ट्रंप के ‘जिहादी’ वाले हमले के बावजूद अब्दुल अल-सैयद की जीत, अमेरिका को मिलेगा पहला मुस्लिम सीनेटर

अमेरिका के मिशिगन में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने रिपब्लिकन माइक रोजर्स को हराकर इतिहास रच दिया है। वह अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनने जा रहे हैं। चुनाव प्रचार में डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें ‘जिहादी’ कहकर निशाना बनाया था, लेकिन अल-सैयद ने स्वास्थ्य सेवाओं, महंगाई और आर्थिक सुधारों के मुद्दों पर जीत हासिल की।

By  Laxman November 4th 2026 02:00 PM -- Updated: November 4th 2026 01:27 PM

वॉशिंगटन/मिशिगन: अमेरिका के 2026 मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। इस चुनाव में मिशिगन की सीनेट सीट पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने रिपब्लिकन प्रत्याशी माइक रोजर्स को हराकर जीत दर्ज की है। उनकी जीत इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि वह अमेरिकी इतिहास के पहले मुस्लिम सीनेटर बनने जा रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने अल-सैयद को निशाना बनाते हुए उन्हें ‘जिहादी’ तक कहा था, लेकिन इन हमलों के बावजूद मतदाताओं ने उन्हें समर्थन दिया। 

अब्दुल अल-सैयद की जीत को केवल एक सीनेट सीट का चुनावी परिणाम नहीं माना जा रहा। यह अमेरिका में पहचान की राजनीति, मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक भागीदारी और डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील एजेंडे के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। मिशिगन की यह सीट राष्ट्रीय स्तर पर भी अहम थी, क्योंकि इसके नतीजे से सीनेट में बहुमत के समीकरण प्रभावित होने थे।


कौन हैं अब्दुल अल-सैयद?

अब्दुल अल-सैयद पेशे से डॉक्टर और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ हैं। उनका जन्म मिशिगन के डेट्रॉयट शहर में मिस्र से आए अप्रवासी माता-पिता के परिवार में हुआ। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से स्नातक की पढ़ाई की और बाद में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से सार्वजनिक स्वास्थ्य में डॉक्टरेट हासिल की। उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई भी पूरी की।

राजनीति में आने से पहले अल-सैयद ने स्वास्थ्य प्रशासन और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम किया। वह वेन काउंटी के स्वास्थ्य विभाग के निदेशक रहे। इस भूमिका में उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने और कम आय वाले परिवारों की समस्याओं पर काम किया।

उनके समर्थक उनके प्रशासनिक अनुभव को उनकी राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाना और आर्थिक असमानता कम करना उनके सार्वजनिक जीवन के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा है।

चुनाव प्रचार में ट्रंप ने बनाया मुस्लिम पहचान को मुद्दा

मिशिगन में चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन नेताओं ने अल-सैयद की नीतियों के साथ उनकी धार्मिक पहचान को भी निशाना बनाया। ट्रंप ने उन पर शरिया कानून लागू करने की मंशा रखने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने भाषणों में अल-सैयद को ‘जिहादी’ कहकर संबोधित किया और दावा किया कि उनकी जीत से अमेरिका की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

ट्रंप ने चुनावी सभाओं में कहा था कि वह अमेरिका में मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े किसी व्यक्ति को सीनेटर बनते नहीं देखना चाहते। उन्होंने अल-सैयद की जीत को लेकर आतंकवाद और हिंसा से जुड़े दावे भी किए।


अल-सैयद ने इन टिप्पणियों को अपने खिलाफ मुस्लिम-विरोधी बयानबाजी और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। उन्होंने चुनाव प्रचार में स्वास्थ्य सेवाओं, महंगाई, आर्थिक असमानता और आम लोगों की परेशानियों को प्रमुखता दी।

क्या हैं अल-सैयद के प्रमुख चुनावी वादे?

अब्दुल अल-सैयद ने अपने चुनाव अभियान में आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति सुधारने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने पर जोर दिया। उनके एजेंडे के कुछ प्रमुख मुद्दे इस प्रकार रहे:

1. चुनावी राजनीति में कॉरपोरेट प्रभाव कम करना:  अल-सैयद का मानना है कि बड़ी कंपनियों और धनाढ्य समूहों का राजनीतिक चंदे पर प्रभाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है। उन्होंने चुनावी वित्त व्यवस्था में सुधार और कॉरपोरेट प्रभाव सीमित करने की वकालत की।

2. महंगाई और मुनाफाखोरी पर नियंत्रण:  उन्होंने दवाइयों, आवास और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों को आम परिवारों की बड़ी समस्या बताया। उनका जोर बड़ी कंपनियों की मुनाफाखोरी पर नियंत्रण और आम लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने पर रहा।

3. सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा:  अल-सैयद ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’ के समर्थक रहे हैं। इस नीति का उद्देश्य अमेरिका में सभी नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर और किफायती पहुंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने इस विषय पर पुस्तक भी लिखी है। 

डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर भी आसान नहीं था रास्ता

अब्दुल अल-सैयद के लिए सीनेट तक पहुंचने का रास्ता पार्टी के अंदर से ही चुनौतीपूर्ण रहा। उन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव में सांसद हेली स्टीवंस से कड़ा मुकाबला करना पड़ा था। स्टीवंस को पार्टी के कई स्थापित नेताओं का समर्थन हासिल था, जबकि अल-सैयद ने प्रगतिशील राजनीति और आम लोगों से जुड़े मुद्दों के आधार पर अपना अभियान चलाया।

प्राइमरी जीतने के बाद भी पार्टी के भीतर मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए। चुनाव के अंतिम चरण में हेली स्टीवंस ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स का समर्थन कर दिया था। इससे अल-सैयद के सामने चुनौती और बढ़ गई।

इसके बावजूद उन्होंने अपने समर्थकों को एकजुट रखा। उनके अभियान को प्रगतिशील नेताओं और मतदाताओं का समर्थन मिला। अंततः उन्होंने आम चुनाव में रोजर्स को हराकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित कर दी।

ट्रंप की पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर भी झटका

मिशिगन में अल-सैयद की जीत ऐसे समय आई है, जब पूरे अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी को मध्यावधि चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा है। एसोसिएटेड प्रेस के अनुमानों के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल करने की दिशा में बड़ी जीत दर्ज की है। इससे ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बाकी समय में उनकी नीतियों को लागू करना पहले की तुलना में कठिन हो सकता है।

मिशिगन का नतीजा इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है। चुनाव प्रचार में अल-सैयद की धार्मिक पहचान को मुद्दा बनाने की कोशिश हुई, लेकिन उन्होंने अपने अभियान में स्वास्थ्य, महंगाई और आर्थिक असमानता जैसे सवालों को केंद्र में रखा।

उनकी जीत से अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। साथ ही यह परिणाम डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील नेताओं के लिए भी उत्साह बढ़ाने वाला है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि सीनेट में पहुंचने के बाद अल-सैयद अपने चुनावी वादों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं तथा आर्थिक सुधारों से जुड़े मुद्दों पर क्या भूमिका निभाते हैं।

© Copyright Galactic Television & Communications Pvt. Ltd. 2026. All rights reserved.