महादेव ऐप सट्टेबाजी मामले में बड़ी कार्रवाई: प्रमोटर सौरभ चंद्राकर ओमान से भारत प्रत्यर्पित, रायपुर की विशेष अदालत में होगा पेश

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले के आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत प्रत्यर्पित किया गया है। सीबीआई के अनुसार, उसे इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के बाद हिरासत में लिया गया था। उसे रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

By  Preeti Kamal November 2nd 2026 11:17 AM

नई दिल्ली: महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप (Mahadev Online Book) मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ समन्वय कर इस मामले के प्रमुख आरोपी और ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत प्रत्यर्पित करा लिया है। सीबीआई की विशेष टीम उसे मस्कट से भारत लेकर पहुंची है। अब उसे रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा।

सीबीआई की ओर से 1 नवंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सौरभ चंद्राकर को इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद भारत सरकार की एजेंसियों ने ओमान के अधिकारियों के साथ मिलकर उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी की।

दो सीबीआई और एक ईडी मामले में है आरोपी

सौरभ चंद्राकर दो सीबीआई मामलों में वांछित है, जिनमें जांच एजेंसी पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की जा चुकी है। भारत लाए जाने के बाद उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद ट्रांजिट रिमांड हासिल कर उसे रायपुर ले जाया जाएगा। सीबीआई के मुताबिक, उसे 2 नवंबर को रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा।

देशभर में फैला था अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क

सीबीआई के मुताबिक, छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों की जांच एजेंसी को सौंपी गई थी। जांच में सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में से एक था, जिसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेल और अन्य आयोजनों पर अवैध सट्टेबाजी कराई जाती थी। इसके लिए देशभर में फ्रेंचाइजी आधारित पैनल और शाखाएं बनाई गई थीं। ये शाखाएं लोगों को नेटवर्क से जोड़ती थीं और उनसे सट्टे की रकम एकत्र करती थीं।

म्यूल बैंक खातों और हवाला के जरिए विदेश भेजी जाती थी रकम

जांच एजेंसी का कहना है कि अवैध सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों के जरिए अलग-अलग खातों में भेजा जाता था। कई स्तरों पर लेनदेन के बाद इस धन को हवाला चैनलों के माध्यम से विदेश पहुंचाया जाता था। सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि सिंडिकेट के संचालन में बाधा न आए, इसके लिए अवैध कमाई का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर संरक्षण राशि के रूप में दिया जाता था।

भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत दाखिल हुए आरोपपत्र

सीबीआई ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित प्रावधानों तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किए हैं। सौरभ चंद्राकर का नाम इन आरोपपत्रों में प्रमुख आरोपियों में शामिल है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय ने इस सिंडिकेट से संबंधित भारत और विदेशों में स्थित कई संपत्तियों को भी अटैच किया है।

उम्मीद है कि महादेव ऐप से जुड़े कई खुलासे होंगे- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

महादेव ऐप अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "महादेव सट्टेबाजी ऐप मामले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को विदेश से वापस भारत लाने के लिए CBI लगातार प्रयास कर रही थी। हमें उम्मीद है कि उससे महादेव ऐप से जुड़े कई और खुलासे होंगे। इसमें यह भी पता चलेगा कि 'प्रोटेक्शन मनी' किसे मिल रही थी। सब कुछ सामने आएगा। यह एक बड़ी सफलता है। इसके लिए मैं CBI का दिल से धन्यवाद करता हूं।"

ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का जताया आभार

सीबीआई ने बताया कि सौरभ चंद्राकर के खिलाफ जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर उसका पता लगाया गया और रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। इसके बाद सीबीआई और ईडी ने ओमान को प्रत्यर्पण से जुड़े औपचारिक प्रस्ताव और आरोपी के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्य भेजे।

भारत सरकार की विभिन्न एजेंसियों, इंटरपोल के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो और ओमान के सक्षम अधिकारियों के बीच समन्वय से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी हुई। सीबीआई ने इस कार्रवाई में सहयोग के लिए ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया है।

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