PM मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात: चीन के सहयोग के लिए जताया आभार, BRICS में वैश्विक शांति पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS Summit से इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात में भारत की अध्यक्षता के दौरान चीन के सहयोग के लिए आभार जताया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की, जबकि BRICS ने New Delhi Declaration 2026 अपनाया।

By  Preeti Kamal September 12th 2026 08:00 PM -- Updated: September 12th 2026 06:56 PM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS Summit से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान चीन की ओर से मिले समर्थन और सहयोग के लिए आभार जताया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग और BRICS को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

शी जिनपिंग का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए वह आभारी हैं।मोदी ने कहा, “मुझे आपका स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। BRICS Summit में आपकी सकारात्मक टिप्पणियों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त करता हूं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि अब दोनों देशों के पास द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का अवसर है। उन्होंने एक बार फिर चीनी राष्ट्रपति का भारत में स्वागत किया।

शी जिनपिंग बोले- भारत और चीन एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं और साझा विकास हासिल कर सकते हैं। उन्होंने दोनों देशों से BRICS सहयोग को उच्च गुणवत्ता वाले विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। शी ने BRICS देशों से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच शांति स्थापित करने में भूमिका निभाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि चीन इस उद्देश्य के लिए अन्य BRICS सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करेगा।

BRICS ने अपनाया New Delhi Declaration 2026

भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS Summit में सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से New Delhi Declaration 2026 को अपनाया। घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई गई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई। घोषणापत्र में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के अनुरूप देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात कही गई। BRICS देशों ने संवाद और कूटनीति के जरिए पश्चिम एशिया में दीर्घकालिक समझ विकसित करने और क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता की दिशा में प्रयास बढ़ाने का आह्वान किया।

वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने पर जोर

BRICS घोषणापत्र में वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। समूह ने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप सहयोग बढ़ाने की बात कही। BRICS देशों ने नागरिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में आने वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर जानबूझकर किए गए हमलों को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। घोषणापत्र में कहा गया कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी परमाणु सुरक्षा, सुरक्षा उपायों और परमाणु अप्रसार के नियमों का पालन होना चाहिए।

गाजा में युद्धविराम और मानवीय सहायता की अपील

BRICS ने संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों को लागू करने की जरूरत पर जोर दिया। समूह ने सभी पक्षों से गाजा पट्टी में युद्धविराम बनाए रखने और मानवीय सहायता की निर्बाध एवं पूर्ण पहुंच सुनिश्चित करने की अपील की। घोषणापत्र में मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में बढ़ते ध्रुवीकरण और अविश्वास पर भी चिंता जताई गई। BRICS ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा मजबूत करने के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई।

PM मोदी ने Global South को लेकर रखा बड़ा प्रस्ताव

इससे पहले 18वें BRICS Summit के Inclusive Global Governance and Strengthening सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के लिए 10 सूत्रीय प्रस्ताव रखे। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि BRICS देश इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाकर अगले BRICS Summit तक BRICS Reform Roadmap तैयार कर सकते हैं। मोदी ने कहा कि Global South को “rule-taker” से “rule-shaper” बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि Global South आज वैश्विक संकटों के केंद्र में है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में अभी भी उसकी भूमिका सीमित है।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और प्रभावी बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बहुपक्षीय व्यवस्था में अलग-अलग देशों के दृष्टिकोण का सम्मान करने और विकास, गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा तथा जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करने की अपील की।

परमाणु जोखिम और हथियार नियंत्रण पर भी चिंता

BRICS घोषणापत्र में बढ़ते परमाणु जोखिम और संघर्षों पर भी चिंता जताई गई। सदस्य देशों ने वैश्विक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए निरस्त्रीकरण, हथियार नियंत्रण और परमाणु अप्रसार की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत दोहराई। भारत की BRICS अध्यक्षता में आयोजित शिखर सम्मेलन में वैश्विक शासन सुधार, पश्चिम एशिया संकट, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, शांति और बहुपक्षीय सहयोग जैसे प्रमुख मुद्दे एजेंडे में रहे।

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