आधुनिक युद्धों में ड्रोन की भूमिका बेहद अहम: पूर्व सेना प्रमुख

By  Preeti Kamal June 6th 2026 07:00 PM -- Updated: June 6th 2026 05:58 PM

कोलकाता, पश्चिम बंगाल: भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (सेवानिवृत्त) ने बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यही समय की सबसे बड़ी जरूरत है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "वैश्विक परिस्थितियां हमेशा परिवर्तनशील रही हैं। ऐसे में सबसे जरूरी है कि हम इन बदलावों के अनुरूप खुद को ढालें और हर स्थिति में राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।"

जनरल नरवणे ने आधुनिक युद्धों में ड्रोन और अन्य मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी) की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने भारत द्वारा हाल ही में किए गए 2 अरब डॉलर के ड्रोन खरीद समझौते को रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा, "ड्रोन केवल क्वाडकॉप्टर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सभी प्रकार के मानवरहित हवाई वाहनों ने हाल के वर्षों में हुए लगभग हर युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन अनुभवों से सीख लेते हुए भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना ने ड्रोन खरीद पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।"

ड्रोन निर्माण में देश की भूमिका की सराहना की

नरवणे ने ड्रोन निर्माण में देश की स्वदेशी कंपनियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा, "ड्रोन के उत्पादन और निर्माण में हमारी स्वदेशी कंपनियों और एमएसएमई ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसी कारण भारत बड़े पैमाने पर ड्रोन निर्माण करने में सक्षम हो पाया है।" उन्होंने कहा कि ये प्रयास भारत की रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में अहम हैं।

रक्षा मंत्री ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई

इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने गुरुवार को डिफेंस सर्विसेज के लिए संशोधित वित्तीय शक्तियों का प्रत्यायोजन (DFPDS-2026) जारी किया, जिसका उद्देश्य रक्षा खरीद प्रक्रिया को तेज और अधिक प्रभावी बनाना है। राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों को नई वित्तीय शक्तियां मिलने पर बधाई। डीएफपीडीएस-2026 के तहत 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक राजस्व आधारित खरीद के लिए वित्तीय अधिकार बढ़ाए गए हैं।"

विदेशी उपकरण निर्माताओं पर निर्भरता कम होगी- रक्षा मंत्री

रक्षा मंत्री ने कहा कि नया ढांचा फील्ड कमांडरों को तेजी से निर्णय लेने, परिचालन तैयारियों को मजबूत करने और विदेशी उपकरण निर्माताओं पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा। साथ ही यह स्वदेशी अनुसंधान और विकास को भी प्रोत्साहित करेगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए सैन्य क्षेत्र में स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी वित्तीय शक्तियों को दोगुना कर दिया गया है। इससे रक्षा खरीद प्रक्रिया में तेजी आएगी और सशस्त्र बलों को समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

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