उत्तराखंड में 12 घंटे बाद इंटरनेट चालू, गुरुद्वारा विवाद से बढ़ा था तनाव
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने सोमवार को लोगों से अपील की कि वे गुरुद्वारे पर कब्जे या किसी को बंधक बनाए जाने जैसी अफवाहों पर ध्यान न दें। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि गुरुद्वारे के भीतर विवाद हुआ था। विशाल मिश्रा ने कहा, “नगरासू गुरुद्वारे में निहंग सिखों, गुरुद्वारा प्रबंधन और वहां रहने वाले सिख सेवादारों के बीच विवाद हुआ था।
देहरादून, उत्तराखंड: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारा में हुए कथित विवाद के बाद जिला प्रशासन ने शनिवार को इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी थीं। लगभग 12 घंटे बाद रविवार को इंटरनेट सेवाएं फिर से बहाल कर दी गईं। उत्तराखंड राज्य के गठन के 26 वर्षों में यह केवल तीसरा मौका है जब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद करनी पड़ीं।
राज्य गठन के बाद शुरुआती डेढ़ दशक तक ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी थी, जिसमें इंटरनेट बंद करने की आवश्यकता महसूस हुई हो। इससे पहले भी कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते गृह विभाग की सिफारिश पर राज्य के कुछ इलाकों में अस्थायी रूप से इंटरनेट सेवाएं बंद की गई थीं। फरवरी 2024 में हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा के बाद भी बड़े पैमाने पर इंटरनेट शटडाउन लागू किया गया था।
गुरुद्वारा परिसर में तोड़फोड़, पुलिसकर्मियों पर पथराव
जानकारी के अनुसार, तनाव की शुरुआत 20 जून को हुई, जब कुछ लोग नगरासू गुरुद्वारा पहुंचे और शुरुआत से ही विवाद तथा स्वयंसेवकों के साथ दुर्व्यवहार करने लगे। गुरुद्वारे के ग्रंथी बाबा बेअंत सिंह के अनुसार, विवाद के बावजूद गुरुद्वारा प्रबंधन ने उन्हें रात में ठहरने और भोजन की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई। बाबा बेअंत सिंह ने आरोप लगाया कि गुरुद्वारे में शरण और भोजन पाने वाले कुछ लोग बाद में हिंसक हो गए। उन्होंने स्वयंसेवकों के साथ मारपीट की, गुरुद्वारा परिसर में तोड़फोड़ की और ऊपरी मंजिलों से पुलिसकर्मियों तथा स्थानीय लोगों पर पथराव किया।
गुरुद्वारा प्रबंधन ने शांतिपूर्वक मनाने का किया प्रयास
बाबा बेअंत सिंह ने कहा, “वे परसों यहां आए और झगड़ा शुरू कर दिया। उन्होंने स्वयंसेवकों के साथ मारपीट और गाली-गलौज की। इसके बावजूद हमने उन्हें रात भर रुकने दिया और भोजन भी कराया। अगली सुबह भी उन्होंने विवाद किया, लेकिन हमने उन्हें समझाने और शांतिपूर्वक भेजने की कोशिश की।” उन्होंने बताया कि 21 जून की सुबह स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई, जब संबंधित समूह का स्वयंसेवकों के साथ फिर विवाद हुआ। गुरुद्वारा प्रबंधन ने उन्हें शांतिपूर्वक जाने के लिए मनाने का प्रयास किया।
गुरुद्वारे पर कब्जे और किसी को बंधक बनाने की बात अफ़वाह है
बाबा बेअंत सिंह ने आगे आरोप लगाया कि उक्त लोगों ने गुरुद्वारा परिसर की जलापूर्ति काट दी, भवन पर लगे सभी सोलर पैनल क्षतिग्रस्त कर दिए और रातभर संपत्ति में तोड़फोड़ करते रहे। वहीं, रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने सोमवार को लोगों से अपील की कि वे गुरुद्वारे पर कब्जे या किसी को बंधक बनाए जाने जैसी अफवाहों पर ध्यान न दें। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि गुरुद्वारे के भीतर विवाद हुआ था।
फिलहाल स्थिति सामान्य है, अरदास, लंगर और प्रार्थना सामान्य
विशाल मिश्रा ने कहा, “नगरासू गुरुद्वारे में निहंग सिखों, गुरुद्वारा प्रबंधन और वहां रहने वाले सिख सेवादारों के बीच विवाद हुआ था। फिलहाल गुरुद्वारे में अरदास, लंगर और प्रार्थना पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रही हैं। लोगों की आवाजाही भी सामान्य है और किसी को कोई परेशानी नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “गुरुद्वारे पर कब्जा होने, किसी को बंधक बनाए जाने या हिंसा होने जैसी अफवाहों पर विश्वास न करें। ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। गुरुद्वारा प्रबंधन समिति पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में काम कर रही है और किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है।”