‘वसुधैव कुटुंबकम’ भारत में केवल कहा नहीं, बल्कि अपनाया जाता है: एस. जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत वसुधैव कुटुंबकम की भावना को व्यवहार में अपनाता है। उन्होंने वैश्विक सहयोग, विकास साझेदारी, मानवीय सहायता, यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों तथा संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।

By  Preeti Kamal October 25th 2026 05:30 PM -- Updated: October 25th 2026 04:24 PM

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि भारत वैश्विक सहयोग, विकास साझेदारी और मानवीय सहायता के माध्यम से ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को व्यवहार में उतार रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण केवल इस सिद्धांत का प्रचार करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद देशों की सहायता करके इसे वास्तविक रूप देना है।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की वैक्सीन सहायता, विभिन्न देशों में विकास परियोजनाओं और प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण से जुड़ी पहलों का उल्लेख किया।

कोविड महामारी में भारत ने दूसरे देशों को भी दी वैक्सीन

विदेश मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने उन देशों को भी टीके उपलब्ध कराने का निर्णय लिया, जो अन्यथा इस सुविधा से वंचित रह सकते थे। उस समय भारत में भी टीकाकरण अभियान जारी था।

जयशंकर ने कहा कि भारत की विकास साझेदारी आज 78 देशों तक फैली हुई है और इसके तहत सैकड़ों परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण संस्थान दूसरे देशों के लोगों के लिए भी अवसर उपलब्ध कराते हैं।

नेपाल, श्रीलंका और अन्य देशों को सहायता का जिक्र

जयशंकर ने आपातकालीन परिस्थितियों में दूसरे देशों की सहायता करने की भारत की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने नेपाल, श्रीलंका, वेनेजुएला और जमैका का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत जरूरत के समय सहायता पहुंचाने के लिए तैयार रहता है। उन्होंने कहा, “वसुधैव कुटुंबकम का अभ्यास किया जाता है, केवल इसका उपदेश नहीं दिया जाता।”

विदेश मंत्री के मुताबिक, भारत की विदेश नीति में वैश्विक सहयोग और मानवीय सहायता का महत्वपूर्ण स्थान है। देश अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर काम करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भी साझेदारी करता है।

वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए सहयोग जरूरी

जयशंकर ने कहा कि दुनिया में हमेशा से प्रतिस्पर्धा और सहयोग के महत्व को लेकर बहस होती रही है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों का व्यवहार इस बात को निर्धारित करता है कि वैश्विक चुनौतियों से कैसे निपटा जाएगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना लगभग आठ दशक पहले देशों के बीच सामूहिक और सहयोगात्मक प्रयासों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हुई थी। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद एक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस संस्था का उद्देश्य साझा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए देशों के प्रयासों में सामंजस्य स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों और अवसरों का सबसे प्रभावी समाधान सामूहिक प्रयासों के जरिए ही निकाला जा सकता है।

यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों पर जताई चिंता

विदेश मंत्री ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध का प्रभाव केवल संघर्ष वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता। इससे दूर स्थित देशों की अर्थव्यवस्थाएं और आम लोग भी प्रभावित होते हैं, जबकि उनका इन परिस्थितियों पर बहुत कम नियंत्रण होता है।

जयशंकर ने कहा कि भारत का मानना है कि संवाद और कूटनीति ही संघर्षों के समाधान का रास्ता हैं। उन्होंने बताया कि भारत इस दिशा में स्वयं प्रयास कर रहा है और अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए भी तैयार है।

संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत पर दिया जोर

जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा सीमाओं और कमियों को स्वीकार करते हुए इसमें सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार की मांग लगातार मजबूत हो रही है और दुनिया के बड़े हिस्से को वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक संकटों के दौरान केवल दर्शक बने रहने के बजाय नेतृत्व करना चाहिए। विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लंबे समय से लंबित सुधारों के लिए मिलकर प्रयास करने और सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराने की अपील की।

24 अक्टूबर को मनाया जाता है संयुक्त राष्ट्र दिवस

संयुक्त राष्ट्र दिवस हर साल 24 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के लागू होने की वर्षगांठ का प्रतीक है। इसी चार्टर के अनुमोदन के साथ संयुक्त राष्ट्र की औपचारिक स्थापना हुई थी। जयशंकर का संबोधन वैश्विक सहयोग, मानवीय सहायता और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।

© Copyright Galactic Television & Communications Pvt. Ltd. 2026. All rights reserved.