नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की याद में राष्ट्रीय शोक, सरकारी कार्यालयों में आधा झुका राष्ट्रीय ध्वज...
नेपाल में 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वालों की स्मृति में सोमवार को राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों और विदेशों में नेपाली मिशनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका है। बचाव, राहत और पुनर्निर्माण अभियान लगातार जारी हैं।
काठमांडू, नेपाल: नेपाल सोमवार को 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में राष्ट्रीय शोक दिवस मना रहा है। इस दौरान देशभर के सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ विदेशों में स्थित नेपाली दूतावासों और राजनयिक मिशनों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका हुआ है। नेपाल में 3 सितंबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में बाढ़ पीड़ितों के सम्मान में राष्ट्रीय शोक मनाने का फैसला लिया गया था। इसके बाद सोमवार को देशभर में राष्ट्रीय शोक के तहत विभिन्न सरकारी संस्थानों में ध्वज आधा झुकाया गया।
26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने रसुवा जिले में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। बाढ़ से घरों के अलावा सड़कें, पुल, जलविद्युत परियोजनाएं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे बुरी तरह प्रभावित हुए। इस आपदा का असर त्रिशूली नदी के निचले इलाकों तक भी पहुंचा। नुवाकोट और धादिंग के कई हिस्सों में बाढ़ के कारण लोगों को विस्थापित होना पड़ा, जबकि परिवहन, बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हुईं।
राहत और बचाव अभियान जारी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियान के साथ राहत सामग्री पहुंचाने तथा क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को बहाल करने का काम जारी है। नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां, सरकारी विभाग, स्थानीय समुदाय और अंतरराष्ट्रीय सहयोगी इस अभियान में शामिल हैं। प्रधानमंत्री बालेंद्र (बालेन) शाह ने राष्ट्रीय शोक से एक दिन पहले सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों से हुई तबाही के बाद बचाव एवं राहत अभियानों में जुटे सुरक्षाकर्मियों के योगदान को रेखांकित किया। वहीं, काठमांडू में ब्रिटिश दूतावास ने हाल की बाढ़ में जान गंवाने वाले सभी लोगों की याद में अपना झंडा आधा झुका दिया है।
923 कैदियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया
प्रधानमंत्री शाह ने नुवाकोट के बिदुर-6 स्थित खाम्पा कैंप के केंद्रीय कारागार की घटना का भी उल्लेख किया। बाढ़ का पानी जेल के प्रशासनिक ढांचे में घुस गया था और आवासीय परिसर के निचले हिस्सों तक पहुंच गया था। शाह के मुताबिक, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल (APF) के 52 जवानों ने जेल में मौजूद सभी 923 कैदियों को परिसर के ऊंचे स्थान पर सुरक्षित पहुंचाया। इस दौरान 50 कैदियों ने क्षतिग्रस्त बाहरी संरचनाओं से भागने की कोशिश की, जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने दोबारा पकड़ लिया। इस अभियान में कई सुरक्षाकर्मी घायल भी हुए। बैरकों को नुकसान पहुंचने, सड़क संपर्क टूटने और पानी की आपूर्ति बाधित होने के बावजूद सुरक्षा बलों ने जेल में व्यवस्था बनाए रखी और जरूरी सामान की आपूर्ति जारी रखी।
13,391 लोगों को बचाया गया
प्रधानमंत्री के अनुसार, नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के संयुक्त अभियानों के तहत अब तक 13,391 लोगों को हवाई और जमीनी माध्यम से सुरक्षित निकाला गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना के 9,287 जवान अभियान संभाल रहे हैं। इनमें बत्तर और धुंचे क्षेत्रों में राहत अभियान तथा देविघाट में अस्थायी पुलों के निर्माण का काम शामिल है। नेपाल पुलिस के 7,975 जवान खोज अभियान, शवों की बरामदगी और प्रशिक्षित कुत्तों की मदद से तलाशी अभियान में जुटे हैं। वहीं, सशस्त्र पुलिस बल के 4,203 जवान 13 प्रतिक्रिया केंद्रों पर तैनात हैं और गोताखोरी, रस्सी से बचाव तथा ड्रोन निगरानी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
82 सुरक्षाकर्मी अब भी लापता
प्रधानमंत्री शाह ने बताया कि बाढ़ के बाद 82 सुरक्षाकर्मी अभी भी लापता हैं। इनमें नेपाल सेना के 45, नेपाल पुलिस के 25 और सशस्त्र पुलिस बल के 12 जवान शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने बचाव और राहत अभियान में जुटे सुरक्षा बलों, उनके परिवारों तथा विशेषज्ञों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार मैदान में तैनात सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा, कल्याण और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।