव अंतिम स्थान पर है।
युवाओं को कौशल और रोजगार से जोड़ने पर जोर:
अभियान के तहत युवाओं के कौशल विकास और रोजगार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 19 लाख युवाओं की पहचान की गई है। अब तक 43,647 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 1,258 युवा वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा 1,14,715 युवाओं को विभिन्न स्किलिंग कार्यक्रमों के लिए चिन्हित किया गया है।
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) के माध्यम से 2,691 और आईटीआई के जरिए 888 प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा चुका है। वहीं मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) जैसी योजनाओं के माध्यम से हजारों युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सामाजिक संगठनों की भी बढ़ी भागीदारी:
जीरो पॉवर्टी अभियान में सामाजिक संगठनों और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) संस्थाओं की भागीदारी भी बढ़ाई गई है। विभिन्न संस्थाओं के साथ हुए समझौतों के तहत आजीविका विकास, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएं, नेत्र परीक्षण, मोतियाबिंद ऑपरेशन, टीबी उन्मूलन, पोषण किट, स्कूल किट और दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
प्रदेश सरकार का लक्ष्य सरकारी योजनाओं और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से प्रत्येक पात्र परिवार को गरीबी से बाहर निकालकर आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें स्थायी आजीविका से जोड़ना है।